#PGStory: 'उसने बदला लेने के लिए नवरात्र के दौरान माता आने का ढोंग कर मुझे डराया'

वो बिहार के बेगूसराय से थी. वो पढ़ाई में अच्छी थी, मुझे लगा उससे बहुत कुछ सीख सकती हूं. लेकिन दूर दूर से सब अच्छा लगता है, वो बड़ी अजीब निकली

Farha Fatima | News18Hindi
Updated: August 12, 2018, 10:56 AM IST
#PGStory: 'उसने बदला लेने के लिए नवरात्र के दौरान माता आने का ढोंग कर मुझे डराया'
प्रतीकात्मक तस्वीर
Farha Fatima | News18Hindi
Updated: August 12, 2018, 10:56 AM IST
(News18 हिन्दी की सीरीज़ 'पीजी स्‍टोरी' की ये 54वीं कहानी है. इस सीरीज में पीजी में रहने वाली उन लड़कियों और लड़कों के तजुर्बों को सिलसिलेवार साझा किया जा रहा है, जो अपने घर, गांव, कस्‍बे और छोटे शहर से निकलकर महानगरों में पढ़ने, अपना जीवन बनाने आए. हममें से ज़्यादातर साथी अपने शहर से दूर, कभी न कभी पीजी में रहे या रह रहे हैं. मुमकिन है, इन कहानियों में आपको अपनी जिंदगी की भी झलक मिले. आपके पास भी कोई कहानी है तो हमें इस पते पर ईमेल करें- ask.life@nw18.com. आपकी कहानी को इस सीरीज में जगह देंगे.

ये कहानी है मेरठ से दिल्ली पढ़ने आई एक लड़की की है, जिसकी रूममेट ने उसे परेशान करने के लिए, नवरात्र के दौरान खुद पर माता आने का ढोंग किया.)

मेरठ से 12वीं के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. पापा का ट्रांस्फर भी दिल्ली हो गया था. शुरुआती 1-2 महीने मेरठ से दिल्ली ट्रेवल किया. रोजाना 4 से 5 घंटे ट्रैवल में लगते. घर जाकर सिर्फ सो जाती. पढ़ाई बिलकुल नहीं हो पा रही थी. थका देने वाले रुटीन का अहसास घर वालों को भी जल्द ही हुआ. पीजी में रहने का इंतजाम करने का फैसला किया गया.

मेरठ से ही आते-जाते पीजी ढूंढ़ना शुरू किया. पीजी मिला, मयूर विहार के पास अशोक नगर में. अशोक नगर नोएडा के नज़दीक ही है. वहां से इंस्टीट्यूट जाने में बमुश्किल आधा घंटे का फासला था. मेरे अलावा और भी लड़कियां थीं, जिन्हें पीजी में रहना था. दो से चार, चार से पांच और फिर हम कुल जमा छह लड़कियां हो गए. हमें पीजी का ग्राउंड फ्लोर मिला. किराया कुल जमा 6 हजार. 6 ही लड़कियां. अफॉर्डेबल था.



खाना, हमारा अपना था. रसोई थी. दो कमरे थे. साल भर पूरा हुआ, गर्मियों की छुट्टियां पड़ीं. मैं घर गई. एक कमरे में तीन लड़कियों ने रहना चुना. रूममेट्स के मामले में मेरी किस्मत ख़राब रही. कहने को तो दोनों उम्र में मुझसे बड़ी थीं लेकिन उनका तजुर्बा मुझे कुछ सिखा नहीं रहा था. एक बिहार से थी, एक दिल्ली से ही. चालाकियों में दोनों एक से बढ़कर एक. ख़ैर, एक साल पूरा हुआ.

गर्मियों की छुट्टियों में घर गई. वापस आई नया पीजी ढूंढा. कॉलेज की एक इंटेलीजेंट सी लड़की के साथ शिफ्ट हुई. ये पीजी अशोक नगर ने ईस्टर्न अपार्टमेंट के पास था. पहला फ्लोर मिला. ग्राउंड पर मकानमालिक थे. 3 bhk था. एक कमरे का किराया 4 हजार पड़ रहा था. मैं जिस लड़की के साथ शिफ्ट हुई, वो मुझे चालू सी थी. अंग्रेजी भी अच्छी थी. कॉलेज के पहले साल मैंने सीखा. कुछ अच्छा करना है तो पहले संगत अच्छी ढूंढो.
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वो बिहार के बेगूसराय से थी. वो पढ़ाई में अच्छी थी, मुझे लगा उससे बहुत कुछ सीख सकती हूं. लेकिन दूर दूर से सब अच्छा लगता है, वो बड़ी अजीब निकली.  एक ही कपड़े को हफ्तों तक पहनती. उसे देखकर मेरे जहन में खुजली सी होने लगती. एक ब्लैक पजामा पूरे हफ्ते पहनती. मैंने कहा धोती क्यों नहीं. तो
बोली, पजामे में क्या है. गंदा थोड़ी है. अंदर कच्छा तो पहनती हूं.

मेरे पास वॉशिंग मशीन थी. अपने कपड़े भी उसी में धुलने के लिए डाल देती. मुझे घिन आती. एक दिन मैं उसपे इसी बात पे चिल्लाई. तब नवरात्रों के दिन शुरू हो गए थे. जिस शाम मेरा झगड़ा हुआ उसी रात से उसने मुझे तंग करना शुरू किया. रात के तीन बजे थे. कमरे में ढेरों अगरबत्तियां जलाकर सब धुआं धुआं कर दिया. जय मां जय मां, जय मां करना शुरू किया. आंख खुली तो मैं डर गई. लगा इसपर माता आई है. उसने मुझे 4-5 दिन ऐसे ही डराया.

वो उन दिनों कॉलेज नहीं जाती. बोलती व्रत है. हर शाम को मैं कॉलेज से आती तो नया किस्से सुनाती. आज माता ने ये कहा, वो कहा. तू मेरे लिए खाना बना दे. मेरा व्रत है. मैं बना दिया करती. एक दिन बोली माता ने कहा था, लाल कुर्ता और पजामा 5 दिन पहनना है.



हफ्ता भर होने को था. हर सुबह 3 बजे उठना और शाम को घर का काम. मैं थक गई जाती थी. एक दिन कॉलेज में बेहोश हो गई. दोस्त के साथ जल्दी घर आई देखा वो घोड़े बेचकर सो रही थी. कोई 'ध्यान' नहीं कर रही थी. साइड टेबल पर बर्गर, चिप्स समेत दुनियाभर का खाने का सामान रखा था. मैंने पूछा ये सब क्या है. हकबकार बोली, मां ने कहा है. तू कठोर तप मत कर, स्टूडेंट है. बीमार हो जाएगी.

सारा मामला समझ में आया. मैंने साफ कह दिया, आगे से ये सब तमाशा किया तो मकानमालिक से कंप्लेंट कर दूंगी. खूब कहा सुनी हुई और उसकी बातों से साफ जाहिर था वो ये सब एक दिन उससे ऊंची आवाज़ में बात करने की वजह से कर रही थी.

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