सुप्त वज्रासन और मकरासन से पेट की समस्याएं होंगी छूमंतर, सीखें योग सविता यादव के साथ

सुप्त वज्रासन और मकरासन से पेट की समस्याएं होंगी छूमंतर, सीखें योग सविता यादव के साथ
योग एक्सपर्ट सविता यादव के साथ करें योग

योग एक्सपर्ट सविता यादव (Yoga Expert Savita Yadav) ने लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) में कई जरूरी योगासनों को करना बताया और इसके साथ ही योग के फायदे भी गिनाए...

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  • Last Updated: September 12, 2020, 12:18 PM IST
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लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) में कपालभारती (Kapalbhati) से लेकर छोटे-छोटे कई अभ्यासों को करने के बारे में बताया और दिखाया गया. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. आप इसमें एक दिन में निपुण नहीं बन सकते. अभ्यास करते हुए ही यह एक आदत के रूप में उभर कर आएगा. इस लाइव योग सेशन में कपालभारती, पश्चिमोत्तानासन, सुप्त वज्रासन आसान अभ्यास सिखाए गए.

स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज: स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से शरीर में लचीलापन बना रहता है. इससे बॉडी के जॉइंट्स ठीक तरह से काम करते हैं और योग क्रिया के दौरान दिक्कत नहीं आती है.

इंजन दौड़: इंजन दौड़ योग-स्टीम इंजन की तरह होती है. जैसे स्टीम इंजन चलते हुए छुक छुक की आवाज करता है, उसी तरह इस क्रिया को करते हुए सांस की आवाज निकलती है. इसमें, हाथों और पैरों को वैलेट की तरह चलाना पड़ता है. अब बात करते हैं इस क्रिया के लाभ की. इंजन क्रिया से फेफड़ों का विकास होता है. फेफड़ों में ताज़ा हवा जाती है. इसके अलावा, नाड़ियों का भी अत्यंत तेजी से विकास होता है. इस क्रिया को नियमित रूप से करने से चेहरा कांतिमान हो जाता है. इंजन क्रिया मोटापा दूर करने के लिए अच्छा योग माना जाता है. इसे करने से पेट, कमर, जांघों आदि की चर्बी कम होने लगती है. यह क्रिया दौड़ का अभ्यास करने वाले लोगों को काफी फायदा पहुंचाती है.



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पश्चिमोत्तानासन


पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.



पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है

सुप्त वज्रासन

सुप्त वज्रासन करने के लिए सबसे पहले आप वज्रासन में बैठ जाएं. कोहनियों (Elbows) का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और कोहनियों को जमीन पर टिका दें. अब कंधों को जमीन पर टिकाते हुए एवं घुटनों को एक साथ रखते हुए पीठ के बल लेट जाएं. हाथों को कैची की तरह बनाते हुए कंधे के नीचे ले जाएं. गहरी सांस लें और गहरी सांस छोड़ें. धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में वापस आएं. शुरुआत में इसे 3 से 5 बार तक करें.

सुप्त वज्रासन के फायदे:
कब्ज से राहत मिलती है.
पेट की मसल्स टोन होती हैं और पेट की समस्याएं ठीक रहती हैं.
पीठ दर्द ठीक होता और घुटने मजबूत होते हैं.

भुजंगासन
भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

भुजंगासन के फायदे
-रीढ़ की हड्डी में मजबूती और लचीलापन
-पेट के निचले हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ती है
-पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ती है
-मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिलती है
-कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है
-फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है
-डिप्रेशन में भी इससे फायदा मिलता है
-अस्थमा में भी राहत

मकरासन :
मकरासन करने के लिए पेट के बाल लेट जाएं. सिर और कंधों को ऊपर उठाएं और ठोड़ी को हथेलियों पर और कोहनियों को ज़मीन पर टिका लें. रीढ़ की हड्डी में अधिक मोड़ लाने के लिए कोहनियों को एक साथ रखें (ध्यान रहे ऐसा करने में दर्द ना हो). गर्दन पर अतिरिक्त दबाव हो तो कोहनियों को थोड़ा अलग करें. अगर कोहनियां ज़्यादा आगे होंगी तो गर्दन पर अधिक दबाव पड़ेगा, शरीर के करीब होंगी तो पीठ पर अधिक दबाव पड़ेगा. पूरे शरीर को हल्का छोड़ दें और आंखें बंद कर लें. इससे पेट ठीक होगा.
कपालभारती: कपालभारती प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.
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