प्रोजेक्ट पूरा करने में लगे दिल्ली-एनसीआर के बिल्डर

रियल एस्टेट कानून के मुताबिक जो पुराने प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए हैं, उन्हें फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जानकारों का मानना है कि इससे बिल्डर्स की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

रियल एस्टेट कानून के मुताबिक जो पुराने प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए हैं, उन्हें फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जानकारों का मानना है कि इससे बिल्डर्स की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

रियल एस्टेट कानून के मुताबिक जो पुराने प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए हैं, उन्हें फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जानकारों का मानना है कि इससे बिल्डर्स की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

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नई दिल्ली। रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल से बचने के लिए दिल्ली-एनसीआर के बिल्डरों ने कमर कस ली है। वो पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स का काम जल्द से जल्द निपटाना चाहते हैं जिसके लिए वो कई नए उपायों का सहारा ले रहे हैं। इनमें पूरा प्रोजेक्ट किसी दूसरे बिल्डर को देना और फंड की व्यवस्था के लिए ज्वाइंट वेंचर पार्टनर ढूंढ़ना शामिल है।



आईटी प्रोफेशनल आलोक अमन ने नोएडा के एक्जोटिका ड्रीम्स प्रोजेक्ट में करीब 20 लाख रुपये में घर बुक किया था। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक पजेशन दिसंबर 2015 में मिलना था जो अभी तक नहीं मिला है। आलोक अब तक करीब 16 लाख रुपये दे चुके हैं, लेकिन कुछ दिनों पहले एक्जोटिका की ओर से उनसे 7 लाख रुपये की मांग की गई है। साथ में कहा गया है कि अगले 3 महीने में उन्हें पजेशन मिल जाएगा।



रियल एस्टेट कानून के मुताबिक जो पुराने प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए हैं, उन्हें फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जानकारों का मानना है कि इससे बिल्डर्स की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसी दिक्कत से बचने के लिए बिल्डर कई नए उपायों का सहारा लेने लगे हैं। कई बिल्डर अपने अधूरे पड़े कई प्रोजेक्ट दूसरे बिल्डरों को बेच रहे हैं, जो उन्हें पूरा कर सकें। वहीं कुछ इस कोशिश में हैं कि किसी ज्वाइंट वेंचर पार्टनर को प्रोजेक्ट में शामिल कर फंड की व्यवस्था की जाए। कई बिल्डर तो अपने प्रोजेक्ट के कुछ टॉवरों को कॉन्ट्रैक्टर से पूरा करने को कह रहे हैं और इसके लिए उन्हें मुनाफे में हिस्सा देने को भी तैयार हैं।





 
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