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वैरायटी से भरी स्वादिष्ट मट्ठियां खानी हैं? कोल्हापुर रो़ड पर ‘यादव मट्ठी वाला’ का ज़रूर लें स्वाद

दुकान पर 6 तरह की मट्ठी मिलती है और सभी का स्वाद एकदम जुदा है.

दुकान पर 6 तरह की मट्ठी मिलती है और सभी का स्वाद एकदम जुदा है.

Delhi Food Joints: इस दुकान पर 6 तरह की मट्ठी मिलती है. इसके अलावा 15 प्रकार के नमकीन की वैराइटी भी दुकान पर उपलब्ध हैं.

  • News18Hindi
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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)

    Delhi Food Joints: हम आपसे बात तो खाने-पीने की ही करेंगे, लेकिन उससे पहले आपको जाने-माने लेखक व साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ के बारे में कुछ बताते हैं. इस कहानी का मुख्य पात्र हामिद (छोटा लड़का) ईद की खरीदारी में लिए गए चिमटे की इतनी तारीफ करता है कि बाकी सभी लड़कों का मन चिमटे पर आ जाता है. हामिद कहता है कि चिमटे को कंधे पर रखो तो बंदूक हो गई, हाथ में ले लिया तो फकीरों का चिमटा हो गया, इससे मंजीरे का काम भी लिया जा सकता है. हामिद का यह भी कहना था कि मेरा बहादुर चिमटा आग में, पानी में, आंधी में, तूफान में बराबर डटा खड़ा रहेगा. अब आप कहेंगे कि इस कहानी या चिमटे का खानपान से क्या संबंध? तो हम आपको बताते हैं कि भारतीय खानपान में मट्ठी (मठरी) का रोल भी कुछ-कुछ ‘चिमटे’ जैसा ही है.

    चाय के साथ खाओ तो अलग मजा, अचार में लपेट के खाओ तो आनंद, भगवान के भोग में मिठाइयों के साथ मट्ठी का भोग चढ़ा दो, विवाह के निमंत्रण वाले डिब्बे में मट्ठी की अलग ही अहमियत. सुबह नाश्ते में भी खा सकते हैं तो शाम की चाय के साथ ही इसका मजा लिया जा सकता है. कुल-मिलाकर मट्ठी एक ऐसा भारतीय व्यंजन है, जिसे हर जगह ‘फिक्स’ किया जा सकता है. आज आपको ऐसी दुकान पर ले चल रहे हैं, जिसके पास छह प्रकार की मट्ठी मिलती है और उनका स्वाद भी अलग है और लाजवाब भी.

    मीठी-नमकीन, फीकी व पालक-मैथी की स्वादिष्ट मट्ठी

    पुरानी दिल्ली की पुरानी सब्जी मंडी के पास जब आप घंटाघर पहुंचेंगे तो वहां से कोल्हापुर रोड निकलता है. इसी रोड पर ‘यादव मट्ठी वाला’ की पुरानी दुकान है. दुकान का नाम ही बता रहा है कि मट्ठी इसकी यूएसपी है और उसे बरकरार रखने के लिए दुकान वाला खासा मेहनत कर रहा है. आप किसी बेकरी की दुकान पर जाएंगे तो हो सकता है कि आपको वहां पर मट्ठी की वैरायटी मिल जाए. लेकिन इस दुकान की विशेषता यह है कि यहां मट्ठी खुद बनाई जाती है. इस दुकान पर करीब छह प्रकार की मट्ठी मिलेगी. इनमें मैदे वाली नमकीन मट्ठी तो आम है लेकिन साथ में कोई भी मट्ठी खाइए, यह कुरकुरी मट्ठी मुंह में जाकर घुलने लगेगी और बेहतरीन स्वाद पेश करेगी.

    यहां फीकी मट्ठी, मीठी मट्ठी, मैथी-पालक वाली मट्ठी के अलावा तिकोनी व सूजी वाली मट्ठी भी मौजूद है.

    असल में ये सभी मट्ठियां मूंगफली के तेल में तली जाती हैं, जिसके चलते यह स्वादिष्ट, हल्की कुरकुरी व खाने के बाद बहुत भारी नहीं महसूस होगी. इन सभी मट्ठियों की कीमत 180 से 220 रुपये किलो है. इनमें से कुछ मट्ठी इसलिए अधिक स्वादिष्ट और अलग हैं क्योंकि बनाते समय उनमें जीरा, अजवायन, साबुत धनिया आदि भी डाला जाता है.

    नमकपारे-शकरपारे से लेकर फैक्टरी में तैयार नमकीन

    इस दुकान को देसी बेकरी की दुकान कहा जा सकता है. यहां पर आपको कई प्रकार के नमकपारे के अलावा शकरपारे भी मिलेंगे. शकरपारे चीनी और गुड़ दोनों में तैयार किए जाते हैं. खाओ तो लगेगा कि कुछ अलग ही चीज खा रहे हैं. इस दुकान की एक और विशेषता यह है कि यहां पर छोटी व बड़ी साइज की खट्ठी-मीठी मसाले वाली कचौड़ी मिलेगी. यह शानदार कचौड़ियां एक माह तक खराब नहीं होती हैं. इनकी कीमत 280 रुपये किलो है. दुकान पर खुद के बनाए हुए बिस्कुट भी मिलते हैं तो करीब 15 प्रकार की नमकीन भी मिल जाएगी. इनमें गुजराती, पंजाबी व मद्रासी नमकीन शामिल है. इनमें कुछ का स्वाद बेहद तीखा है, इन सभी नमकीन को भी अपनी ही फैक्टरी में तैयार किया जाता है.

    दुकान पर खुद के बनाए हुए बिस्कुट भी मिलते हैं तो करीब 15 प्रकार की नमकीन भी मिल जाएगी.

    20 साल पुरानी दुकान, क्वॉलिटी से कोई समझौता नहीं

    मट्ठी की यह दुकान 20 साल पहले खोली गई थी और तब से यहां वही सामान बेचा जा रहा है, जो सालों पहले मिलता था. इस दुकान को विनोद ने शुरू किया. उनका कहना है कि यह पुराना इलाका है, इसलिए उन्होंने सोचा कि निखालिस मट्ठी का काम शुरू किया जाए. काम चल निकला और आज तक जारी है. इस दुकान को अब उनके साथ बेटे आशीष भी साथ में चलाते हैं. उनका कहना है कि मूंगफली का तेल और सालों से पुरानी मिलों से खरीदा जा रहा है मैदा-सूजी और मसालों को लेकर हम कोई समझौता नहीं करते हैं. तभी मट्ठी के बिजनेस में कायम हैं. दुकान पर कोई अवकाश नहीं रहता है. सुबह 8 बजे दुकान खुल जाती है और रात 10 बजे तक कामकाज चलता है. दो मेट्रो स्टेशन विश्वविद्यालय व पुलबंगश आसपास हैं, लेकिन इस दुकान तक आने के लिए वहां से रिक्शें में आना पड़ेगा.

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