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AIDS मौत का दूसरा नाम! क्या सच में या इससे छुटकारा पाना है संभव

News18Hindi
Updated: December 1, 2019, 1:41 PM IST
AIDS मौत का दूसरा नाम! क्या सच में या इससे छुटकारा पाना है संभव
AIDS मौत का दूसरा नाम! क्या सच में या इससे छुटकारा पाना है संभव

विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day 2019): आंकड़े के मुताबिक पूरी दुनिया में तकरीबन 37 मिलियन लोग HIV से पीड़ित हैं जिनमें बच्चों की तादाद भी 1.8 मिलियन है.

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  • Last Updated: December 1, 2019, 1:41 PM IST
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World AIDS Day: साल 1988 से लगातार 1 दिसंबर को World AIDS Day मनाया जाता है. पिछले 30 सालों में मॉडर्न मेडिसिन में कई बदलाव आए हैं जो एचआईवी (HIV) के खतरे को काफी हद तक कम करने में कामयाब रहे हैं. एक आंकड़े के मुताबिक पूरी दुनिया में तकरीबन 37 मिलियन लोग HIV से पीड़ित हैं जिनमें बच्चों की तादाद भी 1.8 मिलियन है. ज़ाहिर है इतनी बड़ी आबादी के लिए एचआईवी जैसी भयंकर बीमारी से लड़ना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. लेकिन मॉडर्न मेडिसिन (Modern Medicine ) में हुए कई बदलाव ने यूनाईटेड नेशन(United Nation ) जैसी संस्था को एक जरूरी रिपोर्ट उजागर करने के लिए प्रोत्साहित किया जिसमें साल 2030 तक इस बीमारी को खत्म करने के कारगर उपाय पर काफी लंबी चर्चा की गई है...

आइए जानते हैं पिछले तीस साल में AIDS से लड़ने के तौर तरीकों में क्या बदलाव आए हैं....

1- AIDS अब 'मौत' का पर्याय नहीं रह गया है. एक दशक पहले जब किसी रोगी को पता चलता था कि वो एचआईवी पॉजिटिव ( HIV+) है तो उसे ये किसी मृत्यु दंड की सजा जैसा प्रतीत होता था लेकिन अब हालात दिन प्रति दिन समान्य होते जा रहे हैं. AIDS से पीड़ित व्यक्ति भी मॉडर्न मेडिसिन की मदद से सामान्य जिंदगी जी सकता है.ग्लोबल सिटिजन में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक 1988 से साल 1995 के बीच जितने लोगों में HIV पॉजिटिव पाया गया था उनमें 78 फीसदी लोगों की मौत की वजह AIDS को माना गया था वहीं साल 2005 से 2009 के बीच HIV से पीड़ित लोगों की मौत का प्रतिशत महज 5 फीसदी ही रह गया. ज़ाहिर है आज के समय में HIV Positive मालूम पड़ने के बाद तुरंत एंटी रिट्रोवाइरल दवा (Antiretroviral Medication) की शुरूआत कर दी जाती है और .ये रोगी को नॉर्मल लाइफ जीने में मददगार साबित होता है.

2- एचआईवी (HIV) से पीड़ित व्यक्ति इलाज के बाद उस अवस्था में पहुंच सकता है जहां संक्रमित वायरस की मात्रा नहीं के बराबर होगी. ऐसे व्यक्ति में संक्रामक VIRUS की मात्रा नहीं के बराबर होती है इसलिए ऐसे व्यक्तियों से AIDS फैलने का खतरा नहीं के बराबर हो जाता है क्योंकि उनमें Infected Virus जांच में नहीं पाए जाते हैं.

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3- पहले के समय में AIDS से बचने के लिए Safe Sex प्रैक्टिस करने और कंडोम के इस्तेमाल करने के उपर जोर दिया जाता था लेकिन साल 2012 से FDA की सहमति के बाद नए मेडिसिन बाजार में आ जाने से कहानी पूरी तरह बदल चुका है. इस दवा का इस्तेमाल हाई रिस्क ग्रुप में सेक्स के 72 घंटे के बाद भी किया जा सकता है जिसे PEP कहा जाता है. इसे काफी हद तक सुरक्षित बताया गया है.

4- 90 के दशक तक AIDS से पीड़ित लोगों को दिन भर में 20 दवाओं का सेवन करना पड़ता था लेकिन अब इस बीमारी के इलाज के लिए ज्यादातर लोगों को महज एक दवा का सेवन करना पड़ता है और ये सब संभव हो सका है बेहतर मेडिसिन के ईजाद से और मेडिकल साइंस में आए बदलाव से.
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5- AIDS बीमारी की पहचान के बाद साल 1986 में जिस दवा से इलाज किया जाता था उसका नाम था AZT और ये एक प्रकार का क्लिनिकल ट्रायल था जो पीड़ित लोगों को देकर उनके immunity को बढ़ाता था लेकिन साल 2015 तक AIDS के इलाज का तरीका पूरी तरह से बदल चुका था. वेबएमडी.क़ॉम वेबसाइट के मुताबिक 2015 तक 15.8 मिलियन लोग एंटीरिट्रोवाइरल ट्रीटमेंट (Antiretroviral Treatment ) लेना शुरू कर चुके थे जो HIV वाइरस के ग्रोथ को रोकने में कारगर होता है.

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6- AIDS से पीड़ित लोगों में TB की वजह से मौत एक आम बात थी लेकिन ऐसे मरीजों में भी काफी सुधार देखा जा सकता है . उनमें ड्रग रजिस्टेंट पेशेंट का ईलाज 2 साल की जगह 4 महीने में किया जा सकता है. इसलिए AIDS/ HIV पीड़ित मरीजों में मौत की वजह Tuberculosis हुआ करता था वो काफी कम हो सकता है और इस बात का Announcement इसी साल मेलबॉर्न में एक कॉफ्रेंस में किया जा चुका है.

 

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First published: December 1, 2019, 1:40 PM IST
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