तुम्हारे बग़ैर मैं बहुत खचाखच रहता हूं, पढ़ें कवि पाश की कविताएं

पाश की कविताएं
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पाश की कविताएं (Pash Poems): सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है, जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्‍बत से चूमना भूल जाती है, और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2020, 3:13 PM IST
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पाश की कविताएं (Pash Poems): कवि पाश एक जानेमाने कवि हैं. पाश को आम आदमी का कवि कहा जाता है. पाश की रचनाएं आकाशगंगीय अजूबों के छंद नहीं गढ़तीं, बल्कि ना जाने कितनी मांओं के आंसुओं से उपजाऊ बन गई ज़मीन पर उगती हैं. यूं तो पाश बीच के रास्ते में यक़ीन नहीं रखते थे. मगर चौड़े कंधे वाले साथियों को सिस्टम के कोल्हू में चुपचाप रेंगते देख उनको पुकारते हैं, दुत्कारते नहीं है.

जब तक पुलिस के सिपाही अपने भाइयों का गला घोंटने को मजबूर हैं

कि दफ़्तरों के बाबू जब तक लिखते हैं लहू से अक्षर हम लड़ेंगे साथी!.



आज हम आपके लिए कविताकोश के साभार से लाए हैं कवि पाश की कुछ मशहूर कविताएं....
1.क्या-क्या नहीं है मेरे पास
शाम की रिमझिम
नूर में चमकती ज़िंदगी
लेकिन मैं हूं
घिरा हुआ अपनों से
क्या झपट लेगा कोई मुझ से
रात में क्या किसी अनजान में
अंधकार में क़ैद कर देंगे
मसल देंगे क्या
जीवन से जीवन
अपनों में से मुझ को क्या कर देंगे अलहदा
और अपनों में से ही मुझे बाहर छिटका देंगे
छिटकी इस पोटली में क़ैद है आपकी मौत का इंतज़ाम
अकूत हूँ सब कुछ हैं मेरे पास
जिसे देखकर तुम समझते हो कुछ नहीं उसमें

अनुवाद : प्रमोद कौंसवाल



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2. तुम्हारे बग़ैर मैं बहुत खचाखच रहता हूँ
यह दुनिया सारी धक्कम-पेल सहित
बे-घर पाश की दहलीजें लाँघ कर आती-जाती है
तुम्हारे बग़ैर मैं पूरे का पूरा तूफ़ान होता हूँ
ज्वार-भाटा और भूकम्प होता हूँ

तुम्हारे बग़ैर
मुझे रोज़ मिलने आते हैं आइंस्टाइन और लेनिन
मेरे साथ बहुत बातें करते हैं
जिनमें तुम्हारा बिलकुल ही ज़िक्र नहीं होता
मसलन : समय एक ऐसा परिंदा है
जो गाँव और तहसील के बीच उड़ता रहता है
और कभी नहीं थकता
सितारे ज़ुल्फ़ों में गूँथे जाते
या जुल्फ़ें सितारों में - एक ही बात है
मसलन : आदमी का एक और नाम मेन्शेविक है
और आदमी की असलियत हर साँस के बीच को खोजना है
लेकिन हाय-हाय!...
बीच का रास्ता कहीं नहीं होता
वैसे इन सारी बातों से तुम्हारा ज़िक्र ग़ायब रहता है

तुम्हारे बग़ैर
मेरे पर्स में हमेशा ही हिटलर का चित्र परेड करता है
उस चित्र की पृष्ठभूमि में
अपने गाँव की पूरे वीराने और बंजर की पटवार होती है
जिसमें मेरे द्वारा निक्की के ब्याह में गिरवी रखी ज़मीन के सिवा
बची ज़मीन भी सिर्फ़ जर्मनों के लिए ही होती है

तुम्हारे बग़ैर, मैं सिद्धार्थ नहीं - बुद्ध होता हूँ
और अपना राहुल
जिसे कभी जन्म नहीं देना
कपिलवस्तु का उत्तराधिकारी नहीं
एक भिक्षु होता है

तुम्हारे बग़ैर मेरे घर का फ़र्श - सेज नहीं
ईंटों का एक समाज होता है
तुम्हारे बग़ैर सरपंच और उसके गुर्गे
हमारी गुप्त डाक के भेदिए नहीं
श्रीमान बी.डी.ओ. के कर्मचारी होते हैं
तुम्हारे बग़ैर अवतार सिंह संधू महज़ पाश
और पाश के सिवाय कुछ नहीं होता

तुम्हारे बग़ैर धरती का गुरुत्व
भुगत रही दुनिया की तक़दीर होती है
या मेरे जिस्म को खरोंचकर गुज़रते अ-हादसे
मेरे भविष्य होते हैं
लेकिन किंदर! जलता जीवन माथे लगता है
तुम्हारे बग़ैर मैं होता ही नहीं.
3. मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना
मुट्ठियां भींचकर बस वक्‍़त निकाल लेना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नज़र में रुकी होती है

सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्‍बत से चूमना भूल जाती है
और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो गीत होता है
जो मरसिए की तरह पढ़ा जाता है
आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर
गुंडों की तरह अकड़ता है
सबसे ख़तरनाक वो चांद होता है
जो हर हत्‍याकांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आंखों में
मिर्चों की तरह नहीं पड़ता

सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए
और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती .
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