#PGStory: फर्स्ट आने के बावजूद रिजल्ट वाले दिन पापा ने जड़ा था थप्पड़

वो टीचर के चैलंज पर खरा उतरा था, अच्छे नंबर लाकर दिखा दिए थे. पर टीचर को जवाब देकर उसने जो मुसीबत मौल ली थी वो उसे भारी पड़ी.

News18Hindi
Updated: September 16, 2018, 3:27 PM IST
#PGStory: फर्स्ट आने के बावजूद रिजल्ट वाले दिन पापा ने जड़ा था थप्पड़
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: September 16, 2018, 3:27 PM IST
(News18 हिन्दी की सीरीज़ 'पीजी स्‍टोरी' की 87वीं कहानी दिल्ली से मुंबई में नौकरी करने गए एक लड़के की है. जिसे फ्लैट का किराया देना पड़ा. )

मां का ट्रांस्फर हुआ था और हम साल के बीच नए शहर में गए थे. मैं 11वीं में था. नए शहर के स्कूल की क्लास में एक लड़का था आनंद. बहुत बंक मारता था. हफ्ते में एक-दो दिन तो ज़रूर ही. स्कूल के पास एक गर्ल्स कॉलेज था. और कॉलेज के पास था एक पार्क. वो वहीं जाता था. वहां कॉलेज की लड़कियां बहुत आती थीं.

एक दिन बंक पर था. क्लास टीचर ने उसे वहां देखा. लेकिन लड़के ने मैम को नहीं देखा था. टीचर ने उसे वहां टोका नहीं. अगले दिन वह नॉर्मली स्कूल आया. प्रेयर हुई. क्लास में अटेंडेंस लगी. लड़के का नाम आया. उसने जवाब दिया, यस मैम. टीचर ने डायरेक्ट पूछा, कल कहां थे तुम? उसने कहा कल मैं स्कूल नहीं आया था.

टीचर बोली, हां वो तो मुझे भी पता है. पर थे कहां. उसने सपाट से कहा, मैं स्कूल बंक मार रहा था. स्कूल टाइम में 'स्कूल बंक मारना' शब्द गुनाह था. लेकिन मैम के सामने सीधा-सपाट तौर पर कह देना बेशर्मी करार दिया गया.



मैम ने कहा, बंक क्यों मार रहे थे. उसने कहा, क्लास में पढ़ाई नहीं होती. बच्चे पढ़ाई से ज्यादा मस्ती करते हैं. यहां मैं पढ़ नहीं पाता, इसलिए वहां जाकर पढ़ाई करता हूं. अच्छे नंबर लाने हैं तो ज्यादा पढ़ाई करनी होगी. इसलिए मैं वहां जाता हूं. वो इकॉनोमिक्स की टीचर थी. उसने कहा अच्छा. देखती हूं इको में तुम्हारे कितने नंबर आते हैं.

ठीक 3 महीने बाद फाइनल के एग्जाम्स थे. फिर रिज़ल्ट आया. और आनंद न सिर्फ क्लास में बल्कि पूरे स्कूल के इतिहास में इको में सबसे ज्यादा नंबर लाया. और टॉपर रहा. आम तौर पर फर्स्ट आने वाले लड़के बेहद पढ़ाकू टाइप के होते हैं. पर वो अलग था. वो टीचर के चैलंज पर खरा उतरा था, अच्छे नंबर लाकर दिखा दिए थे. पर टीचर को जवाब देकर उसने जो मुसीबत मौल ली ती वो उसे भारी पड़ी.

पेरेंट्स के हाथ में रिपोर्ट कार्ड देते हुए टीचर ने उसके पेरेंट्स से कहा, आपका बेटा हफ्ते के 6 में से 4 ही दिन स्कूल आता था. और बाकी के 2 दिन 'उस पार्क' में लड़कियां ताड़ने जाता था. फर्स्ट आए बेटे को शाबाशी देने की बजाय की बजाय पिताजी ने दो थप्पड़ जड़े थे. वह फिलहाल मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में काम कर रहा है.

(सीरीज PG Story में पीजी में रहने वाली उन लड़कियों और लड़कों के तजुर्बों को सिलसिलेवार साझा किया जा रहा है, जो अपने घर, गांव, कस्‍बे और छोटे शहर से निकलकर महानगरों में पढ़ने, अपना जीवन बनाने आए. हममें से ज़्यादातर साथी अपने शहर से दूर, कभी न कभी पीजी में रहे या रह रहे हैं. मुमकिन है, इन कहानियों में आपको अपनी जिंदगी की भी झलक मिले. आपके पास भी कोई कहानी है तो हमें इस पते पर ईमेल करें- ask.life@nw18.com. आपकी कहानी को इस सीरीज में जगह देंगे.)

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