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प्रदोष व्रत: भगवान शिव-माता पार्वती की कृपा पाने के लिए इस तरह करें पूजा, होगी लंबी उम्र!

प्रदोष व्रत: भगवान शिव-माता पार्वती की कृपा पाने के लिए इस तरह करें पूजा, होगी लंबी उम्र!
प्रदोष व्रत: भगवान शिव-माता पार्वती की कृपा पाने के लिए इस तरह करें पूजा, होगी लंबी उम्र!

ये व्रत रखने पर दो गायों को दान देने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और लंबी आयु का वरदान मिलता है.

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हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का काफी धार्मिक महत्व है. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत को रखता है. भगवान शिव उसके जीवन के कष्ट दूर करते हैं और उस पर भगवान का आशीर्वाद भी बना रहता है. आज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि यानी कि 16 मई को गुरुवार के दिन यह व्रत है. भक्त आज भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करेंगे. माना जाता है ये व्रत रखने पर दो गायों को दान देने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और लंबी आयु का वरदान मिलता है.

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) महीने में दो बार होता है. इस व्रत में लोहा, तिल, काली उड़द, शकरकंद, मूली, कंबल, जूता और कोयला आदि चीजों का दान करने से शनि से मुक्ति मिलती है. गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है. जिस वार को यह व्रत पड़ता है उसी अनुसार कथा पढ़ने से फल भी प्राप्‍त होते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार शिव जी की पूजा का सही समय शाम का है, जब मंदिरों में प्रदोषम मंत्र का जाप किया जाता है.

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प्रदोष व्रत की विधि
प्रदोष व्रत के दिन व्रत रखने वालों को सूरज उदय होने से पहले उठना चाहिए. सुबह नहाने के बाद साफ और सफेद रंग के कपड़े पहनें. नित्य कार्य कर के मन में भगवान शिव का नाम जपते रहना चाहिए. व्रत में किसी भी प्रकार का आहार ना खाएं. घर के मंदिर को साफ पानी या गंगा जल से शुद्ध करें. अब अशोक या आम के पत्तों का मंडप बनाएं और उसे फूलों से सजाएं. इस मंडप के नीचे 5 अलग-अलग रंगों का प्रयोग कर के रंगोली बनाएं. फिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और शिव जी की पूजा करें. पूजा में 'ऊँ नम: शिवाय' का जाप करें और जल चढ़ाएं.



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ऐसे करें व्रत का उद्यापन:
प्रदोष व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि पर ही करना चाहिए. उद्यापन से एक दिन पूर्व श्री गणेश का पूजन किया जाता है. इस दिन प्रात: जल्दी उठकर मंडप बनाकर, मंडप को वस्त्रों और रंगोली से सजाकर तैयार किया जाता है. 'ऊँ उमा सहित शिवाय नम:' मंत्र का एक माला यानी 108 बार जाप करते हुए हवन किया जाता है. हवन में आहूति के लिए खीर का प्रयोग किया जाता है.

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