Parenting Tips: बच्चे हो गए हैं चिड़चिड़े, इन तरीकों से लाएं सुधार

Parenting Tips: बच्चे हो गए हैं चिड़चिड़े, इन तरीकों से लाएं सुधार
कई बार बच्‍चों का स्‍वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है.

पैरेंट्स को अपने बच्चों (Children) की परवरिश को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं. इनमें से एक बच्चे का चिड़चिड़ा व्यवहार (Irritable Behavior) भी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 18, 2020, 12:24 PM IST
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वर्किंग पैरेंट्स (Working Parents) को अपने बच्चों (Children) की परवरिश को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं. इनमें से एक बच्चे का चिड़चिड़ा व्यवहार (Irritable Behavior) भी है. कई बार पैरेंट्स (Parents) बच्चों के साथ ज्‍यादा समय नहीं बिता पाते, ऐसे में इसकी खीज बच्‍चे यूं निकालने लगते हैं कि वे जिद्दी होने लगते हैं और उनका स्‍वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है. अगर आपका बच्चा भी जिद्दी और चिड़चिड़ा हो गया है तो यह आपके लिए भी एक अहम समस्‍या है, क्‍योंकि इससे जहां आप प्रभावित होते हैं, वहीं बच्‍चे की सेहत (Health) पर भी इसका असर पड़ता है. आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्‍स बता रहे हैं जिनकी मदद से यह समस्‍या दूर की जा सकती है.



गुड बिहेव करें
बच्‍चे जब कोई बात नहीं मानते और मना करने के बावजूद वह वही करते हैं जिनसे उन्‍हें मना किया जाता है, तो पैरेंट्स अक्‍सर बच्‍चों पर हाथ उठा बैठते हैं. मगर इसका हल यह नहीं है. बच्चों का मन बहुत कोमल होता है और ऐसे में उन पर मार-फटकार का असर इस तरह पड़ता है कि वे जिद्दी होने लगते हैं. इसलिए उन्‍हें प्‍यार से समझाएं और उनके साथ कड़ा रवैया अपनाने से बचें.



तुलना करने से बचें
कुछ पैरेंट्स अपने बच्‍चों को सुधारने के लिए दूसरे बच्‍चों से उनकी तुलना करने लगते हैं. मगर इससे बच्‍चों के मन में ईर्ष्‍या पनपने लगती है और वे कहीं न कहीं चिड़चिड़े और जिद्दी होने लगते हैं. इसलिए आपका बच्‍चा जो काम करता है उसकी तारीफ करें और उसे और अच्‍छा करने के लिए प्रेरित करें.



बन जाएं बच्‍चों के दोस्त
वर्किंग पैरेंट्स के पास अपने बच्‍चे के लिए कम ही समय होता है, मगर यह बच्‍चों की अच्‍छी परवरिश के लिए बहुत जरूरी है कि पैरेंट्स उनके साथ समय बिताएं. अगर दिन पर समय नहीं मिलता तो कम से कम सोने से पहले कुछ समय जरूर निकालें. इस दौरान बच्‍चे के दिन भर की बातें करें कि उसने क्‍या किया और कितने समय पढ़ाई की. बच्‍चों के साथ उनके खेलों में शामिल हों. इससे बच्‍चे आपके साथ दोस्‍ताना रवैया रखने लगेंगे. ऐसे में अपनी हर बात शेयर करेंगे. आपका इस तरह का व्‍यवहार उन्‍हें जिद्दी और चिड़चिड़ा होने से बचाता है.

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प्‍यार से समझाएं
बच्‍चों की हर जिद पूरी करना नहीं चाहिए इससे भी बच्‍चे जिद्दी होने लगते हैं. उसे लगता है कि जब वह रोएगा और जिद करेगा तो उसकी बात मान ली जाएगी. इससे बच्चे में अपनी बात मनवाने के लिए जिद करने और गुस्सा करने की आदत पनपने लगती है. इसलिए बच्‍चे की हर बात पूरी न करें, मगर उसे प्‍यार से समझाएं.
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