'प्यार मोहब्बत शर्बत' दिलाएगा दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी से राहत

दिल्ली का प्यार मोहब्बत शर्बत काफी मशहूर है(credit: instagram/tasho.eats)

दिल्ली का प्यार मोहब्बत शर्बत काफी मशहूर है(credit: instagram/tasho.eats)

'प्यार मोहब्बत शर्बत' अब एक पुरानी दिल्ली का लैंडमार्क बन चुका है. जामा मस्जिद के एक छोर पर स्थित यह ठेला केवल गर्मियों में ही नजर आता है. इसे बनाने और पीने दोनों का एहसास लोग लेते हैं.

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  • Last Updated: April 10, 2021, 11:57 AM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

अगर आसमान से बरसती गर्मी की काट 'प्यार मोहब्बत' से हो तो बात कुछ खास ही हो जाएगी. अरे ! मैं किसी रोमांटिक मूवी की बात नहीं करने जा रहा हूं. बल्कि एक ऐसे खास ड्रिंक की जानकारी देने जा रहा हूं जिसका नाम ही है 'प्यार मोहब्बत शर्बत'. पुरानी दिल्ली की गलियों में चिलचिलाती धूप में बस एक ही ठिकाना है इसका. वह भी सिर्फ 10 रुपए में.

लैंडमार्क हो चुका है:

'प्यार मोहब्बत शर्बत' अब एक पुरानी दिल्ली का लैंडमार्क बन चुका है. जामा मस्जिद के एक छोर पर स्थित यह ठेला केवल गर्मियों में ही नजर आता है. इसे बनाने और पीने दोनों का एहसास लोग लेते हैं. गर्मी को तो यह पलक झपकते ही बुझा देता है. इसे देखने और हाथ में लेने के बाद से ही प्यास जैसे बुझने लगती है. साथ ही इसका असर भी काफी देर तक रहता है.
इन जनाब ने शुरू किया था सिलसिला:

इस ठेले को नवाब कुरैशी चलाते हैं. उन्होंने इसका रेट भी इतना कम रखा है कि आम आदमी से लेकर खास आदमी तक किसी को जेब पर यह भारी नहीं लगता. इसे प्यार मोहब्बत मजा और इश्क मोहब्बत शर्बत के नाम से भी जाना जाता है. खास बात यह है कि गर्मी शुरू होने के बाद ही यह ठेला लगता है और मौसम बदलते ही ठेला अगली गर्मी की तैयारी करने चला जाता है.

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इंग्रीडिएंट्स भी है बहुत खास:

गुलाबी रंग के इस शर्बत में जो चीजें पड़ती हैं वह सब के सब अपने आप में प्राकृतिक कूलर्स हैं. इसका मुख्य इंग्रीडिएंट है तरबूज...जी हां, इसके साथ ही इसमें पड़ता है दूथ, रूह अफजा और चीनी. बर्फ से साथ एक खास मात्रा में इसे मिलाकर तैयार किया जाता है. बड़े बर्तन में हो या फिर छोटे गिलास में, इसे देखते ही तरवाट महसूस होने लगती है.

खास तौर पर जाते हैं लोग:

राकेश, अभी नोएडा शिफ्ट हो गए हैं लेकिन अपने करियर के शुरूआती दिनों में दरियागंज में ही रहते थे. वहीं पर टहलते-टहलते इन्हें इस शर्बत के बारे में पता चला था. राकेश कहते हैं कि पहले तो नाम ने ही इतना आकर्षित कर दिया कि एक बार वो इस शर्बत को देखना चाहते थे. लेकिन, जब चख लिया तब तो आदत सी पड़ गई. गर्मी के दिनों में अगर एक-दो गिलास प्यार-मोहब्बत नहीं पीते थे तो लगता था कि पारा ज्यादा ही चढ़ गया है.

अभी कोविड के समय में शायद भीड़ में निकलना मुनासिब नहीं लेकिन यह दौर भी गुजर जाएगा. तब याद रखिएगा मेरी इस जानकारी को और जरूर ट्राई करिएगा प्यार-मोहब्बत शर्बत...
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