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ओह …मैंने ख़ुद को छूकर देखा! क्या यह ठीक है? पढ़ें मिथ और तथ्य

News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 11:31 AM IST
ओह …मैंने ख़ुद को छूकर देखा! क्या यह ठीक है? पढ़ें मिथ और तथ्य
हस्तमैथुन आपके लिए अच्छा है या बुरा जानें

शोध में पता चला है कि जानकारी रखनेवाले माँ-बाप से शरीर और सेक्सुअल कार्य के बारे में उम्र-से संबंधित शिक्षा से यौन कुंठा या किशोरों में जोखिम उठाने की बात में कमी आती है.

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  • Last Updated: February 12, 2020, 11:31 AM IST
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रिद्धि (14 साल, नाम बदला हुआ) को एक बार अपने भाई के बेड के नीचे एक मैगज़ीन रखी मिली. उसने उत्सुकतावश, उसे पलटना शुरू किया. मैगज़ीन की तस्वीरों को देखकर उसे उत्तेजना महसूस हुई. इन तस्वीरों को देखते हुए उसने ख़ुद को छूना शूरू किया और उसी समय उसकी मां कमरे में आ गई. उनकी बेटी क्या कर रही है, यह देखकर उन्हें विस्मय हुआ और वह इसके ख़िलाफ़ पूरे ज़ोर-शोर से लग गईं कि यह ग़लत है और कैसे इससे उसका विकास रुक जाएगा, पढ़ाई में उसका मन नहीं लगेगा और लोग क्या कहेंगे जब उन्हें इस बारे में पता चलेगा. अपने किए पर शर्मिंदा और मन में गंदगी का एहसास पाले रिद्धि ने अपनी मां से माफ़ी मांगी और ऐसा फिर कभी नहीं करने का वादा किया. कुछ ग़लत किया इस एहसास को मन में रखे, रिद्धि ने एक वयस्क के रूप में भी फिर कभी अपने शरीर को एक्सप्लोर नहीं किया.

भारत के अधिकांश शहरों में अमूमन यही होता है और यहां तक कि इससे भी ज़्यादा बहुत कुछ होता है. मैस्टर्बेशन आज भी गंदे शब्दों की श्रेणी में आता है और आज भी यह कई गलतफहमियों और रहस्यों में लिपटा हुआ है. किशोरावस्था की इस उम्र में सही जानकारियों की बेहद ज़रूरत होती है जो उन्हें दी जानी चाहिए. यह उन्हें स्वस्थ मानसिक स्थिति को सामान्य बनाए रखता है, ख़ुद को समझने में मदद करता है और शरीर क्या महसूस करता है और उसे किस तरह छूने पर अच्छा लगता है और किस तरह अच्छा नहीं लगता है यह सब जानने में मदद करता है. जब आप यह समझ जाते हैं कि आपको किस बात से उत्तेजना होती है, किस बात से आनंद आता है तो इस आधार पर आप अपने वर्तमान या भविष्य के सेक्सुअल पार्टनर से बेहतर संवाद कर पाएंगे.

 मैस्टर्बेशन सबसे सुरक्षित सेक्स है.
मैस्टर्बेशन सबसे सुरक्षित सेक्स है.


इस बार वैलेंटाइन डे पर आइए हम मैस्टर्बेशन के बारे में कुछ रहस्यों से पर्दा उठाएं और आपको प्यार के दरवाज़े तक ले जाएं!

मिथ: मैस्टर्बेशन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है
तथ्य : मैस्टर्बेशन सामान्य बात है और इससे कोई शारीरिक और मानसिक समस्या पैदा नहीं होती है. न तो यह आपको अंधा बनाएगा, न पागल और न ही बेवक़ूफ़. यह आपके जननांगों को भी नुक़सान नहीं पहुंचाएगा, न तो इसकी वजह से पिंपल्स आते हैं और न ही यह आपके विकास को रोकता है. तथ्य तो यह है कि ख़ुद को अंतरंग रूप से समझने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. मैस्टर्बेशन के दौरान इस बात की संभावना काफ़ी है कि आपको ऑर्गैज़म का अनुभव हो क्योंकि आपका ख़ुद पर पूरा नियंत्रण होता है तो इस तरह से इससे आपके स्वास्थ्य को लाभ ही होगा! इतना तो हम जानते हैं कि यह तनाव, दर्द, उबकाई, सुबह की सुस्ती और पेट संबंधी गड़बड़ियों को दूर करता है. रात को आपको नींद अच्छी आएगी, आपका इम्यून सिस्टम बेहतर होता है और मैस्टर्बेशन आपके चेहरे पर वह रौनक़ भी लाता है जिसकी आपको तलाश होती है.

मिथ: मैस्टर्बेशन से आप गंदे हो जाते हैंतथ्य : एकल यौन संबंध अपनी सेकसुअलिटी को एक्सप्लोर करने का स्वस्थ और स्वाभाविक तरीक़ा है. मैस्टर्बेशन के बारे में बहुत ही आत्मग्लानि और शर्म जैसी बातें फैलाई गई हैं, विशेषकर युवाओं में जिन्हें सेक्स के बारे में बहुत कुछ नहीं बताया जाता. लेकिन जो अध्ययन हुए हैं उससे पता चला है कि मैस्टर्बेशन सामान्य यौन विकास का अटूट हिस्सा है. ख़ुद को आनंद पहुँचाना बहुत प्यारा काम है जो आप कर सकते हैं. चूँकि इस बात की उम्मीद ज़्यादा होती है कि हर उम्र के लोग मैस्टर्बेशन के दौरान ऑर्गैज़म का अनुभव करें, आप शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को होनेवाले लाभों से परिचित होते हैं. फिर, वास्तविक रूप से किसी के साथ यौन संबंध स्थापित करने से पहले अपनी सेक्सुअलिटी के बारे में पता करना आपको जीवन में उस समय मदद पहुँचाता है जब आप अपने पहले अंतरंग संबंध के बारे में सोचते हैं या अपने पार्टनर के साथ सेक्स के बारे में बात करना चाहते हैं. यह समय होता है जब आपको अपने शरीर के बारे में ज़्यादा जानना चाहिए और इस बारे में किसी भी तरह का शर्म या लज्जा महसूस नहीं करें!

मिथ: ज़्यादा मैस्टर्बेशन आपकी सेहत के लिए ख़राब है
तथ्य : मैस्टर्बेशन सबसे सुरक्षित सेक्स है. इससे न तो आप गर्भवती (pregnant) होती हैं और न ही कोई एसटीडी ही आपको होता है. यह आपको अपने शरीर के बारे में यह जानने में मदद करता है कि आपको क्या अच्छा लगता है. इस बारे में क्या ज़्यादा और क्या कम है, यह नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है. पर यह हो सकता है कि दिन में कई बार किए जानेवाले जुनूनी (obsessive) मैस्टर्बेश स्कूल, पढ़ाई के अतिरिक्त गतिविधियाँ, और जीवन की अन्य ज़रूरी बातों में दख़ल दे. जीवन में ध्यान बँटानेवाली अन्य सामान्य गतिविधियों जैसे टीवी, क्रिकेट, आइसक्रीम की तरह ही मैस्टर्बेशन भी समस्या पैदा कर सकता है अगर आपके जीवन का सारा फ़ोकस इसी बात पर होता है.अगर आपको लगता है कि मैस्टर्बेशन आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है तो ज़रूरी है कि आप किसी दोस्त या काउन्सिलर से बात करें.
मिथ: ऐसे टीन जो मैस्टर्बेट करते हैं, उनमें सेक्स की भावना काफ़ी तीव्र होती है और उनमें यौन विकृति (deviant) पैदा हो सकती है
तथ्य : सभी किशोर (और वयस्क भी!) ख़ुद को उत्तेजित करते हैं. वे अपने शरीर को उत्तेजनाओं से एक्सप्लोर करते हैं. कुछ स्थानों को छूने से ख़ुशी होती है जबकि अन्य स्थानों को छूने से दर्द या असहज महसूस होता है. किशोर वय के लोगों को यह बताये जाने की ज़रूरत है कि मैस्टर्बेशन एक निजी कार्य है, बेहतर है इसे आप अकेले में अपने बेडरूम में आज़माएँ और उम्मीद की जाती है कि आपका शरीर इससे अच्छा महसूस करेगा.

इस बारे में हुए शोध में पता चला है कि जानकारी रखनेवाले माँ-बाप से शरीर और सेक्सुअल कार्य के बारे में उम्र-से संबंधित शिक्षा से यौन कुंठा या किशोरों में जोखिम उठाने की बात में कमी आती है. इसको आप सेक्स संबंधित अपराध भी कह सकते हैं! अधिकांश किशोर जो मैस्टर्बेट करते हैं वे सेक्स से होनेवाले संक्रमणों के बारे में ज़्यादा जानते हैं, उन्हें गर्भनिरोधों (contraception) और सुरक्षित सेक्स के बारे में ज़्यादा पता होता है और वास्तव में कुंठित यौन व्यवहारों से दूर रहते हैं.  तो इस तरह, हम जानते हैं कि हो सकता है कि लोग मैस्टर्बेशन के बारे में बात करने में शर्म महसूस करें, पर आपको इस बारे में शर्म या कुंठा महसूस करने की ज़रूरत नहीं है. तथ्य तो यह है कि अपने शरीर को सुरक्षित रूप से जानने की यात्रा का यह अहम हिस्सा हो सकता है.

सुरभि रस्तोगी दुनिया के बहुत से प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे डेलॉट कंसलटिंग, कोका कोला इंडिया इंक, जीई कैपिटल यूरोप और इंफ़ोसिस में एचआर पेशेवर के रूप में काम कर चुकी हैं.अपने बच्चों के साथ समय बिताने के लिए इस समय उन्होंने काम से ब्रेक लिया है. वह मुख्यतः महिलाओं और बच्चों के लिए फ़िक्शन और नॉन-फ़िक्शन लिखती हैं, और इस समय महिलावादी लेखन करती हैं. रेडवोम्ब में भी वह कॉलम लिखती हैं.

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First published: February 11, 2020, 2:31 PM IST
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