• Home
  • »
  • News
  • »
  • lifestyle
  • »
  • Positive news- 11 साल की उम्र में दूसरे बच्चों को मुफ्त पढ़ाकर शिक्षा की मशाल जला रही हैं दीपिका

Positive news- 11 साल की उम्र में दूसरे बच्चों को मुफ्त पढ़ाकर शिक्षा की मशाल जला रही हैं दीपिका

11 साल की उम्र में शिक्षा का अलख जगाने पर दीपिका की देशभर में तारीफ हो रही है. (Image: Shutterstock.com)

11 साल की उम्र में शिक्षा का अलख जगाने पर दीपिका की देशभर में तारीफ हो रही है. (Image: Shutterstock.com)

Dipika conducting free classes: झारखंड में चंद्रपाड़ा गांव की दीपिका मिंज लॉकडाउन में इधर-उधर घूम रहे बच्चे को देखकर परेशान हो गईं. इसके बाद इन बच्चों को उन्होंने इंग्लिश और मैथ्स पढ़ाना शुरू कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    Dipika conducting free classes: कुछ करने का जज्बा हो, तो उम्र कोई बाधा नहीं बन सकती. छोटी सी उम्र में भी बड़ा कारनामा किया जा सकता है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक झारखंड की 11 साल की एक लड़की ने ऐसा ही कारनामा किया है. लॉकडाउन में जब सब कुछ ठप हो गया था, तो सबसे ज्यादा असर गांव के बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा. गांव के बच्चों तक ऑनलाइन पढ़ाई का कोई माध्यम नहीं था. ऐसे में 11 साल की दीपिका मिंज ने खुद ही अपने से निचली कक्षा के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने का बीड़ा उठा लिया और देखते-देखते उनके साथ गांव के इस उम्र के लगभग सभी बच्चे जुड़ गए.

    इतना ही नहीं, दीपिका ने ग्राम सभा को भी बड़े बच्चों को इसी तरह पढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद बड़ी कक्षा के छात्रों को भी इसी तरह मुफ्त में शिक्षा मिलने लगी. सीनियर कक्षाओं में फिलहाल सौ बच्चे पढ़ रहे हैं.

    इसे भी पढ़ेंः  Teacher’s Day 2021: एक महिला ने दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया, सोशल मीडिया से ऐसे निकला रास्ता

    दीपिका मैथ्स और इंग्लिश पढ़ाती हैं

    खूंटी जिला के चंद्रपाड़ा गांव की रहने वालीं दीपिका एक प्राइवेट स्कूल में 7वीं कक्षा की छात्रा हैं. उन्होंने अपनी कक्षा में जो कुछ पढ़ा था, वह सब अपने से छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया. दीपिका अपने से जूनियर बच्चों को मैथ्स और इंग्लिश पढ़ा रही हैं. इन बच्चों को पढ़ाने के बाद दीपिका खुद सीनियर क्लास में पढ़ने चली जाती हैं. दीपिका कहती हैं, एक बार लॉकडाउन के दौरान जब इन बच्चों को इधर-उधर खेलते देखा, तो अचानक मुझे ख्याल आया कि जब मैं खुद अपने स्कूल में पढ़ाई गई चीजों को भूलने लगी हूं, तो ये बच्चे भी अपने स्कूल की सारी पढ़ाई भूल ही गए होंगे. इस तरह मेरे मन में इन बच्चों को पढ़ाने का ख्याल आया. मुझे लगा कि इससे जो कुछ मैंने पिछली कक्षा में पढ़ा, उसका रिवीजन भी हो जाएगा और ये बच्चे पढ़ भी लेंगे.

    इसे भी पढ़ेंः  Exclusive: कम उम्र में डिप्रेशन को हरा कर कई बच्चों की मदद कर रही हैं अर्शिया गौड़

    आईएएस बनना चाहती हैं दीपिका
    दीपिका ने कहा, इस बात की पड़ताल के लिए जब मैंने इन बच्चों से कुछ सवाल पूछे, तो ये बच्चे जवाब नहीं दे सके. इसके बाद मैंने फैसला किया कि इन बच्चों को पढ़ाउंगी. शुरुआत में मैंने दो बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. एक नर्सरी का बच्चा था, दूसरा दूसरी क्लास का. जब गांव वालों को पता चला, तो कुछ और बच्चे आए. अभी मेरे पास 20 से ज्यादा बच्चे हैं.

    जब इन बच्चों की संख्या ज्यादा हो गई, तो मेरी एक दोस्त तनु स्नेहा लाकड़ा ने भी मेरा साथ देना शुरू किया. इसके बाद हम दोनों ने इन बच्चों को एक पेड़ के पास बने चबूतरे पर पढ़ाना शुरू किया. इस काम के लिए दीपिका को देशभर में तारीफें मिल रही हैं. सरकार ने भी इनके काम को सम्मान दिया है. दीपिका बड़ी होकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं, ताकि लोगों के लिए कुछ अच्छा किया जा सके.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज