गर्भ में पल रहे बच्चे को कोरोना वायरस से है कितना खतरा, जानें

प्रेग्नेंसी के 28 हफ़्तों के बाद जल्दी हो सकता है कोरोना का इंफेक्शन-Image credit/pexels-amina-filkins

प्रेग्नेंसी के 28 हफ़्तों के बाद जल्दी हो सकता है कोरोना का इंफेक्शन-Image credit/pexels-amina-filkins

Risk of fetus in womb from corona virus- कोरोना वायरस से संक्रमित (Infected) प्रसूता (Procreative) का दूध उसके नवजात शिशु (Newborn Baby) को पिलाने के लिए ब्रेस्ट पम्प का सहारा लिया जा सकता है. साफ़-सफाई और सावधानी के साथ ब्रेस्ट पम्प से दूध निकाल कर बच्चे को पिलाया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 6:22 PM IST
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Risk of fetus in womb from corona virus- कोरोना का दौर जारी है, इस दौरान गर्भावस्था (Pregnancy) से गुज़र रही ज्यादातर महिलाओं के ज़हन (Mind) में एक सवाल ज़रूर आ रहा है. कि क्या गर्भ में पल रहे बच्चे को भी कोरोना वायरस से खतरा हो सकता है? तो बता दें, गर्भ के अंदर भी बच्चे को कोविड19 का संक्रमण (Infection) माँ के ज़रिये हो सकता है. लेकिन हर मामले में ऐसा हो ये ज़रूरी भी नहीं है. ये हम नहीं कह रहे, बीबीसी में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक अध्ययन में ये बात सामने आयी है. हालाँकि आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार अभी ये पता नहीं चला है कि ये संक्रमण किस स्तर का होगा और बच्चे पर इसका क्या असर होगा. आइये, इस बारे में कुछ और चीजों को जानते हैं.

क्या प्रेग्नेंट महिला को है कोरोना से ज्यादा खतरा

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला की इम्यूनिटी काफी कम हो जाती है. इसलिए प्रेग्नेंट महिला को इंफेक्शन होने का खतरा काफी ज्यादा होता है. पहले से मौजूद वायरस के केस में ये देखने को मिलता रहा है, इसलिए ये कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस का भी प्रेग्नेंसी पर ऐसा ही असर होगा. इतना ही नहीं कोरोना वायरस के दौर में प्री-मेच्योर डिलीवरी के केस भी बढ़े हैं लेकिन पुख्ता तौर पर ये अभी साबित नहीं हो सका है कि इसकी वजह कोरोना ही है. इस मामले में अभी रिसर्च जारी है.

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 क्या प्रेग्नेंट महिला से गर्भस्थ शिशु तक पहुंच सकता है वायरस


वायरस से संक्रमित प्रेग्नेंट महिला से ये इन्फ़ेक्शन उसके गर्भस्थ शिशु  तक पहुंचे ये ज़रूरी नहीं है. लेकिन कई बार ऐसा होता भी है. जैसे अगर किसी महिला को मलेरिया है तो गर्भस्थ शिशु तक भी ये पहुंच जाता है. दूसरी ओर ऐसा भी होता है कि एचआईवी जैसी स्थिति में भी मां से बच्चे तक इस बीमारी के फैलने की आशंका कम होती है. कुछ वायरस बच्चे के जन्म लेते समय भी उसको संक्रमित करते हैं. तो कई बार बच्चे के जन्म लेने के बाद जब बच्चा माँ के पास रहता है उस दौरान भी कई वायरस बच्चे को संक्रमित करते हैं. इसके लिए हर किसी की स्थिति अलग हो सकती है. कोरोना की बीमारी अभी नई है इसलिए अभी इस पर स्टडी की जा रही है.

प्रेग्नेंट महिला को किस स्तर का हो सकता है इन्फ़ेक्शन



प्रेग्नेंट महिलाओं में कोरोना वायरस इन्फेक्शन के आये केस में आईसीएमआर के अनुसार ये सामने आया है, कि इंफेक्शन हल्का था और जल्दी ठीक भी हो गया. लेकिन प्रेग्नेंसी के 28 हफ़्तों के बाद इंफेक्शन जल्दी और ज्यादा होने का खतरा बहुत होता है. इसलिए ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है. खासकर प्रेग्नेंसी के दौर में हार्ट सम्बन्धी दिक्कतों से गुज़र रही महिलाओं को.

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 क्या वायरस से संक्रमित मां का दूध पिलाया जा सकता है 


आईसीएमआर में की गयी स्टडी के अनुसार, बच्चे को मां का दूध पिलाया जा सकता है. इस बारे में की गयी स्टडी के अनुसार मां के दूध में कोविड19 नहीं पाया गया है. अगर माँ कोरोना संक्रमित है तो बच्चे को अलग रख कर, ब्रेस्ट पम्प के ज़रिये मां का दूध निकाल कर बच्चे को पिला सकते हैं. ध्यान रखें पम्प अच्छी तरह से सेनेटाइज़ किया हुआ हो और मां के हाथ अच्छी तरह से धुले हों. इस दौरान माँ का मास्क लगाना भी ज़रूरी है.

प्रेग्नेंसी में वायरस से कैसे किया जाये बचाव

प्रेग्नेंसी के दौरान मां और उसके गर्भस्थ शिशु को कोरोना वायरस से बचाने के लिए ज़रूरी है कि तमाम सावधानियां बरती जाएं. जैसे कुछ-कुछ देर में हाथ धोते रहना, मास्क कैरी करना और लोगों से दूरी बनाकर रखना. साथ ही हेल्दी डाइट लेना जिससे इम्यूनिटी बढ़े. अगर घर के किसी सदस्य में लक्षण दिखाई दें तो उनसे भी दूरी बनाकर रखी जाये. कोरोना वैक्सीनेशन करवाएं.
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