रावण था पहला कांवड़िया, ये हैं कांवड़ यात्रा के नियम

आप भी कांवड़ लेकर जाने का सोच रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों का ध्यान ज़रूर रखें

News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 12:00 PM IST
रावण था पहला कांवड़िया, ये हैं कांवड़ यात्रा के नियम
आप भी कांवड़ लेकर जाने का सोच रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों का ध्यान ज़रूर रखें
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Updated: July 17, 2019, 12:00 PM IST
सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है. आज से शिवालयों में रोजाना भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलेगी. साथ ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी. सदियों से चली आ रही इस परंपरा की शुरुआत रावण ने की थी.

माना जाता है कि इस यात्रा की शुरुआत समुद्र मंथन से हुई थी. मंथन से निकले विष को पीने की वजह से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था. विष का बुरा असर शिव पर ऐसा हुआ कि उनके भक्त रावण ने उस प्रभाव को कम करने के लिए तप किया. रावण ने दशानन कांवड़ में जल भरकर लाया और शिव का जलाभिषेक किया. यहीं से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई.
ऐसे में अगर आप भी कांवड़ लेकर जाने का सोच रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों का ध्यान ज़रूर रखें-


  • कांवड़ यात्रियों के लिए नशा वर्जित बताया गया है. इस दौरान तामसी भोजन यानी मांस, मदिरा आदि का सेवन भी नहीं किया जाता.

  • बिना स्नान किए कावड़ यात्री कांवड़ को नहीं छूते. तेल, साबुन, कंघी करने व अन्य श्रृंगार सामग्री का उपयोग भी कावड़ यात्रा के दौरान नहीं किया जाता.

  • कांवड़ यात्रियों के लिए चारपाई पर बैठना मना है. चमड़े से बनी वस्तु का स्पर्श एवं रास्ते में किसी वृक्ष या पौधे के नीचे कावड़ रखने की भी मनाही है.

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  • कांवड़ यात्रा में बोल बम एवं जय शिव-शंकर घोष का उच्चारण करना तथा कावड़ को सिर के ऊपर से लेने तथा जहां कावड़ रखी हो उसके आगे बगैर कावड़ के नहीं जाने के नियम पालनीय होती हैं.

First published: July 17, 2019, 12:00 PM IST
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