Ramadan 2021: डायबिटीज के मरीज रख रहे हैं रोजा तो पहले कर लें ये काम, बरतें ये सावधानियां

Ramadan 2021: डायबिटीज से पीड़ित हैं तो अपनी सेहत का रखें ऐसे ख्‍याल.

Ramadan 2021: डायबिटीज से पीड़ित हैं तो अपनी सेहत का रखें ऐसे ख्‍याल.

Ramadan 2021: रहमतों-बरकतों के इस महीने में हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है कि वह रोज़ा रखे, इबादत (Worship) करे. मगर डायबिटीज (Diabetes) रोगियों को डॉक्टर से सलाह करने के बाद ही रोजा रखना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 1:29 PM IST
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Ramadan 2021: रमजान का महीना मुस्लिम समाज में बहुत अहम माना जाता है. रोज़ा (Roza) हर मुसलमान पर फर्ज़ है. रोजा के लिए सुबह सहरी की जाती है और शाम को इफ्तार में खोला जाता है. रहमतों-बरकतों के इस महीने में हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है कि वह रोज़ा रखे और अल्लाह की इबादत (Worship) करे. वहीं कुछ लोगों के मन में रोज़ा रखने को लेकर कुछ सवाल होते हैं. अक्‍सर यह सवाल उठता है कि क्या डायबिटीज (Diabetes) से पीड़ित होने पर रोजा रखा जा सकता है? अगर रोजा रख सकते हैं, तो रोजे के दौरान क्या करना चाहिए? दवा किस तरह से लेनी चाहिए. डायबिटीज चेक करने से कहीं रोजा तो नहीं टूटता है? सेहरी और इफ्तार के दौरान डायबिटीज के मरीज का खान-पान कैसा हो. इसे लेकर तमाम तरह के सवाल होते हैं.

इसी को ध्यान में रखते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के जेएन मेडिकल कॉलेज में एक सेमीनार में जेएन मेडिकल कॉलेज के राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) सेंटर फॉर डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलोजी और मेडिसिन विभाग के वक्ताओं समेत कई अन्य वक्ताओं ने रोजा रखने के बारे में बताया और डायबिटीज के मरीज क्‍या सावधानियां बरतें इससे संबंधित जानकारियां भी साझा कीं.

डायबिटीज के मरीज बरतें ये सावधानियां

कुछ शोध बताते हैं कि आंतरिक उपवास सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है, मगर डायबिटीज रोगियों के लिए रोजा खतरनाक हो सकता है, इसलिए उन्हें डॉक्टर से सलाह करने के बाद ही रोजा रखना चाहिए.











रोजे का डायबिटीज वाले लोगों पर अलग-अलग प्रभाव हो सकता है. जिन लोगों को उच्च मधुमेह है और जिनमें अक्सर रक्त शर्करा कम होता है, या जो गर्भवती हैं और जिन्हें गुर्दे की गंभीर बीमारी है. उन्हें रोजा रखने से बचना चाहिए.


 


डायबिटीज से पीड़ित लोगों को रमजान के कम से कम एक महीने पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इसकी वजह यह है कि उन्हें रमजान के दौरान अपनी दवा बदलनी या कम करनी पड़ सकती है.








 डायबिटीज के मरीजों को इफ्तार और सहरी के दौरान संयम से भोजन करना चाहिए. उन्हें शर्करा वाले पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ और उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए. इसके अलावा रोजा के दौरान रक्त शर्करा की जांच की जानी चाहिए, इससे रोजा नहीं टूटता है.


 





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