कलम के जादूगर गुलजार की बेहतरीन नज्मों की दीवानी है दुनिया

कलम के जादूगर गुलजार की बेहतरीन नज्मों की दीवानी है दुनिया
गुलजार साहब ने अपने चाहने वालों के लिए फेसबुक पेज पर नज्मों का एक वीडियो शेयर किया है.

सोशल मीडिया (Social Media) पर इन दिनों शायर गुलजार (Poet Gulzar) साबह को उनके चाहने वाले जन्म दिन (Birthday) की बधाई दे रहे हैं. इसी बीच गुलजार साबह ने अपने फेसबुक (Facebook) पेज पर नज्मों का एक वीडियो (Video) शेयर किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 2:00 PM IST
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आज गुलज़ार (Gulzar) साबह के नाम से कौन वाक़िफ़ नहीं है. लोगों ने उनकी बनाई फ़िल्में (Movies) देखीं, उनके संवाद सुने और उनके लिखे गीतों को भी भरपूर प्यार दिया. इसके अलावा गुलज़ार साहब ने नज़्में और ग़ज़लें (Ghazals) भी लिखी हैं. फिर भी आइए एक बार हम आपसे उनका परिचय करा देते हैं. गुलज़ार साबह का पूरा नाम समपूरन सिंह कालरा है. इन्होने कई हिंदी फिल्मों (Hindi Movies) के लिए भी कई गीत (Songs) लिखे हैं, जिसकी वजह से आज इनको पूरी दुनिया में लोग जानते हैं. गुलजार साहब का जन्म 18 अगस्त 1934 में पकिस्तान में हुआ था. इन्होंने अपनी रचनाओं को हिंदी, उर्दू और पंजाबी में भाषाओ में लिखा है. गुलजार साहब ने कल यानी 18 अगस्त को अपना 86वां जन्मदिन मनाया है.

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इस मौके पर सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी रचनाएं साझा करते हुए उन्‍हें जन्‍मदिन की शुभकामनाएं दीं. कल से गुलजार साबह के लिखे गीत, कविताएं पूरा दिन सोशल मीडिया पर छाए हैं. वहीं गुलजार साहब ने अपने चाहने वालों के लिए नन्मों का एक वीडियो फेसबुक पर शेयर किया है, जिसको सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है. आइए आपको वो स्टिल फोटो वाला वीडियो दिखाते हैं. आखिर गुलजार साबह ने अपने चाहने वालों के लिए क्या शेयर किया है...




शोसल मीडिया पर उनके चाहने वाले गुलज़ार साबह के द्वारा लिखी गई कुछ शायरियों को शेयर कर रहे हैं, जिसे हम आप तक पहुंचा रहे हैं...

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं,
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ.
यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता,
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता.

आप के बाद हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है.
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई,
जैसे एहसान उतारता है कोई.

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आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई.
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं,
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं.

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते.
ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा,
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है.

काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी,
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी.
खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं,
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है.
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