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जिद और गुस्सा करने वाले बच्चों पर चिल्लाएं नहीं, बस इन 5 बातों पर ध्यान दें

बच्चों पर बात-बात पर गुस्सा ना करें. किसी भी बात पर उन्हें समझने और समझाने से हेल्दी रिलेशन बना रहता है. (फोटो-canva)

बच्चों पर बात-बात पर गुस्सा ना करें. किसी भी बात पर उन्हें समझने और समझाने से हेल्दी रिलेशन बना रहता है. (फोटो-canva)

बदलते जमाने के साथ पैरेंट्स को भी खुद में कुछ बदलाव लाने की जरूरत है. माता-पिता को बच्चों के विचारों को समझना चाहिए. ना ...अधिक पढ़ें

आजकल के लाइफस्टाइल में इंसान पहले ही अपनी ऑफिशियल लाइफ की प्रॉब्लम्स से परेशान होता है कि उसका असर पर्सनल लाइफ पर भी दिखाई देने लगता है. घर में थक कर पहुंचने के बाद बच्चों की बात सुनने की बजाए, अक्सर हम उन्हें टीवी या मोबाइल में बिजी कर देते हैं. ऐसे में बच्चे अपनी बात पैरेंट्स से नहीं कर पाते. ऐसे बच्चे अक्सर किसी खिलौने, कहीं घूमने जाने या किसी ड्रेस को लेकर जिद कर बैठते हैं और उनकी मांग पूरी ना कर हम उन्हें सीधा ना कह देते हैं. बच्चों के साथ कम बातचीत का ही नतीजा होता है कि हम उन पर उस वक्त अपना डिसीजन थोंपना चाहते हैं. उन पर चिल्लाने लगते हैं, डांटने लगते हैं. क्योंकि ऐसी स्थिति में पैरेंट्स के लिए उन्हें समझाना मुश्किल होता है.

आजकल बच्चों के जिद्दी होने की समस्या एक आम बात है. लेकिन इसके पीछे पैरेंट्स की भी कई कमियां हो सकती हैं. आपको उन्हें कैसे ट्रीट करना चाहिए, क्या करें कि बच्चें जिद्दी ना बनें. इसे लेकर कुछ टिप्स हैं. ये जानना बेहद जरूरी है.

सही का भेद बताएं
कई बार होता है ये है कि पैरेंट्स बच्चे को गलती पर डांटते हैं और उसे मजबूरन सही बिहेव करने को कहते हैं. उस वक्त तो बच्चा डर से उनकी बात मान लेता है लेकिन फिर बाद में या पीछे से वो वहीं गलती फिर से करता है. यहां ध्यान देने की जरूरत है. सबसे पहले अपने बच्चे के सही और गलत का भेद समझाएं. अगर आपको अपने बच्चे की कोई हरकत गलत लगती है तो उसे डांटने से वो जिद्दी बन सकता है. उसे प्यार से सही और गलत का भेद समझाएं. जब उसे सही और गलत का भेद पता चल जाएगा तो वो गलती कभी दोबारा नहीं करेगा.

बच्चों की भी सुनें
बदलते जमाने के साथ पैरेंट्स को भी खुद में कुछ बदलाव लाने की जरूरत है. माता-पिता को बच्चों के विचारों को समझना चाहिए. ना कि उन पर अपनी बात मनवाने का प्रेशर बनाना चाहिए. अगर बच्चा कुछ कह रहा है तो उस बात को पहली बार में ही खारिज करने की बजाय बच्चे के सामने ऑप्शंस रखें. इससे बच्चे की बात भी रह जाएगी और आप उसके सामने अपना विकल्प भी रख पाएंगे. इससे बच्चे के पास भी एक काम को करने के लिए मल्टीपल ऑप्शन्स रहेंग, साथ ही बच्चे पर कंट्रोल बनाए रखने में आपको भी मदद मिलेगी.

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हेल्दी माहौल देना बेहद जरूरी
बच्चों पर बात-बात पर गुस्सा ना करें. किसी भी बात पर उन्हें समझने और समझाने से हेल्दी रिलेशन बना रहता है. इसलिए बच्चों को भी बोलने का मौका दें. अगर आप उन्हें बोलने का चांस देंगे तो वे भी आपकी बात को अच्छी तरह से सुनेंगे और आपसे अपनी बातें भी शेयर करेंगे. बच्चों को हमेशा फैमिली में हेल्दी माहौल देना बेहद जरूरी होता है.

बिहेवियर को देख बात को समझें
कई बार ये देखने में आया है कि बच्चा पैरेंट्स का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए छोटी सी बात पर जिद्द कर बैठता है. ऐसे में ये भी हो सकता है कि बच्‍चा किसी बात से परेशान हो. उसे समझ नहीं आ रहा हो कि वो आपसे किस तरह बात करें. यहां पर पैरेंट्स को बच्‍चों के बिहेवियर को देखते हुए उसे समझना चाहिए और शांत बैठकर बातचीत करनी चाहिए.

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बच्चों में विश्वास पैदा करें
ये भी कई बार देखने को मिलता है कि बच्चे अपनी बात को मनवाने के लिए बहस करने लगते हैं क्योंकि ऐसा करने से उन्हें लगता कि उन पर ध्यान दिया जाएगा और उनकी बात जरूर सुनी जाएगी. इसलिए, बच्चों की बातों को ध्यान से सुनकर उनमें ये विश्वास पैदा करना बेहद जरूरी है कि उनकी बात सुनी जाएगी और उसे सीरियसली लिया जाएगा.

Tags: Lifestyle, Parenting, Parenting tips

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