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Pulwama Terror Attack: कुमार विश्वास ने पढ़ी शहीदों के नाम कविता, जिसे सुनकर रो पड़े लाखों लोग!

News18Hindi
Updated: February 19, 2019, 3:11 PM IST
Pulwama Terror Attack: कुमार विश्वास ने पढ़ी शहीदों के नाम कविता, जिसे सुनकर रो पड़े लाखों लोग!
पुलवामा शहीदों के लिए कुमार विश्वास ने पढ़ी ये कविता.

Pulwama Attack: कुमार विश्वास की ये कविता पढ़कर आंसू रोक नहीं पाएंगे आप!

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  • Last Updated: February 19, 2019, 3:11 PM IST
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Pulwama Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है. सोशल मीडिया पर हर कोई अपने-अपने तरीके से आक्रोश व्यक्त कर रहा है. ऐसे में आम आदमी पार्टी से अलग हुए नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी अपने ट्वीटर हैंडल पर इस आतंकी हमले को बेहद दु:खद और निंदनीय बताते हुए हमले में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी. कुमार विश्वास ने लिखा, 'हमला अबकी बार बदला भयानक हो और निर्णायक हो. सीमा के दोनों तरफ जो भी इन कुत्तों को बचाए उसको खत्म कर दो. पुलवामा आतंकवादी हमले में शहीद देश के वीरों को शत-शत नमन.... जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुआ आतंकी हमला अत्यंत दु:खद व निंदनीय है. हमले में शहीद हुए वीर जवानों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि. शहीदों के परिवार को ईश्वर संबल प्रदान करें. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. इस हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा.'

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पुलवामा हमले की वजह से सोशल मीडिया पर कुमार विश्वास की लिखी हुई एक कविता भी काफी ट्रेंड कर रही है. लोग इस कविता में पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए लोगों का दर्द खोज रहे हैं. ये है कुमार विश्वास की वो कविता.



है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर



इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं
पिता जिनके रक्त ने उज्जवल किया कुलवंश माथा
मां वही जो दूध से इस देश की रज तौल आई
बहन जिसने सावनों में हर लिया पतझर स्वयं ही
हाथ ना उलझें कलाई से जो राखी खोल लाई
बेटियां जो लोरियों में भी प्रभाती सुन रहीं थीं
पिता तुम पर गर्व है चुपचाप जाकर बोल आये
है नमन उस देहरी को जहां तुम खेले कन्हैया
घर तुम्हारे परम तप की राजधानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय ....
हमने लौटाये सिकन्दर सर झुकाए मात खाए
हमसे भिड़ते हैं वो जिनका मन धरा से भर गया है
नर्क में तुम पूछना अपने बुजुर्गों से कभी भी
उनके माथे पर हमारी ठोकरों का ही बयां है
सिंह के दाँतों से गिनती सीखने वालों के आगे
शीश देने की कला में क्या अजब है क्या नया है
जूझना यमराज से आदत पुरानी है हमारी
उत्तरों की खोज में फिर एक नचिकेता गया है
है नमन उनको कि जिनकी अग्नि से हारा प्रभंजन
काल कौतुक जिनके आगे पानी पानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं
लिख चुकी है विधि तुम्हारी वीरता के पुण्य लेखे
विजय के उदघोष, गीता के कथन तुमको नमन है
राखियों की प्रतीक्षा, सिन्दूरदानों की व्यथाओं
देशहित प्रतिबद्ध यौवन के सपन तुमको नमन है
बहन के विश्वास भाई के सखा कुल के सहारे
पिता के व्रत के फलित माँ के नयन तुमको नमन है
है नमन उनको कि जिनको काल पाकर हुआ पावन
शिखर जिनके चरण छूकर और मानी हो गये हैं
कंचनी तन, चन्दनी मन, आह, आँसू, प्यार, सपने
राष्ट्र के हित कर चले सब कुछ हवन तुमको नमन है

है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये.

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First published: February 16, 2019, 2:54 PM IST
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