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बच्चा जिद्दी और गुस्सैल बनता जा रहा है तो इन तरीकों से आदतें सुधारें

ज़िद करने पर बच्चे को डांटे नहीं बल्कि प्यार से समझाएं (Image-Shutterstock)

ज़िद करने पर बच्चे को डांटे नहीं बल्कि प्यार से समझाएं (Image-Shutterstock)

Parenting Tips: जिद्दीपन का नकारात्मक (Negative) असर आगे चलकर बच्चे के भविष्य (Future) पर भी पड़ सकता है. इसलिए बच्चों की ये आदत सुधारने की कोशिश करनी चाहिए.

  • News18Hindi
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    Stubborn Kids: बच्चों का जिद्दी (Stubborn) होना बहुत आम है लेकिन उनका हद से ज्यादा और बात-बात पर जिद करना गलत है. इस तरह से उनके व्यवहार में जिद करने की आदत शामिल होती जाएगी. जिसका नकारात्मक (Negative) असर आगे चलकर बच्चे के भविष्य (Future) पर भी पड़ सकता है. इसलिए इससे बचने के लिए माता-पिता को बच्चों की जिद करने की आदत को सुधारने की कोशिश करनी चाहिए. अब इसके लिए माता-पिता क्या कर सकते हैं आइये जानते हैं.

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    बच्चों पर चिल्लाएं नहीं

    अगर आपके बच्चे जिद्दी हैं तो आप उन पर चीखें-चिल्लाएं नहीं बल्कि प्यार से हैंडल करें. शांत रहने पर बच्चे भी ज्यादा शोर-शराबा नहीं करेंगे और आप उनको सही और गलत के बीच में फर्क समझा सकेंगे.

    बहस न करें

    अगर आप बात-बात पर बच्चों से बहस करते हैं, तो जिद्दी बच्चों को बहस करने की आदत हो जाती है. इससे वो बहस करने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं. इसलिए उनको बहस करने का मौका न दें और उनकी बात को ध्यान से सुनें. जब आप बच्चों की बात सुनने लगेंगे तो वो भी आपकी बात पर ध्यान देने की कोशिश करेंगे और जिद कम करेंगे.

    बच्चों के मन की बात समझें

    बच्चों के मन की बात को समझने की कोशिश करें. कई बार बच्चे माता-पिता का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए भी जिद करते हैं. हो सकता है कि आपके बच्चे को किसी बात से दिक्कत दे रही हो और वो आपसे कह नहीं पा रहा हो. इसलिए बच्चों पर निगाह रखें और उनकी हरकतों को देखकर उसे समझने की कोशिश करें.

    नियम बनायें

    आपको कुछ चीजों के लिए नियम बनाने की जरूरत भी है क्योंकि जिद्दी बच्चों को समझाने और उनको डील करने के लिए ऐसा करना जरूरी है. बच्चों को समझाएं कि नियम तोड़ने पर उन्हें क्या नुकसान हो सकता है. आप लगातार बच्चे को नियम और अनुशासन में रखेंगे तो बच्चे का जिद्दीपन कुछ हद तक कम होगा. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि नियम और अनुशासन बहुत ज्यादा सख्त न हो.

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    बच्चों को बोलने का मौका दें

    बच्चों पर केवल अपनी बात न थोपें बल्कि उनको भी बोलने का मौका दें. अगर आप उनको बोलने का मौका देंगे, तो वह भी आपको सुनने की कोशिश करेंगे. साथ ही आपने अपनी बातें भी शेयर करेंगे. समझने और समझाने से बच्चों के साथ हेल्दी रिलेशन बना रहता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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