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‘देवताओं का फल’ कही जाने वाली नाशपाती है विशेष गुणों से भरपूर, पढ़ें इसका हजारों साल पुराना रोचक इतिहास

यूनान में 1000 ईसा पूर्व पैदा हुए प्रख्यात कवि होमर ने अपने महाकाव्य Odyssey में नाशपाती को ‘देवताओं का फल’ कहा है.

यूनान में 1000 ईसा पूर्व पैदा हुए प्रख्यात कवि होमर ने अपने महाकाव्य Odyssey में नाशपाती को ‘देवताओं का फल’ कहा है.

नाशपाती स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक फल भी है. यह शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत करती है. पश्चिमी देशों में नाशपाती को ‘बटर फ्रूट’ भी कहा जाता है. पूरे विश्व में नाशपाती की लगभग 3000 किस्में पाई जाती हैं. कहते हैं कि भारत में नाशपाती यूरोप और ईरान के रास्ते आई. जानते हैं नाशपाती से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां.

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हाइलाइट्स

पूरे विश्व में नाशपाती की लगभग 3000 किस्में पाई जाती हैं.
पश्चिमी देशों में नाशपाती को ‘बटर फ्रूट’ भी कहा जाता है. 
नाशपाती प्रतिरक्षा तंत्र बेहतर बनाती है, पाचनतंत्र को दुरुस्त रखती है.

खट्टी-मीठी, रसीली नाशपाती में विटामिन्स और मिनरल्स खूब होते हैं. इसके यही गुण मानव शरीर के रक्षा तंत्र को मजबूत करते हैं. इसमें पाए जाने वाले रेशे पाचन तंत्र को भी मजबूत करते हैं, जो मनुष्य को स्वस्थ रखते हैं. हजारों सालों से खाया जाने वाला यह फल शरीर में रक्त की कम को भी पूरा करता है. देवताओं का फल भी कहा गया है नाशपाती को.

पश्चिमी देशों में नाशपाती को ‘बटर फ्रूट’ भी कहा जाता है. उसका कारण यह है कि पकने पर खाते वक्त यह इतनी मुलायम लगती है, जैसे मक्खन हो. पूरे विश्व में नाशपाती की लगभग 3000 किस्में पाई जाती हैं. भारत में नाशपाती, नाग और बब्बूगोशे तीनों एक ही (Pear) हैं. भारत (एशिया) में मिलने वाली नाशपाती खस्ता और कम नर्म होती है और इसका कुछ दिनों तक भंडारण भी किया जा सकता है, जबकि यूरोपीय नाशपाती नर्म व खासी रसीली होती है. यह पेड़ पर ही पकती है और इसे अधिक समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता. भारत में इसी को बब्बूगोशा कहा जाता है.

इस फल के कई उत्पत्ति केंद्र हैं 

रिसर्च की मानें तो नाशपाती का उत्पत्ति केंद्र दुनिया के अलग-अलग भूभाग रहे हैं. मोटे तौर इस फल के चार उत्पत्ति केंद्र माने जाते हैं, जिनमें पहला उर्वर अर्धचंद्राकार क्षेत्र (Fertile crescent) है, जिनमें इजरायइल से लेकर ईरान-इराक और तुर्कमेनिस्तान शामिल है. दूसरा केंद्र मिडिल ईस्ट कहलाता है, जिसमें अंदरूनी एशिया का क्षेत्र शामिल है. तीसरा सेंटर सेंट्रल एशियाटिक माना जाता है, जिसमें भारत, अफगानिस्तान उज्बेकिस्तान आदि शामिल हैं. चौथा सेंटर चीन व दक्षिण पूर्व एशिया माना जाता है, जिसमें चीन, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कोरिया, वियतनाम शामिल है. ये ऐसे भूभाग हैं, जहां हजारों वर्ष पूर्व सब्जियों व फलों को उगाया जा रहा था और जानवरों को भी पालतू बनाया जा रहा था.

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रिसर्च की मानें तो नाशपाती का उत्पत्ति केंद्र दुनिया के अलग-अलग भूभाग रहे हैं.

होमर ने कहा था- ‘देवताओं का फल’ है नाशपाती

एक रिपोर्ट यह भी कहती है कि नाशपाती का उत्पत्ति केंद्र पश्चिमी यूरोप व उत्तरी अफ्रीका भी है. इन उत्पत्ति केंद्रों से यह बात जाहिर हो जाती है कि दुनिया में नाशपाती हजारों साल पूर्व एक साथ या अलग-अलग उपजी और उसने अपना स्वाद पूरी दुनिया में बिखेरा. अगर इसका उपज काल देखें, तो चीन में 2000 ईसा पूर्व इसकी खेती की जा रही थी. दूसरी ओर यूनान में 1000 ईसा पूर्व पैदा हुए प्रख्यात कवि होमर ने अपने महाकाव्य Odyssey में नाशपाती को ‘देवताओं का फल’ कहा है. कहते हैं कि भारत में नाशपाती यूरोप और ईरान के रास्ते आई. वैसे, जाने-माने लेखक युक्तेश्वर कुमार ने अपनी पुस्तक ‘A History Of Sino-Indian Relations’ में लिखा है कि आड़ू और नाशपाती पूर्वी हान काल (25 से 220 ईस्वी) के दौरान भारत में आए थे.

लेखक युक्तेश्वर कुमार ने अपनी पुस्तक ‘A History Of Sino-Indian Relations’ में लिखा है कि आड़ू और नाशपाती पूर्वी हान काल (25 से 220 ईस्वी) के दौरान भारत में आए थे.

जब तंबाकू नहीं थी, तब इसकी पत्तियां आती थीं काम 

आपको बता दें कि इस फल के नाम के साथ ‘नाश’ जुड़ा है, इसलिए भारत में कुछ शुभ अवसरों पर इसका उपयोग नहीं होता. दूसरी ओर चीन में नाशपाती के पेड़ का सूख जाना या उसको काटना अचानक मृत्यु का प्रतीक माना जाता है. आपको हैरानी होगी कि प्राचीन काल में जब तंबाकू का उत्पादन नहीं हुआ था, तब नाशपाती के पत्तों का धुआं पीने की परंपरा थी. नाशपाती की लकड़ी का प्रयोग संगीत के वाद्य और फर्नीचर बनाने में किया जाता है. रसोई में इसका खूब उपयोग होता था, क्योंकि इसमें से कोई गंध और रंग नहीं निकलता और पानी में इसकी लकड़ी खराब नहीं होती. पुराने समय में आर्किटेक्ट के स्केल भी नाशपाती की लकड़ी के बनाए जाते हैं, क्योंकि लंबे और पतले आकार में काटे जाने के बाद भी यह फटती नहीं है. आजकल नाशपाती का इस्तेमाल केक, सलाद, जैम, जेली, मुरब्बा आदि बनाने के लिए भी होता है.

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इसमें पाए जाने वाले तत्व शरीर को स्वस्थ रखते हैं

गुणों के मामले में यह रसीला फल लाजवाब है. इसमें बहुत से विटामिन्स व खनिज होते हैं, जिनमें कॉपर, आयरन, पोटैशियम, मैंगनीज और मैग्नीशियम के साथ-साथ बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन जैसे फोलेट, राइबोफ्लेविन और पाइरिडोक्सिन (विटामिन बी6) आदि शामिल हैं. यह रेशे से भी भरपूर है, जिसके चलते नाशपाती प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर बनाती है, पाचनतंत्र को दुरुस्त रखती है और शर्करा अधिक होने के कारण शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है. नाशपाती कैल्शियम भी भरपूर होती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी से जुड़ी समस्या) से बचाव होता है. इसमें ठीक-ठाक पाया जाने वाला विटामिन सी शरीर का रक्षा तंत्र सुधारता है. इसमें आयरन भी खूब होता है, जिस कारण हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है, जिससे एनीमिया होने की संभावना कम हो जाती है. फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह के अनुसार, नाशपाती प्यास बुझाती है, लिवर को स्वस्थ रखती है. इसमें औषधिय गुण भी मौजूद होते हैं. लूज मोशन और उल्टी होने पर इसके सेवन से राहत मिलती है.

नाशपाती रेशे से भरपूर होती है, जो प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर बनाती है.

ज्यादा खाने से पेट हो जाता है गड़बड़

यह स्वादिष्ट भी है और पौष्टिक तो है ही. नाशपाती में कुछ विशेष प्रकार के योगिक पाए जाते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. यह उच्च रक्तचाप (हृदय रोग का कारण) और दिल के दौरे के खतरे को कम करने में मदद करती है, इसलिए जब नाशपाती का सीजन हो, तो इसे डाइट में ज़रूर शामिल करना चाहिए. हालांकि, इसे ज्यादा खाने से पेट गड़बड़ हो सकता है. शुगर वालों को इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए. अगर गले में समस्या चल रही है और बुखार जैसा महसूस कर रहे हैं, तो इसके सेवन से बचना चाहिए.

Tags: Food, Lifestyle

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