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परफेक्ट होने का प्रेशर किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह - स्टडी

परफेक्ट होने का प्रेशर किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह - स्टडी

स्टडी के मुताबिक, स्कूल व परिवार का माहौल सभी तरह के बैकग्राउंड वाली लड़कियों में तनाव का कारण हो सकता है.  (प्रतीकात्मक फोटो- shutterstock.com)

स्टडी के मुताबिक, स्कूल व परिवार का माहौल सभी तरह के बैकग्राउंड वाली लड़कियों में तनाव का कारण हो सकता है. (प्रतीकात्मक फोटो- shutterstock.com)

Pressure to be perfect For Teenage Girls : ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर (University of Exeter) के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में दावा किया है कि स्कूल और परिवार की तरफ से समाज की अपेक्षा के अनुरूप आदर्श और अच्छी लड़की (Ideal and Good Girl) बनने का दबाव किशोरियों (teenage girls) के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के लिए खतरनाक होता है.

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    Pressure to be perfect For Teenage Girls : समाज में बेहतर करने का दबाव केवल किशोर और युवा लड़कों पर ही नहीं होता है. उससे कहीं अधिक दवाब किशोरियों (Teenage Girls) पर भी रहता है. हालांकि भारतीय समाज में तो ये बात वर्षों से ही कही जा रही है कि बड़ी होती लड़कियों को कैसे बैठना चाहिए, कैसे बोलना चाहिए, किस तरह के कपड़े पहनना चाहिए और पढ़ाना कितना चाहिए. सोचिए कितना दबाव और मेंटल प्रेशर हमारी किशोरियां झेलती हैं. हालांकि अब परिस्थिति थोड़ी बदली जरूर है, लेकिन दबाव अभी भी लड़कियों पर ही ज्यादा है. अब ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर (University of Exeter) के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में दावा किया है कि स्कूल और परिवार की तरफ से समाज की अपेक्षा के अनुरूप आदर्श और अच्छी लड़की (Ideal and Good Girl) बनने का दबाव किशोरियों (teenage girls) के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के लिए खतरनाक होता है.

    इस स्टडी के मुताबिक, स्कूल व परिवार का माहौल सभी तरह के बैकग्राउंड वाली लड़कियों में तनाव का कारण हो सकता है. अच्छे ग्रेड लाने, प्रसिद्ध होने, शिक्षणोत्तर गतिविधियों (post-teaching activities) में सहभागिता व सुंदर (participation and beautiful) होने आदि का दबाव किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है.

    क्या कहते हैं जानकार
    स्टडी के अनुसार, घर में पेरेंट्स की अपेक्षा और स्कूल में प्रतिस्पर्धा का दबाव, किशोरियों में भविष्य के प्रति भय पैदा करता है. इस स्टडी के निष्कर्षों को जर्नल एजुकेशनल रिव्यू (Educational Review) में प्रकाशित किया गया है.

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    यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर (University of Exeter) में एजुकेशन के लेक्चरर और इस स्टडी के राइटर डॉ. लॉरेन स्टेंटिफोर्ड (Dr Lauren Stentiford) की टीम ने साल 1990 से 2021 तक लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रकाशित शोधों का अध्ययन किया. इसमें उन्होंने पाया कि किशोरियों में किशोरों के मुकाबले मानसिक स्वास्थ्य का खतरा अधिक होता है.

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    डॉ. स्टेंटिफोर्ड कहती हैं, ‘हमें उम्मीद है कि हमारा काम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते खतरों के प्रति ध्यान आकर्षित करेगा. शिक्षा प्रणाली और माहौल के प्रति इस गंभीर विषय पर विमर्श बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा.’

    Tags: Health, Health News, Parenting

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