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प्रदोष व्रत: आज इतने बजे से शुरू, ऐसे पूजा कर पाएं भोलेशंकर का आशीर्वाद!

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शास्त्रों में प्रदोष व्रत को अन्य व्रतों से श्रेष्ठ और महान फल देने वाला बताया गया है. आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की सटीक पूजा विधि.

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वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी कि 2 मई गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है. आज भक्त पूरे विधि विधान से व्रत रखेंगे और भगवान शिव की पूजा अर्चना करेंगे. इस व्रत को करने से व्रती भक्तों के सभी प्रकार के दुःख दर्द दूर होंगे. हिंदू धर्म शास्त्रों में इस व्रत को अन्य व्रतों से श्रेष्ठ और महान फल देने वाला बताया गया है. आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की सटीक पूजा विधि.

प्रदोष व्रत करने वाले व्रती को इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए. इसके बाद नहा-धोकर पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव का भजन कीर्तन और पूजा-पाठ करना चाहिए. इसके बाद पूजाघर में झाड़ू-पोछा कर पूजाघर समेत पूरे घर को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए. इसके बाद गाय के गोबर से पूजाघर की लिपाई करनी चाहिए.

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इस दिन उपवास रखने वाले भक्तों को पूरे दिन मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना चाहिए.
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प्रदोष काल में त्रयोदशी के दिन शाम 4 बजकर 30 मिनट से लेकर 7 बजे के बीच ही पूजा संपन्न कर लें.

इस मन्त्र का करें जाप:
प्रदोष व्रत में यज्ञ करते समय 108 बार गाय के घी से आहुति दें. हवन करते समय 'ॐ ह्लीं क्लीं नमः शिवाय स्वाहा' मंत्र का उच्चारण करते हुए आहुति दें.

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