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इन आसान तरीकों से करें बुजुर्गों की जिद का समाधान, खुश और हेल्दी रहेंगे घर के बड़े

घर के बुज़ुर्गों के साथ समय बिताएं-Image/Canva

घर के बुज़ुर्गों के साथ समय बिताएं-Image/Canva

बुढ़ापे में अक्सर कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव, रूठना और जिद्द करना आम होता है. ऐसे में ज्यादातर बच्चे बुजुर्गों में आए इस बदलाव को नजरअंदाज कर देते हैं और धीरे-धीरे उनसे दूरी बनाना भी शुरू कर देते हैं लेकिन आपका ये रिएक्शन भविष्य के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. हालांकि, अगर आप चाहें तो कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर उन्हें हमेशा खुश रख सकते हैं.

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बुढ़ापा किसी बचपने से कम नहीं होता है. बढ़ती उम्र के साथ बेशक लोग जिंदगी के कई अनुभव बटोर कर संजिदा हो जाते हैं. लेकिन बुढ़ापा आते-आते यही सीरियसनेस गुस्सा, लाड, फटकार और जिद में तब्दील हो जाती है. ऐसे में बच्चे भी पैरेंट्स की बात मानने के बजाए, उनसे दूरी बनाना शुरू कर देते हैं. हालांकि, बुजुर्गों की बातों को अनदेखा करने की जगह आप उन्हें हैंडल करने के कुछ आसान तरीके भी अपना सकते हैं.

दरअसल, एक्पर्टस की मानें तो बच्चे काम की व्यस्तता के चलते बुजुर्गों को ठीक से समय नहीं दे पाते हैं. ऐसे में अकेलेपन के कारण बुजुर्ग अवसाद, तनाव, व्याकुलता जैसी परिस्थितियों का शिकार होने लगते हैं और चिड़चिड़ापन, रूठना, जिद करना उनके व्यवहार का हिस्सा बन जाता है. ऐसे में कुछ अहम बातों का खास ख्याल रखकर आप उनकी खुशी की वजह बन सकते हैं.

बातों को न करें नजरअंदाज
कई बार व्यस्त दिनचर्या के कारण हम घर के बुजुर्गों के साथ बैठने से कतराने लगते हैं. हालांकि, उन्हें आपके समय की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है. इसलिए दिन में थोड़ा समय निकाल कर उनके साथ बैठकर बातें करना ना भूलें. साथ ही उनकी बातों को अनदेखा करने के बजाए ध्यान से सुनें. इससे उन्हें काफी खुशी मिलेगी और वो बिल्कुल अकेला फील नहीं करेंगे.

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शारीरिक गतिविधियों में करें शामिल
वृद्धा अवस्था में अक्सर शरीर में ज्यादा एनर्जी नहीं रह जाती है. ऐसे में बुजुर्ग लोग ज्यादातर आराम करना पसंद करते हैं और उनकी शारीरिक गतिविधियां न के बराबर ही होती हैं. इसलिए बुजुर्गों को हर रोज आधे घंटे व्यायाम और योग करने की सलाह दें. इससे उन्हें फिजकली और मेंटली एक्टिव रहने में मदद मिलेगी.

जरूर सौंपे जिम्मेदारी
बुजुर्गों को खुश रखने के लिए उन्हें घर के छोटे-छोटे कामों मसलन राशन, सब्जी और दूध लाने जैसी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं. अगर आप अकेला न भेजना चाहें तो किसी समझदार बच्चे को भी उनके साथ भेज सकते हैं. इससे उन्हें असल में घर का अहम हिस्सा होने का एहसास होगा और वो खुद को अपनों के करीब महसूस करेंगे.

सेहत का रखें खास ख्याल
बुढ़ापे में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में बुजुर्गों का समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराते रहें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उनका रूटीन निर्धारित करें.

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जरूरी मामलों में लें सलाह
घर के छोटे-बड़े फैसलों में बुजुर्गों की राय लेना न भूलें. खर्चों के हिसाब किताब से लेकर निवेश के तरीकों तक में उनका अनुभव आपके बेहद काम आ सकता है. वहीं घर के बुजुर्गों को आपके फैसलों में अपनी अहमियत का अहसास करके खुशी मिलती है.

Tags: Lifestyle, Relationship

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