मानसिक रोगों से पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय नीति की जरूरत : विशेषज्ञ

दुनिया के मुकाबले भारत में 15 से 29 आयु वर्ग के बीच आत्महत्या करने वालों की दर सबसे ज्यादा है

News18Hindi
Updated: September 12, 2019, 5:51 PM IST
मानसिक रोगों से पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय नीति की जरूरत : विशेषज्ञ
दुनिया के मुकाबले भारत में 15 से 29 आयु वर्ग के बीच आत्महत्या करने वालों की दर सबसे ज्यादा है
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Updated: September 12, 2019, 5:51 PM IST
देश में आत्महत्या की घटनाओं से जुड़े आंकड़ों में लगातार वृद्धि हो रही है लेकिन विडंबना यह है कि इस क्षेत्र में मानसिक रोगों से पीड़ित और आत्महत्या की प्रवृत्ति वाले मरीजों की मदद के लिए सरकारी स्तर पर न तो कोई हेल्पलाइन है और न ही कोई राष्ट्रीय नीति .

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के केंद्रीय अस्पताल ‘राम मनोहर लोहिया अस्पताल’ के मानसिक चिकित्सा विभाग में इन दिनों एक शोध पर काम किया जा रहा है जिसके नतीजों से राष्ट्रीय स्तर पर आत्महत्याओं को रोकने के लिए एक आनलाइन हेल्पलाइन बनाने में मदद मिल सकती है. इस शोध को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा केंद्र सरकार के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम) की मदद से किया जा रहा है

आरएमएल अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में वरिष्ठ मनोचिकित्सक और प्रमुख शोधकर्ता डा. आर पी बेनीवाल ने ‘भाषा’ को यह जानकारी दी. मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब आठ लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं. आंकड़ों के औसत के हिसाब से देखा जाए तो दुनिया में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है.

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर 2018-2020 के लिए डब्लूएचओ का विषय एक साथ मिलकर आत्महत्या की घटनाओं को रोकना है. डब्ल्यूएचओ ने 2014 में एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें इस समस्या के बारे में एक बयान शामिल किया गया था . इसके साथ ही इसमें नीति निर्माताओं के लिए दिशानिर्देश दिए गए थे. इसमें राष्ट्रीय स्तर पर आत्महत्याओं को रोकने के लिए एक नीति बनाने की बात कही गई थी.

आत्महत्या करने वाले लोगों में डिप्रेशन एक मुख्य वजह

डॉ बेनीवाल कहते हैं कि विश्व स्तर पर देखा जाए तो भारत में आत्महत्या का आंकड़ा सबसे ज्यादा है लेकिन देश मे अभी तक कोई राष्ट्रीय नीति नहीं बनी है. उनके अनुसार देश में एक राष्ट्रीय नीति की जरूरत है . साथ ही उनका सुझाव है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मन की बात कार्यक्रम में आत्महत्या के मुद्दे को उठाना चाहिए ताकि लोग इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील बनें. हालांकि विश्व में अभी तक केवल 28 देशों ने ही यह नीति बनाई है.

डॉ बेनीवाल के अनुसार आत्महत्या करने वाले लोगों में डिप्रेशन एक मुख्य वजह पाया गया है. अध्ययन बताते हैं कि उच्च आय वर्ग में आत्महत्या करने वाले 50 फीसदी लोग अवसाद यानी डिप्रेशन से पीड़ित थे .किशोर उम्र के बच्चे डिप्रेशन की चपेट में ज्यादा आते हैं. डॉ बेनीवाल के अनुसार एक व्यक्ति के आत्महत्या करने से उसके दायरे में आने वाले 135 लोग प्रभावित होते हैं. डब्लूएचओ फैलो डा. बेनीवाल के अनुसार इतना ही नहीं 15 से 29 आयुवर्ग के बीच यह मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की साल 2015 की रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 10 करोड़ लोग मानसिक रूप से बीमार हैं लेकिन इनके इलाज के लिए केवल 3800 मनोचिकित्सक, 898 क्लीनिकल मनोचिकित्सक, 850 सामाजिक कार्यकर्ता, 1500 मनोचिकित्सक नर्सें और 43 मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल हैं . इन सभी अस्पतालों में बिस्तरों की कुल संख्या 20 हजार है. कुछ अध्ययनों में कहा गया है कि साल 2020 तक भारत में 20 फीसदी आबादी किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी से प्रभावित होगी . दुनिया के मुकाबले भारत में 15 से 29 आयु वर्ग के बीच आत्महत्या करने वालों की दर सबसे ज्यादा है.

अमेरिका के शिकागो में रहने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी मनोचिकित्सक स्वाति वाजपेयी ने भाषा से बातचीत में बताया कि डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति आत्महत्या करने से पहले कई बार संकेत देता है और उसके परिजनों को उन्हें समझ कर तुरंत मेडिकल सहायता लेने की जरूरत है.

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First published: September 12, 2019, 5:50 PM IST
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