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    ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ, पढ़ें कतील शिफाई की शायरी

    कतील शिफाई की शायरी (फोटो साभार: pexels/Alina Vilchenko)
    कतील शिफाई की शायरी (फोटो साभार: pexels/Alina Vilchenko)

    कतील शिफाई की शायरी (Qateel Shifai Love Shayari): तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले, लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-ना-काम से पहले...

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 6, 2020, 10:43 AM IST
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    कतील शिफाई की शायरी (Qateel Shifai Love Shayari ): कतील शिफाई उर्दू के मशहूर शायर हैं. कतील शिफाई साहब का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. पाकिस्तान के मशहूर शायर क़तील साहब का जन्म भारत में हुआ था. लेकिन बंटवारे में उनका पारिवार रावलपिंडी, पाकिस्तान चला गया. उनका वास्तविक नाम मुहम्मद औरंगज़ेब था. उन्होंने कई गई खूबसूरत गीत लिखे हैं जिन्हें पाकिस्तान और भारत की कई फिल्मों में शामिल किया गया है. कतील शिफाई ने 20 से ज्यादा किताबें लिखीं. ग़ज़ल- 'अपने होठों पर सजाना चाहता हूं', 'परेशां रात सारी है', ‘अपने हाथों की 'किया है प्यार जिसे', 'तुम पूछो और मैं ना बताऊं' जैसी तमाम ग़ज़लें काफी मशहूर हुई हैं. आज हम कविता कोश के सभार से कतील शिफाई की कुछ मशहूर गज़लें और शायरियां ले कर आए हैं...

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    कतील शिफाई की शायरी



    खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें
    न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें

    सुकूत छाया है इंसानियत की क़द्रों पर
    यही है मौक़ा-ए-इज़हार आओ सच बोलें

    हमें गवाह बनाया है वक़्त ने अपना
    ब-नाम-ए-अज़मत-ए-किरदार आओ सच बोलें

    सुना है वक़्त का हाकिम बड़ा ही मुंसिफ़ है
    पुकार कर सर-ए-दरबार आओ सच बोलें

    तमाम शहर में क्या एक भी नहीं मंसूर
    कहेंगे क्या रसन-ओ-दार आओ सच बोलें

    बजा के ख़ू-ए-वफ़ा एक भी हसीं में नहीं
    कहाँ के हम भी वफ़ा-दार आओ सच बोलें

    जो वस्फ़ हम में नहीं क्यूँ करें किसी में तलाश
    अगर ज़मीर है बेदार आओ सच बोलें

    छुपाए से कहीं छुपते हैं दाग़ चेहरे के
    नज़र है आईना बरदार[9] आओ सच बोलें

    'क़तील' जिन पे सदा पत्थरों को प्यार आया
    किधर गए वो गुनह-गार आओ सच बोलें

    2. तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले
    लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-ना-काम से पहले

    ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वरना
    कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले

    गिरा है टूट कर शायद मेरी तक़दीर का तारा
    कोई आवाज़ आई थी शिकस्त-ए-जाम से पहले

    कोई कैसे करे दिल में छुपे तूफ़ाँ का अंदाज़ा
    सुकूत-ए-मर्ग छाया है किसी कोहराम से पहले

    न जाने क्यूँ हमें इस दम तुम्हारी याद आती है
    जब आँखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले

    सुनेगा जब ज़माना मेरी बर्बादी के अफ़साने
    तुम्हारा नाम भी आएगा मेरे नाम से पहले.

    3. पत्थर उसे न जान पिघलता भी देख उसे
    ख़ुद अपने तर्ज़ुबात में जलता देख उसे

    वो सिर्फ़ जिस्म ही नहीं एहसास भी तो है
    रातों में चाँद बन के निकलता भी देख उसे

    वो धडकनों के शोर से भी मुतमइन न था
    अब चंद आहटों से भी बहलता देख उसे

    आ ही पड़ा है वक़्त तो फैला ले हाथ भी
    और साथ-साथ आँख बदलता भी देख उसे

    सूरज है वो तो उसकी परस्तिश ज़रूर कर
    साया है वो तो शाम को ढलता भी देख उसे

    निकला तो है क़तील वफ़ा की तलाश में
    ज़ख्मों के पुल-सिरात पे चलता भी देख उसे.

    4.परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ
    सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ

    हँसो और हँसते-हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में
    हमें ये रात भारी है सितारों तुम तो सो जाओ

    तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया
    ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ

    कहे जाते हो रो-रो के हमारा हाल दुनिया से
    ये कैसी राज़दारी है सितारों तुम तो सो जाओ

    हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा
    यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ

    हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे
    अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ.
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