स्टूडेंट के साथ रिश्ते की ख्वाहिश में उसने रच डाली एक कत्ल की साज़िश

स्टूडेंट के साथ रिश्ते की ख्वाहिश में उसने रच डाली एक कत्ल की साज़िश
सांकेतिक​ चित्र

LoveSexaurDhokha: शादी उसके मन के मुताबिक नहीं हुई थी. शादी के बाद भी वह संतुष्ट नहीं थी. ऐसी राह पर चलना मजबूरी थी जिससे वह वाकिफ नहीं थी. दिल्ली में सार्जेंट की उस मौत की कहानी, जो 20 दिनों में कत्ल की कहानी साबित हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 19, 2019, 8:52 PM IST
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'बहुत दूर और नये सिरों की तरफ निकल जाने में खतरा ये है कि मैं वो खो दूंगी, जो मेरे पास है और अकेलेपन के सिवा मेरे हाथ कुछ न आएगा..' मशहूर कवयित्री सिल्विया प्लैथ की ये लाइनें इस कहानी का सार बन गईं जो दिल्ली में घटी.

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अपने पति की मौत पर तीन साल की बच्ची की मां गला फाड़कर बिलख रही थी. हार्ट अटैक से हुई एयरफोर्स सार्जेंट की मौत के बाद सभी मृतक की पत्नी को दिलासा दे रहे थे और उसे बदकिस्मत समझ रहे थे. लेकिन, डॉक्टरों को माजरा कुछ और लगा. फिर पुलिस ने पूरी जांच की. एक महीने बाद जिसने सुना, वही दंग रह गया कि यह मौत नहीं हत्या थी. और कारण था लव, सेक्स और धोखा!



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साल 2008 में 23 साल की सुधा इलाहाबाद में अपने परिवार के साथ रहती थी. सुधा के पिता एयरफोर्स में थे इसलिए सुधा की शादी के लिए एयरफोर्स में सार्जेंट रमेश के साथ बातचीत शुरू हुई और जल्द ही सुधा की शादी उससे 12 साल बड़े रमेश से कर दी गई. शादी के कुछ ही वक्त बाद रमेश के साथ सुधा दिल्ली के वसंत विहार इलाके में रहने लगी.

एयरफोर्स के मुलाज़िमों के लिए बने सरकारी क्वार्टरों में रहते हुए सुधा और रमेश की एक बेटी हुई. बेटी के जन्म के बाद से दोनों के बीच दूरी पैदा हुई. इस दूरी की वजह सिर्फ यही थी कि काम और ड्यूटी के सिलसिले में रमेश को अक्सर बाहर रहना पड़ता था. फिर रमेश की शराब की आदत. 'इतनी मत पिया करो, किसी दिन ये शराब ही मुसीबत बन जाएगी.' लेकिन, रमेश कहां सुनने समझने वाला था?

कुछ वक्त तो रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ गुज़र गया लेकिन फिर अकेलापन सुधा को खाने लगा. 'मैं हमेशा टॉपर थी. डिग्री भी ली. शादी न होती तो मैं किसी अच्छे पद पर होती. अब बच्चों को तो पढ़ा ही सकती हूं.' सुधा ने तनहाई से छुटकारे के लिए तरकीब सोची ट्यूशन पढ़ाने की. रमेश ने इजाज़त दे दी. रमेश काम में बिज़ी रहता और घर पर सुधा 9वीं से 12वीं तक के आसपास के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती. धीरे-धीरे कई छात्र सुधा के घर पढ़ने आने लगे. इन्हीं में एक था 11वीं का छात्र 17 साल का राहुल (काल्पनिक नाम).

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देखते ही देखते सुधा और राहुल के बीच नज़दीकियां बढ़ गईं. सुधा और रमेश के बीच शारीरिक संबंध न के बराबर रह गए थे. सुधा के लिए राहुल सिर्फ कुछ ज़रूरतें पूरी करने का सहारा था और राहुल एक मैच्योर औरत के प्रति आकर्षित था. दोनों के बीच संबंध अलग गुल खिलाने लगे और सुधा भी राहुल की तरफ आकर्षित होने लगी.

राहुल : लेकिन, मैडम आप शादीशुदा हैं और मैं इतना छोटा हूं, तो हमारे इस रिश्ते को खत्म ही होना है.
सुधा : नहीं. तुम शादी की उम्र के लायक हो जाओ बस. फिर मैं अपने पति को छोड़कर तुमसे शादी करूंगी.
राहुल : शादी मुझसे? मैं तो आपसे दस-ग्यारह साल छोटा हूं.
सुधा : तो क्या हुआ राहुल? मैं भी तो अपने पति से 12 साल छोटी हूं. ज़रूरी थोड़े है कि पति पत्नी की उम्र बराबर हो या पति की ही ज़्यादा हो! ज़रूरी है प्यार और लगाव. तुम अगर सच्चा प्यार करते हो तो हम शादी कर सकते हैं.

यही सिलसिला चलता रहा. ट्यूशन के बाद सब छात्र लौट जाते लेकिन राहुल रुका रहता. सुधा के साथ वक्त बिताकर ही वह जाता. एक नहीं बल्कि कई बार रमेश ने ऐसा देखा कि सुधा के साथ घर पर सिर्फ राहुल रहता था. हर बार क्या बहाना हो सकता था? फिर रमेश ने यह भी देखा कि सुधा अक्सर मोबाइल फोन पर बिज़ी रहती थी और मोबाइल की कॉल लिस्ट में राहुल का नंबर बना रहता था.

इन तमाम बातों के साथ ही, रमेश को यह भी समझ आने लगा था कि सुधा बिस्तर पर पहले की तरह बर्ताव नहीं करती थी. वह रमेश के साथ एक दूरी बनाने लगी थी. रमेश को इन सब बातों का मतलब समझते देर नहीं लगी और उसने राहुल को डांटकर और डरा धमकाकर घर आने से मना कर दिया. सुधा ने जब कुछ कहना चाहा तो रमेश ने राहुल के सामने उसे भी झिड़क दिया.

'मेरा मुंह मत खुलवाओ. तुम्हें तो शर्म है नहीं, मगर मुझे है. तुम जो कर रही हो, वो कहने में भी मुझे अच्छा नहीं लगता. लेकिन मैं बेवकूफ नहीं हूं कि कुछ समझ न सकूं. आज के बाद ये लड़का अगर यहां दिखा तो अच्छा नहीं होगा.' मतलब साफ था कि सुधा को अब राहुल से छुप छुपकर मिलना था. लेकिन ऐसा कब तक चलता?

सुधा : मुझे तो वो आदमी शुरू से ही पसंद नहीं. अब वो मुझे तुमसे मिलने से भी रोक रहा है. मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा ये सब.
राहुल : हम कर भी क्या सकते हैं मैडम? वो तो...
सुधा : कुछ नहीं कर सकते तो मर तो सकते हैं! अब वो ज़िंदा रहा तो हमें मिलने तक नहीं देगा. इससे तो अच्छा है कि मैं ही खुदकुशी कर लूं...

आखिरकार, सुधा ने किसी तरह राहुल को इस बात पर तैयार कर लिया कि रमेश को रास्ते से हटाना होगा. राहुल अपनी मैडम के इश्क के चलते राज़ी हो गया और दोनों ने इंटरनेट पर किसी की जान लेने के तरीके खोजे जिससे कत्ल को कुदरतन मौत साबित किया जा सके. फिर दोनों ने एक साज़िश रची.

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साल 2014 में 10 अप्रेल की रात रमेश ने रात को हमेशा की तरह शराब पी. डिनर के बाद रमेश सो गया. रमेश के सोते ही सुधा ने फोन कर राहुल को बुलाया. राहुल रात के वक्त घर पहुंचा और नशे की हालत में सोते हुए रमेश को गला दबाकर मार डालने की कोशिश की. रमेश ने छुड़ाने की कोशिश की तो सुधा ने उसे काबू किया. कुछ ही देर में सांस रुकने से रमेश की मौत हो गई.

इसके बाद राहुल वहां से चला गया और सुधा कुछ लोगों की मदद से रमेश को लेकर अस्पताल पहुंची. अस्पताल में रो रोकर उसने बताया कि शराब पीने के बाद रमेश के सीने में दर्द हुआ और वह बेहोश हो गया. डॉक्टरों ने जब जांच की तो उन्हें समझ आया कि नब्ज़ और धड़कन रुके कुछ वक्त हो चुका था. डॉक्टरों को इस मामले में एक शक सा हुआ कि यह मामला कुदरतन मौत का नहीं था. डॉक्टरों ने पुलिस को फोन किया तो पोस्टमार्टम करवाया गया.

1 मई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसमें कत्ल की वजह गला घोंटा जाना पाई गई. पुलिस और डॉक्टरों का शक सही साबित हुआ. अब तफ्तीश शुरू हुई तो पुलिस ने सबसे पहले सुधा के मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड और लोकेशनों की जांच की. इसके बाद सुधा और राहुल दोनों रडार पर आ गए. पहले पुलिस ने राहुल से सख्ती से पूछताछ की तो उसने पूरी कहानी बयान कर दी. फिर सुधा को हिरासत में लिया गया और उसने भी सब कुछ कबूल कर लिया.

(यह कहानी मीडिया में आई खबरों पर आधारित है)

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