#PGStory: रूममेट ने उड़ा दिया था सारा शैम्पू, कपड़े धोने के साबुन से धोए बाल

कॉलेज जाने के लिए लेट हो रही थी. जल्दी-जल्दी में नहाने गई. बाल भिगो लिए थे और शैम्पू ख्त्म था. बाथरूम में रखी घड़ी साबुन बालों में घिसी और कॉलेज भागी.


Updated: September 11, 2018, 9:48 AM IST
#PGStory: रूममेट ने उड़ा दिया था सारा शैम्पू, कपड़े धोने के साबुन से धोए बाल
प्रतीकात्मक तस्वीर

Updated: September 11, 2018, 9:48 AM IST
(News18 हिन्दी की सीरीज़ 'पीजी स्‍टोरी' की 83वीं कहानी नए शहर में पढ़ाई करने गई एक लड़की की है. जिसे पहले पीजी की पहली रूममेट से खराब तजुर्बा मिला. वो शुरुआत से ही उसकी हर छोटी-मोटी चीज़ चुराने लगी.)

यूपी के मुरादाबाद से स्कूलिंग के बाद दिल्ली आई. मुरादाबाद उन दिनों छोटा सा शहर हुआ करता था, बसावट महज 10 किलोमीटर में फैली थी. पढ़ाई के लिए दिल्ली को ही चुनने की खास वजह थी. महानगर का मुरादाबाद के क़रीब होना, इस शहर में रिश्तेदारों का होना. 2010 में दिल्ली की आई.पी. यूनिवर्सिटी के कॉलेज 'लिंग्याज ललिता देवी' से जर्नलिज़्म में ग्रेजुएशन किया.

जब दिल्ली आई तो पहली बार परिवार छूटा. बहुत रोई. वे सब मुझे पीजी छोड़ने आए. पीजी, कज़िन बहन के घर के नज़दीक ढूंढ़ा गया था. मां-पिता की कमी को पूरा करने के लिए तो नहीं, पर बहन के पास अकसर जाती. शुरू का एक महीना तो ऐसे था कि पीजी जाने का मन ही नहीं करता. कॉलेज से सीधा बहन के घर. शनिवार, रविवार भी उसी के यहां.



पहला पीजी
शाम का वक्त था, गर्मी के दिन थे. कमरे में घुसी तो कोनों में मकड़ी के जाले लगे थे. ए.सी. की कल्पना करना यहां संभव नहीं था. कमरे के नज़दीक रसोई की तपन ने रही-सही कसर पूरी कर दी थी. एक फोल्डिंग पलंग था, करवट लेने पर चर्र-मर्र की आवाज करता. कमरे में टूटा आईना भी नहीं.

बाथरूम ऐसा जिसे देखकर उबकाई आ जाए. टॉयलेट में फ्लश खराब. मां ने बाल्टी-मग दिया था, जो टॉयलेट साफ करने के काम आया. टॉयलेट में बाल्टी भर-भर के पानी डालती. कमरे में धीमी रौशनी की एक रॉड. बाथरूम में भी ज़ीरो वॉट का बल्ब था.



पीजी की पहली सुबह नाश्ता नहीं मिला था. खाना पकाने वाली आंटी नहीं आई थी क्योंकि उस समय पीजी में मैं ही अकेली लड़की थी.

पहली रूममेट बड़ी अजीब थी. कानपुर से थी. सारे ब्यूटी प्रोडक्ट्स मेरे ही इस्तेमाल करती थी. शुरुआत में तो पूछकर लेती थी. फिर बिना पूछे. पीजी में रहते हुए महीना ही बीतने को था. कॉलेज जाने के लिए लेट हो रही थी. जल्दी-जल्दी में नहाने गई. बाल भिगो लिए थे और शैम्पू ख्त्म था. बाथरूम में रखी घड़ी साबुन बालों में घिसी और कॉलेज भागी.

सीरीज PG Story में पीजी में रहने वाली उन लड़कियों और लड़कों के तजुर्बों को सिलसिलेवार साझा किया जा रहा है, जो अपने घर, गांव, कस्‍बे और छोटे शहर से निकलकर महानगरों में पढ़ने, अपना जीवन बनाने आए. हममें से ज़्यादातर साथी अपने शहर से दूर, कभी न कभी पीजी में रहे या रह रहे हैं. मुमकिन है, इन कहानियों में आपको अपनी जिंदगी की भी झलक मिले. आपके पास भी कोई कहानी है तो हमें इस पते पर ईमेल करें- ask.life@nw18.com. आपकी कहानी को इस सीरीज में जगह देंगे.)

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