PG story: मेरी रूममेट को पीजी के रसोईए से हो गई थी मोहब्‍बत

मेरे सीनियर का बर्थडे सेलिब्रेशन चल रहा था. मैं और हर्षिता भी पहुंच गए थे लेकिन अंकिता अपने रूम में ही रही.

News18Hindi
Updated: November 10, 2018, 10:36 AM IST
PG story: मेरी रूममेट को पीजी के रसोईए से हो गई थी मोहब्‍बत
पीजी स्‍टोरी
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Updated: November 10, 2018, 10:36 AM IST
ये कहानी सना खान की है. वे दिल्‍ली से ही ताल्‍लुक रखती हैं और बीटेक करने के लिए जयपुर गईं थीं. वे चार साल तक यहां रहीं. आज वे एक बेहतर पैकेज पर एक अच्‍छी कंपनी में काम कर रही हैं लेकिन उस दौरान वे रोई, हंसी और जिंदगी को भरपूर जिया. उन दिनों को याद करते हुए साझा कर रहीं हैं अपने अनुभव...

ये बात उन दिनों की है, जब बारहवीं तक पढ़ाई करने के बाद बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक करने जयपुर गई थी. एडमिशन प्रोसेस ऑनलाइन पूरा हो गया था. सेशन शुरू होने पर डॉयरेक्ट कॉलेज के लिए निकले. मम्मी-पापा कार से छोड़ने गए. रास्ते भर कार की खिड़की पर मुंह रखे बैठी रही. नए शहर में पढ़ाई और दोस्तों संग रातों में घूमने के बारे में सोचकर ही मन खुशी से झूम रहा था. हालांकि एक बात को सोचकर मन दुखी भी था कि मम्‍मी-पापा से दूर कैसे रहूंगी,  क्‍योंकि आज से पहले मम्‍मी- पापा से मैं कभी दूर नहीं रही थी. इसलिए उनके बिना कैसे रहूंगी ? ये सोचकर ही मन उदास था.

ये सोचते- सोचते हम जयपुर की धरती पर पहुंच चुके थे. इंजीनियरिंग कॉलेज यहां से  करीब 50 किलोमीटर दूर गांव में था. रहने का बंदोबस्त भी वहीं हुआ. पीजी की फॉर्मेलिटी पूरी की. मगर जैसे ही वे मम्‍मा- पापा की गाड़ी गेट के बाहर जाने लगी ऐसा लगा कि जान ही निकल जाएगी. दोस्तों संग हैंगआउट के ख्वाब हवा हो गए. एक क्षण के लिए लगा कि मैं सबकुछ छोड़कर अभी भाग जाऊं.

दिल्ली से आई एक बिंदास लड़की को न जाने उस लम्हे में क्या हुआ. गाड़ी जितनी दूर तक दिखी, मैं दरवाज़े को पकड़े उसे देखती रही. आंसूओं पर काबू नहीं था. मम्‍मा-पापा को दिल्ली लौटे हुए तीन दिन हो चुके थे और मैं कमरे में पड़ी लगातार रो रही थी. रूममेट मेस से बीच-बीच में खाने को ला देती तो मैं खा लेती. इन तीन दिनों में रोते -रोते कब आंख लग जाती, मालूम नहीं चला. सोकर उठती तो रोना आता. इस दौरान मेरी रूममेट हर्षिता ने मुझे समझाया और बताया कि ऐसे मत रो. ऐसे रोएगी तो तेरा किसी चीज में मन ही नहीं लगेगा.  इसलिए खुद को संभालने की कोशिश करो.  मेरे साथ रूम शेयर करने वाली अंकिता अपनी किताबों में ही गुम  थी. उसे दुनिया-  जहांन से ज्‍यादा मतलब नहीं था. वो अपने में गुम रहती थीं.

उसकी बातें मुझे ठीक लगी. आखिर वो कह भी तो ठीक ही रही थी. बेहतर करियर के लिए हम ये सब कुर्बानी तो देनी पड़ती है. फिर मम्‍मा-पापा भी तो चाहते हैं कि मैं करियर में अच्‍छा करुं. उसके बाद मैंने खुद को संभाला. पढ़ाई में दिल लगाने के साथ-साथ रूममेट के साथ भी घुलने- मिलने की कोशिश की. उसके बाद तो क्‍या सीनियर और क्‍या जूनियर. सबके साथ कूल हो गई.

एक दिन का वाकया याद आता है मुझे. मेरी एक सीनियर का बर्थडे था. इसके लिए एक सेलिब्रेशन पार्टी रखी गई थी. मैं और हर्षिता भी पहुंच गए थे. अंकिता अपने रूम में ही रही. उसने कहा कि उसके सिर में दर्द हो रहा है. वो नहीं अाएगी.  इसलिए मैं और हर्षिता दोनों सीनियर के रूम पर पहुंचे चुके थे तभी अचानक से लड़कियों के शोर की आवाजें आने लगी थीं. हम लोग भी पार्टी छोड़कर ये जानने के लिए पहुंचे थे  कि आखिर क्‍या हुआ तो पता चला कि पीजी के हॉनर एक लड़के को डांट रहे थे या कहें कि बकायदा धमका रहे थे तो गलत नहीं होगा. हमें समझ नहीं आ रहा था कि वो लड़का है कौन ? ये जानने के लिए हम सभी सीढ़ियों से उतर गए. देखा तो हमारा किचेन ब्‍वॉय था. जब वो डांट कर चले गए तो पूरा मामला खुला.

पहले से वहां पहुंची लड़कियों ने हमें बताया कि किचेन ब्‍वॉय और अंकिता स्‍टोर रूम में किस कर रहे थे.  ऐसा करते हुए उन्‍हें पीजी ऑनर ने पकड़ लिया था. इसीलिए उन्‍होंने अंकिता से तो कुछ नहीं  कहा लेकिन हां किचेन ब्‍वॉय को जमकर डांटा.  उसके बाद हम ये जानकर सन्‍न रह गए कि रूममेट को किचेन ब्‍वॉय से मोहब्‍बत हो गई थी.
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