सर्वेश की बीवी ने नेमप्लेट पर क्यों लिख दिया 'विजेता, W/O अंकुर चौहान'?

LoveSexaurDhokha: वो शादीशुदा थी लेकिन उसका अफेयर हुआ. उसके पति के भी अफेयर चल रहे थे. पति पत्नी ही नहीं बदायूं में पूरे मोहल्ले को पता था कि कैसे रिश्ते बन रहे थे. अजीब मोड़ लेते हुए कहानी एक नहीं, दो हत्याओं तक पहुंची.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 18, 2019, 8:07 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 18, 2019, 8:07 PM IST
'किसी काल्पनिक कहानी से ज़्यादा हैरतअंगेज़ और अटपटी होती है ज़िंदगी..!'
- ऑस्कर वाइल्ड, अंग्रेज़ी के मशहूर लेखक

21 साल की विजेता की शादी जब सर्वेश के साथ हुई तो उसने शादी और अपने साथी को लेकर कई ख़्वाब देखे थे. तब विजेता को क्या मालूम था कि ख़्वाबों में उसके साथी का जो चेहरा था, हक़ीक़त में, बदल जाएगा. उसकी ज़िंदगी में कोई और आ जाएगा. एक ऐसी प्रेम कहानी लिखी जाएगी, जो शहर ने शायद पहले न सुनी होगी. लेकिन, विजेता तो क्या इस कहानी के किसी किरदार को अंदाज़ा नहीं था कि इस कहानी की प्यास दो किरदारों का खून पीकर बुझेगी.

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साल 2017 में 16 फरवरी को 33 वर्षीय विजेता बदायूं की समाजवादी युवजन सभा के प्रेसिडेंट अपने पति सर्वेश का कॉलर पकड़कर गला फाड़कर रो चुकी थी और अब भी सुबकते हुए भर्रायी आवाज़ में उस पर इल्ज़ाम लगा रही थी.

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विजेता : क्यों मार डाला उसे? क्यों छीन लिया उसे मुझसे?
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सर्वेश : हमने नहीं मारा उसे. हम क्यों मारेंगे? हमारा विश्वास करो विजेता...
विजेता : नहीं, नहीं. आपने ही मारा है... अब हमें कसम है आपकी कि खाना तो क्या हम घूंट भर पानी तक न पिएंगे, जब तक आप हमें सच नहीं बताते...

और काफी देर बाद जब विजेता मन मसोसकर एक कोने में बैठी रह रहकर सुबकती रही, तो सर्वेश ने कहा - 'विजेता... अगर तुम्हें लगता है कि हमने मारा है उसे, तो चलो मान लिया कि हमने मारा है. पर अब कुछ खा लो तुम.'

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इसके बाद हुआ ये कि सर्वेश ने विजेता को कुछ दिनों के लिए उसके मायके छोड़ा. फिर मार्च के पहले हफ्ते में वह उसे दिल्ली लेकर चला गया. 7 मार्च को सर्वेश जब नोएडा के ग्रेट इंडिया प्लेस मॉल में विजेता को लेकर गया तब मौका देखकर विजेता ने फोन किया - 'हमारी मदद कीजिए प्लीज़, हमें डर है कि अंकुर की तरह हमें भी मार डाला जाएगा.'

सर्वेश के साथ दिल्ली के इस सफर में विजेता के मन में कई तरह के शक और डर पैदा हो चुके थे. वह सर्वेश के साथ खुद को महफूज़ नहीं पा रही थी इसलिए जब सर्वेश मॉल के बाद उसे लंच के लिए एक रेस्टोरेंट लेकर गया तो मौका देखकर विजेता वहां से भाग गई. वह रात विजेता ने एक शेल्टर होम में गुज़ारी. विजेता को हर पल लग रहा था कि फोन करने के बाद कोई उसकी मदद के लिए आएगा.

लेकिन, मारे जा चुके अंकुर की फैमिली से कोई आया नहीं. उल्टे पुलिस को खबर कर दी गई कि विजेता ने फोन किया था और वह दिल्ली में थी. विजेता शेल्टर होम से निकलकर पहाड़गंज के एक होटल में रुकी. फिर जब विजेता को समझ में आ गया कि दिल्ली में पुलिस उसके पीछे थी तो वह बरेली चली गई. 11 मार्च को बरेली पहुंची विजेता अगले कुछ महीनों तक अंकुर के रिश्तेदारों के साथ रही.

इधर, विजेता बरेली पहुंच रही थी और उधर, बदायूं से सटे बिलसी इलाके में एक और खून हुआ. इस बार सर्वेश का भाई यानी विजेता का देवर उमेश मारा गया और ठीक उसी तरह, जैसे अंकुर मारा गया था. पूरी कहानी बुरी तरह उलझ रही थी, लेकिन ये कहानी शुरू कहां से हुई थी?

ऐसे और इसलिए हुआ था अफेयर
साल 2005 में शादी के कुछ ही दिनों बाद विजेता के मन में खटास पैदा होने लगी थी. वह रोज़ अपने पति सर्वेश का इंतज़ार करती और उसके लिए खाना बनाकर रखती. लेकिन हर दूसरे दिन ऐसा होता कि सर्वेश देर से घर आता और कहता कि पार्टी मीटिंग थी और वह वहीं खाना खा चुका. इस रूखे बर्ताव के साथ ही, विजेता को पता चला कि एक नहीं बल्कि दो औरतों के साथ सर्वेश के संबंध थे.

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साल 2006 में विजेता की मुलाकात पड़ोस में रहने वाले अंकुर से हुई. अंकुर और विजेता के बीच जल्द ही बातचीत और लगाव शुरू हुआ. सर्वेश के पास न तो विजेता के लिए समय था और न ही उसकी भावनाओं के लिए इज़्ज़त या कद्र. ये कमी कितनी बड़ी होती है? इसका अंदाज़ा सर्वेश को था ही नहीं. इस कमी को पूरा करने के लिए अंकुर की तरफ विजेता झुकती चली गई.

फिर परवान चढ़ता गया रिश्ता
दिसंबर 2006 की एक शाम अंकुर घर में आया और बालकनी में खड़ी विजेता के पास पहुंचा. अपने घुटनों पर बैठकर एक गुलाब का फूल देकर उसने विजेता से अपने प्यार का इज़हार किया. एक दिल बहलाने वाले अफेयर तक तो ठीक था लेकिन विजेता इस तरह के इज़हार से मन ही मन खुश भी हुई लेकिन दूसरे ही पल ठिठक भी गई. 'मैं शादीशुदा हूं अंकुर और एक बच्चे की मां भी. हमारे बीच कुछ मुमकिन नहीं है...'

उस रोज़ तो अंकुर वहां से चला गया लेकिन उसने अपना प्यार जताना नहीं छोड़ा. लगातार विजेता की देखभाल करना, उसे समय देना और बात बात में अपने प्यार का इज़हार करना. एक दो महीनों में ही विजेता हार गई और उसने अंकुर के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया. अब दोनों मोहल्ले में हाथ में हाथ डाले वॉक करते, लोगों की परवाह किए बगैर शहर भर में घूमते और एक दूसरे के घर पूरे अधिकार से आते-जाते थे.

उसका पति नहीं था दूसरे बच्चे का बाप
जब विजेता ने ही कुछ न छुपाने की ठान ली थी तो सर्वेश को तो पता चलना ही था. विजेता की इस बेबाकी और उसके खुद के दो अफेयर होने के कारण सर्वेश कभी कुछ बोल नहीं सका और न ही विजेता को रोक सका. कुछ वक्त तक सब कुछ ऐसे ही चलता रहा और सर्वेश को पूरी तरह पता था कि उसका दूसरा बच्चा उसका नहीं था बल्कि अंकुर का था. ये कड़वा सच भी सर्वेश ने किसी तरह पचा लिया था और वह उस बच्चे को अपने बच्चे की ही तरह पाल रहा था.

जब उसने बीवी नहीं प्रेमिका को खिलाया केक
अंकुर चूंकि सर्वेश की पार्टी के कामों में जुड़ा रहता था इसलिए दोनों का मिलना जुलना बना रहा था. विजेता और अंकुर के बच्चे के जन्म के बाद पूरे समाज को अंगूठा दिखाते हुए अफेयर में जुड़े दोनों ने शादी का मन बनाया तो यहां सबको ऐतराज़ था. अंकुर की मां ने सख़्त ऐतराज़ जताते हुए अंकुर की शादी 2013 में पूजा से करवा दी.

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विजेता : तो अब? किसे ज़्यादा प्यार करोगे? जिसे प्यार करते हो या जिससे शादी कर ली है?
अंकुर : तुम भी ना? ये कोई सवाल है! तुम भी जानती हो कि शादी क्यों हुई है? प्यार तो प्यार है और मैं तो पूजा को भी सब कुछ बता दूंगा. मौका देखते ही.

अंकुर की शादी के दो महीने बाद 26 सितंबर को अंकुर का बर्थडे थे. पार्टी में अंकुर ने केक काटा तो पहला टुकड़ा उसने न पूजा को खिलाया और न अपनी फैमिली में किसी और को बल्कि विजेता को खिलाकर सबके सामने अपनी मोहब्बत का ऐलान कर दिया. अब तो टंटा बढ़ना ही था. पूजा की शिकायतें शुरू होने लगीं और आए-दिन बहस होती. कई बार अंकुर घर से चला जाता और कुछ दिनों के लिए बरेली में करीबी रिश्तेदारों के पास जाकर रहता.

शादी पर भारी पड़ा प्यार और दोनों भाग गए
इन तमाम सिलसिलों के बीच अंकुर के साथ रिश्ते को लेकर विजेता की बेचैनी भी बढ़ चुकी थी. रोज़ की चकल्लस खत्म करने के लिए 2015 में विजेता ने पहली बार सर्वेश से आमने सामने सब कुछ साफ साफ कहने का इरादा किया.

विजेता : हम अंकुर से प्यार करते हैं और हमें उसी के साथ रहना है. पूरी ज़िंदगी. हमें आपसे तलाक चाहिए.
सर्वेश : खामोश. ये नहीं हो सकता. हम जानते हैं तुम हमें हमारे अफेयर का ताना दोगी. शादीशुदा होते हुए भी हमारे अफेयर रहे लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ता विजेता. हम तुमसे हमेशा प्यार करते थे, करते रहे और करेंगे. हमने पति होने के सारे फर्ज़ निभाए हैं. तुम हमारी पत्नी हो और हमेशा रहोगी.

कुछ दिन यही हंगामा चला और सर्वेश को तलाक कतई मंज़ूर न था. साल 2016 में आखिरकार विजेता और अंकुर बदायूं से भाग खड़े हुए. अपनी अलग दुनिया बसाने के लिए अगले 17 दिनों तक मुरादाबाद, फरीदाबाद, मथुरा और कानपुर होते हुए दोनों हल्दवानी पहुंचे. वहीं कुछ दिन रुके और बदायूं पुलिस ने दोनों को वहीं से पकड़कर दोनों को घर भेज दिया.


फिर इस संबंध को लेकर हंगामा होता रहा. जनवरी 2017 में विजेता ने सर्वेश का घर हमेशा के लिए छोड़ दिया और अपने मायके इटावा चली गई. लेकिन, उसके मायके में भी विजेता के इस कदम को किसी ने वाजिब नहीं ठहराया. विजेता के दोनों बच्चे ज़्यादातर ननिहाल यानी इटावा में ही रहे थे. इटावा में रहने के दौरान जल्द किसी उपाय पर पहुंचने के लिए विजेता अपने एक गुप्त मोबाइल फोन से लगातार अंकुर के साथ बात कर रही थी.

आशिक की हत्या से हुआ इश्क का खून
8 फरवरी को शाम साढ़े सात बजे विजेता की आखिरी बार अंकुर से बात हुई. अगले दिन सुबह अंकुर की खून से लथपथ लाश बहेरी स्टेडियम के पास मिली. अंकुर को ईंट पत्थरों से कुचल कुचलकर मार डाला गया था. अंकुर के भाई आशीष ने पुलिस को बयान दिया था कि सर्वेश ने अंकुर को मिलने के लिए बुलाया था. आशीष साथ में गया था लेकिन आशीष को जबरन कुछ दूर छोड़कर अंकुर अकेले मिलने गया था. स्टेडियम से तकरीबन घंटे भर बाद आशीष ने सर्वेश और उसके एक दो साथियों को तेज़ी से बाहर निकलते देखा था. सर्वेश ने एक टेम्पो पकड़ा और कुछ दूर खड़ी कार से वह निकल गया था.

अगले दिन सर्वेश इटावा पहुंचा तो उसे देखते ही विजेता फूट पड़ी. उसने सर्वेश पर अंकुर की हत्या का इल्ज़ाम लगाया तो सर्वेश ने सफाई दी कि 'हम तो इलाहाबाद में थे. एक कोर्ट केस में सुनवाई थी हमारी.' लेकिन, विजेता उसकी सुनने को तैयार नहीं थी. 'नहीं, झूठ बोल रहे हैं आप. आशीष ने देखा था आपको. आपने ही अंकुर को बुलाया था मिलने. अब आपको सच बताना ही पड़ेगा वरना आपकी कसम हम भूखे ही मर जाएंगे.'

दूसरी हत्या बनकर रह गई पहेली
इसके बाद सर्वेश ने मनाने और समझाने की कई कोशिशें कीं. अब कहानी वहां पहुंची, जहां से शुरू हुई थी यानी विजेता को सर्वेश दिल्ली लेकर चला गया था. सर्वेश पर शक के चलते दिल्ली से जब विजेता बरेली पहुंची तो एक और खबर मिली कि सर्वेश के भाई उमेश की उसी तरह हत्या हुई जैसे अंकुर की हुई थी यानी उसे भी ईंटों से कुचलकर मार डाला गया था.

पहले सबको यही शक था कि अंकुर की फैमिली ने अंकुर की हत्या का बदला लेने के लिए उमेश को मार डाला लेकिन जांच में पता चला कि उमेश की हत्या के वक्त अंकुर की फैमिली बदायूं के घर में ही थी जबकि हत्या बिलसी में हुई थी. अब पूरा शक सर्वेश पर ही था.

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इधर, अंकुर की लाश तक विजेता देख नहीं पाई थी. जब विजेता अंकुर की फैमिली से मिली तो उसने अंकुर की लाश की तस्वीरें देखीं. वह बेसाख्ता रो पड़ी. 'इतनी बुरी तरह मारा था अंकुर को!' अब विजेता से रहा नहीं गया और वह पुलिस के आला अफसरों से मिली और उसने अंकुर की हत्या के लिए सर्वेश को कड़ी सज़ा देने की गुहार की.

दो कत्लों के बाद बचे सवाल और एक सच
विजेता के पूरी कहानी सुनाने और बयान के बाद पुलिस ने सर्वेश की तलाश शुरू की. दो ही दिनों में सर्वेश ने सरेंडर किया और कबूल कर लिया कि 'मैंने ही अपने भाई उमेश और दो साथियों प्रेम व धीरू के साथ मिलकर अंकुर की हत्या की थी.' सर्वेश को जेल भेजा गया. वह बेल की कोशिश करता रहा और केस जारी है.

इधर, कुछ महीनों के बाद विजेता के मन में सैलाब उठा. 'क्या मैंने सर्वेश के खिलाफ बयान देकर सही किया? क्या वाकई सर्वेश खूनी था? सर्वेश को अगर अंकुर का खून करना ही होता तो वह सालों पहले कर देता? 8 फरवरी को ऐसा क्या हुआ था कि उसने खून किया? और सर्वेश बार बार यही क्यों कह रहा था कि उसने खून नहीं किया?'


सर्वेश के खिलाफ कोर्ट में केस चलता रहा और इधर, इन सवालों से रोज़ विजेता जूझती रही. इन सबके बीच, विजेता वापस बदायूं के अपने उसी घर में पहुंची, जहां उसकी और अंकुर की पहली मुलाकात हुई थी. मोहल्ले की कुछ आंखें गड़ी हुई थीं कि विजेता दरवाज़े के पास की दीवार पर क्या कर रही थी. फिर विजेता वह दरवाज़ा खोलकर अंदर चली गई जिसके पास की दीवार पर नेमप्लेट लगी थी 'विजेता, वाइफ ऑफ अंकुर चौहान'.

(यह कहानी मीडिया में आई खबरों पर आधारित है)

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First published: February 18, 2019, 8:07 PM IST
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