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बेटे से अच्छी बॉन्डिंग के लिए पिता रखें इन बातों का ख्याल

पिता को अपने बच्चों के लिए समय निकालना ही चाहिए. (Image-Canva)

पिता को अपने बच्चों के लिए समय निकालना ही चाहिए. (Image-Canva)

Bonding Between Father and Son: मां बेटी के रिश्ते की तरह ही पिता बेटे का रिश्ता भी खास होता है. मां और बेटी समय के साथ-साथ एक दूसरे की दोस्त हो जाती हैं लेकिन एक पिता अपनी व्यस्त जीवनशैली के कारण अपने बेटे का दोस्त नहीं बन पाता. ऐसे में एक पिता को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह अपने बच्चे का ऐसा दोस्त बने.

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आज के दौर की व्यस्त जीवन शैली के कारण हम अपने परिवार और अपने बच्चों को समय कम दे पाते हैं. यदि माता और पिता दोनों ही वर्किंग हो तो बच्चों के साथ उनका रिश्ता थोड़ा सा कच्चा हो जाता है. मां बेटी के रिश्ते की तरह ही पिता बेटे का रिश्ता भी खास होता है. मां और बेटी समय के साथ-साथ एक दूसरे की दोस्त हो जाती हैं लेकिन एक पिता अपनी व्यस्त जीवनशैली के कारण अपने बेटे का दोस्त नहीं बन पाता. ऐसे में एक पिता को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह अपने बच्चे का ऐसा दोस्त बने, जिससे वह अपनी सारी बातें शेयर करे.

आइए जानते हैं अपने बेटे से अच्छी बॉन्डिंग (Bonding) रखने के लिए पिता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

– बेटे के सामने एक अच्छा उदाहरण पेश करें
पिता को हमेशा अपने बच्चे के सामने एक अच्छे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि एक बेटा अपने पिता को देखकर ही बहुत सी बातें सीखता है और वैसे ही उसके व्यक्तित्व का विकास होता है. एक पिता को अपने बेटे को धैर्य रखना, बड़ों से अच्छे से बात करना और लोगों का सम्मान करना सिखाना चाहिए.

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-बेटे के साथ बिताएं समय
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में वैसे तो परिवार के लिए समय निकालना थोड़ा सा कठिन है, लेकिन एक पिता को अपने बच्चों के लिए समय निकालना ही चाहिए. आप बच्चों के साथ कई तरह की एक्टिविटीज़ में भाग ले सकते हैं. अपनी छुट्टी वाले दिन अपने बच्चों के साथ कहीं बाहर घूमने जा सकते हैं. इसके अलावा बच्चों के साथ खेलना, बागवानी करना और घर के कामों में साथ देना यह सभी अपने बच्चों के साथ कर सकते हैं.

-नई चीज़ों में दिलचस्पी लें
जब कोई व्यक्ति पिता बन जाता है तो कुछ चीजों में उसकी दिलचस्पी खत्म हो जाती है, लेकिन अपने बेटे के साथ आप अपनी रुचि शेयर कर सकते हैं. जैसे कुकिंग, वीडियो गेम खेलना, कहानियां सुनाना और सुनना यह सभी बच्चों को प्रेरित करती हैं. साथ ही वह दूसरों के सामने अपनी बातें रखना भी सीखते हैं, और बच्चों की बोलने की शैली और हाव-भाव भी विकसित होते हैं.

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-अपने बच्चों की बातें ध्यान से सुने
कई बार ऐसा होता है कि बच्चों की बातें बिना मतलब की लगती हैं, यह बातें आपके लिए बिना मतलब की और बेतुकी हो सकती है, लेकिन ये बच्चों के भावनाएं होती हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि उन्हें कोई सुनने वाला नहीं होता जिसके कारण वो अपनी बातें दबा जाते हैं. इन्हीं कारणों से कई बार बच्चों के मेंटल हेल्थ पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके लिए पिता को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए और उनकी बातें भी सुननी चाहिए. ऐसा करने से बच्चों को अलग तरह की खुशी और संबल मिलता है. जिससे वह खुलकर अपनी बातें और लोगों के सामने भी रख सकते हैं और साथ ही आने वाली चीजों के बारे में अपनी सोच भी बताते हैं.

Tags: Lifestyle, Parenting tips, Relationship

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