बीमार लालचंद की रहमान ने ऐसे बचाई जान, बाढ़ के बीच वीडियो कॉल के जरिये किया इलाज

बीमार लालचंद की रहमान ने ऐसे बचाई जान, बाढ़ के बीच वीडियो कॉल के जरिये किया इलाज
असम में इन दिनों भीषण बाढ़ आई हुई है.

असम की बाढ़ में फंसे लालचंद बिस्‍वास (Lalchand Bishwas) की जान बचाने के लिए उनके फार्मासिस्‍ट दोस्‍त मोफिसुर रहमान (Mofisur Rehman) सामने आए. उन्‍होंने वीडियो कॉल (Video Call) के जरिये दिल्‍ली के डॉक्‍टर से संपर्क किया और अपने दोस्‍त की जान बचाने में कामयाब रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 3, 2020, 11:03 AM IST
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असम (Assam) की बाढ़ में फंसे बीमार दोस्‍त लालचंद बिस्‍वास (Lalchand Bishwas) की जान बचाने के लिए उनके फार्मासिस्‍ट दोस्‍त मोफिसुर रहमान (Mofisur Rehman) सामने आए. उन्‍होंने वीडियो कॉल (Video Call) के जरिये दिल्‍ली के डॉक्‍टर से संपर्क किया और अपने दोस्‍त की जान बचाने में कामयाब रहे. दरअसल, लालचंद जिगर की बीमारी से पीड़ित थे और बाढ़ के बीच असम के मोरीगांव जिले में अपने घर में फंसे हुए थे. इंडियन एक्‍सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी में ही लिवर सिरोसिस (Liver cirrhosis) का पता चला था और इस हालत में उन्हें नियमित तौर पर इलाज की जरूरत थी.

दरअसल, कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनजर जबसे देश भर में लॉकडाउन लगाया गया था वह अपनी बीमारी के लिए डॉक्टरों द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन कर रहे थे. हालांकि इस बीच जून महीने में उनकी हालत ज्‍यादा खराब होने लगी और उन्होंने उन्होंने सांस की तकलीफ के साथ ही पेट में दर्द की शिकायत भी की. बिस्वास अपने परिवार के साथ जेंगपोरी गांव (Jengpori village) में रहते हैं. छोटे से इस गांव में इंटरनेट की सुविधा नहीं है. इस महीने की शुरुआत में उनके दोस्त मोफिसुर रहमान (Mofisur Rehman) जो एक फार्मासिस्ट हैं, उनसे मिलने गए. इसके बाद उन्‍हें पता चला कि उनके दोस्‍त की हालत बेहद गंभीर है. फिर रहमान को आशा की किरण के रूप में डॉक्‍टर का एक पर्चा नजर आया.

इसमें डॉक्टर का संपर्क नंबर था. क्‍योंकि लालचंद की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी और बाढ़ के कारण इलाके में चिकित्सा सुविधाएं चालू नहीं थीं. ऐसे में उनके दोस्‍त रहमान ने उस पर्चे में देख कर एक डॉक्टर का नंबर डायल किया. इसके बाद डॉक्‍टर की ओर से जवाब आया. रहमान कहते हैं कि डॉक्टर ने मुझे मरीज की मेडिकल स्थिति को समझने के लिए वीडियो कॉल की व्यवस्था करने के लिए कहा.'



मगर गांव में जब इंटरनेट सुविधा ही नहीं थी, तो यह कैसे संभव हो पाता. ऐसे में रहमान और बिस्वास के परिवार ने उसे नाव के जरिये उस ओर ले जाने का फैसला किया जहां उन्‍हें इंटरनेट कनेक्टिविटी मिली. इसके बाद डॉक्‍टर से संपर्क किया गया. सर गंगा राम अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांटेशन एंड सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में काम करने वाले डॉ. उषास्त धीर फोन पर थे. वह कहते हैं कि “मैं पिछले एक साल से गुवाहाटी का दौरा कर रहा हूं और हर महीने लिवर ओपीडी का संचालन कर रहा हूं. आखिरी ओपीडी 29 फरवरी को थी., जहां मैं इस मरीज से मिला. वह बेहतर हो रहा था, लेकिन महामारी के कारण उसकी जांच नहीं की जा सकी थी.
इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये उसी छोटी नाव पर रहते हुए रहमान ने डॉक्‍टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया और अपने दोस्त की जांच की. लेकिन डॉ. धीर के लिए भाषा न समझ पाना और इंजेक्शन, एनीमा को नियंत्रित करने जैसी चुनौतियां सामने थीं. हालांकि यह वीडियो कॉल करीब 6 घंटे तक जारी रही. इस बीच डॉ. धीर ने कहा कि रहमान ने अच्‍छी तरह यह काम अंजाम दिया. दरअसल, हम मरीज को कोमा में जाने से बचाना चाहते थे. वह भीग रहा था और असहज महसूस कर रहा था.'

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एसजीआरएच (SGRH) के चेयरपर्सन डी. एस. राणा कहते हैं कि जब स्थिति कुछ सामान्य होगी तो बिस्वास को इलाज के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा. हालांकि इस बीच हम नियमित तौर पर टेली काउं‍सलिंग के माध्यम से संपर्क में रहे हैं. अस्पताल ने एक महीने के लिए दवाओं की व्यवस्था भी की है और फिलहाल वह अपने गांव में हैं.
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