बिना दूर्वा के नहीं पूरी होती गणपति की पूजा, जानें वजह

कहा जाता है कि बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा पूरी नहीं होती है. आइए जानते हैं क्यों गणपति को दूर्वा चढ़ाना इतना महत्वपूर्ण है.

News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 11:12 AM IST
बिना दूर्वा के नहीं पूरी होती गणपति की पूजा, जानें वजह
भगवान गणेश की तस्वीर
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Updated: September 11, 2018, 11:12 AM IST
इस बार गणेश चतुर्थी 13 सितंबर को मनाई जाएगी. गणेशोत्सव के दौरान गणपति की घर में स्थापना की जाती है और भली-भांति पूजा की जाती है. इस दौरान भगवान गणेश को कई चीज़ें अर्पित भी की जाती हैं जिसमें से एक दूर्वा भी है. कहा जाता है कि बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा पूरी नहीं होती है. आइए जानते हैं क्यों गणपति को दूर्वा चढ़ाना इतना महत्वपूर्ण है.

भगवान गणेश जी को दूर्वा चढ़ाते समय बोलें ये मंत्र
ॐ गणाधिपाय नमः ,ॐ उमापुत्राय नमः ,ॐ विघ्ननाशनाय नमः ,ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः ,ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ,ॐ एकदन्ताय नमः ,ॐ इभवक्त्राय नमः

ॐ मूषकवाहनाय नमः ,ॐ कुमारगुरवे नमः
आखिर गणेशजी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं
कहते हैं कि प्रचीन काल में अनलासुर नामक एक असुर था. जिसकी वजह से स्वर्ग और धरती के सभी लोग परेशान थे. वह इतना खतरनाक था कि ऋषि-मुनियों सहित आम लोगों को भी जिंदा निगल जाता था. इस असुर से हताश होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि के साथ महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे. सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इस असुर का वध करें. शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर उन्हें बताया कि अनलासुर का अंत केवल गणपति ही कर सकते हैं.

पेट में होने लगी थी जलन
कथा के अनुसार जब गणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी. नाना प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन गणेशजी के पेट की जलन शांत ही नहीं हो रही थी. तब कश्यप ऋषि को एक युक्ति सूझी. उन्होंने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर श्रीगणेश को खाने के लिए दी. जब गणेशजी ने दूर्वा खाई तो उनके पेट की जलन शांत हो गई. तभी से भगवान श्रीगणेश जी को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा हुई.

भाद्रमास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे भारत में गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. इस बार गणेश चतुर्थी के त्योहार की शुरुआत 13 सितम्बर से होगी. इस दिन लोग अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना करेंगे. आने वाली 13 तारीख को गणपति स्थापना का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 08 मिनट से शुरू होगा जो कि दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इस बीच आप गणपति की स्थापना अपने घर पर कर सकते हैं.

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