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बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-खांसी कर रहा है परेशान तो डॉक्टर से यहां जानें इसका समाधान

5 वर्ष की आयु तक के बच्‍चों को नियमित विटामिन डी सप्लीमेंट दें. Image : Canva

5 वर्ष की आयु तक के बच्‍चों को नियमित विटामिन डी सप्लीमेंट दें. Image : Canva

बच्‍चों को सर्दी और खांसी से बचाने के लिए जरूरी है कि उनके डाइट में कार्बोनेटेड कोल्‍ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, प्रोसेस्‍ड ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बच्चों के साथ भीड़भाड़ या धूल भरी जगहों पर जाने से बचें.
प्राणायाम, अनुलोम विलोम साइनस की समस्‍या दूर करता है.

How To Prevent Cough Cold In Kids: विंटर के मौसम में अधिकतर पैरेंट्स की शिकायत रहती है कि उनके बच्‍चों को हमेशा खांसी और सर्दी की परेशानी रहती है, जिस वजह से उनकी रात तो खराब होती ही है, वे दिनभर थकान और बीमार महसूस करते हैं. कई बार इस वजह से बच्‍चे स्‍कूल नहीं जा पाते, जिस वजह से उनकी पढ़ाई में भी नुकसान होने लगता है. ऐसे में अगर आप विंटर आते ही उनके लाइफस्‍टाइल, खानपान और अन्‍य सेहत से जुड़ी बातों का खास तरीके से ध्‍यान रखें तो बच्‍चों की इम्‍यूनिटी को नेचुरली स्‍ट्रॉन्‍ग किया जा सकता है. सीताराम भारतीय विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान के एसोसिएट कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स डॉ प्रशांत त्‍यागी ने बदलते मौसम में बच्‍चों को खांसी और सर्दी से किस तरह बचाया जा सकता है इस बारे में विस्‍तार से जानकारी दी. आइए जानते हैं विस्‍तार से.

बच्‍चों को खांसी सर्दी से बचाने के लिए करें ये काम

डाइट पर दें ध्‍यान
पीडियाट्रिक्स डॉ प्रशांत त्‍यागी
का कहना है कि बच्‍चों को कार्बोनेटेड कोल्‍ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, प्रोसेस्‍ड जूस, अधिक मात्रा में चॉकलेट या कैंडी का सेवन, फ्लेवर वाले दही, सादा दही और केले जैसी चीजों से बिलकुल दूर रखें.

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जीवनशैली में बदलाव
बच्चों के साथ भीड़भाड़ या धूल भरी जगहों पर जाने से बचें. बच्चों के सोने के कमरे में भारी पर्दे, चमड़े के फर्नीचर, कालीन, दीवारों में सीलन, सॉफ्ट टॉय, फर जैकेट, धूल वाले कंबल और बिस्तर से बचाएं. इन चीजों को हटाकर आप इनडोर प्रदूषण को कम कर सकते हैं. समय समय पर बिस्तर के गद्दों को धूप में सुखाना फायदेमंद होगा.

ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज जरूरी
कई वैज्ञानिक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि मुंह बंद रखते हुए नाक से तेजी से सांस लेना और छोड़ना, प्राणायाम, अनुलोम विलोम और कपालभाति आदि बच्‍चों में साइनस की समस्‍या को दूर करने में मदद करता है. इसके लिए आप बच्‍चे को गुब्बारे फुलाना, माउथ ऑर्गन, बांसुरी जैसे म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने दें. ये चीजें फेफड़ों को स्‍ट्रॉन्‍ग करने और ऑक्सीजनेशन में सुधार कर फेफड़ों के ऊतकों का उपचार भी करने का काम करते हैं.

मेडिकेशन का रखें ख्‍याल
-हल्दी, दालचीनी, लौंग, तुलसी, अदरक, लहसुन आदि चीजों को बच्‍चों के खाने में शामिल करें.
बच्चों को चवनप्राश, चूर्ण या होम्योपैथिक चीजें बिना डॉक्‍टर की सलाह के ना दें.

-आप सामान्य सेलाइन वाला नेज़ल ड्रॉप्स, सेट्रीज़ीन, मॉइस्चराइज़र जैसी एलोपैथी दवाएं इस्‍तेमाल कर सकते हैं. बच्‍चों की सामान्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए इनका इस्‍तेमाल किया जा सकता है.

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-5 वर्ष की आयु तक नियमित विटामिन डी सप्लीमेंट दें. ये एलर्जी और बार-बार होने वाले संक्रमण को रोकने का काम करता है.

-अप्रैल/मई और अक्टूबर/नवंबर के महीनों में इन्फ्लुएंजा के टीके बच्‍चों को जरूर लगावाएं. अगर अब तक आपने नहीं लगवाया है तो अभी भी जल्‍द से जल्‍द ले लें. यह स्कूल से होने वाले फ्लू और निमोनिया की संभावना को रोकने का काम करता है. सभी वैक्‍सीन को समय पर बच्‍चों को दिलाते रहें.

Tags: Health, Lifestyle, Parenting tips

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