लाश के पास पर्ची पर मिला फोन नंबर, फिर मिला एक प्रेमी और एक अफेयर

LoveSexaurDhokha: पति को छोड़ चुकी और उम्र में काफी छोटे आदमी के साथ पत्नी की तरह ठाणे में रह रही अधेड़ उम्र की औरत का अफेयर बेटे की उम्र के लड़के के साथ चल रहा था. बात हत्या तक पहुंची जब शादी की बात गले की फांस बन गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2019, 8:46 PM IST
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जो चुप रहेगी ज़बान ए ख़ंजर, लहू पुकारेगा आस्तीं का
- अमीर मीनाई, मशहूर शायर

गला घोंटकर वह उसकी जान ले चुका था. रात के वक्त जंगल में लाश के पास अब सिर पकड़कर बैठा सोच रहा था कि लाश का क्या किया जाए क्योंकि लाश ऐसे ही छोड़ दी, तो उसका पकड़ा जाना तय था. फिर उसने सोचा कि लाश को जलाकर राख कर दिया जाए तो कोई पहचानेगा ही नहीं और उस तक कोई पहुंच भी नहीं सकेगा. लेकिन 'वही होता है, जो मंज़ूरे-ख़ुदा होता है'. कातिल से कहीं न कहीं एक सुराग छूट ही जाता है.

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बीती 15 जनवरी की रात निर्मला का कत्ल करने के बाद उसकी लाश को जलाने का इरादा करते ही अबरार ने इधर उधर देखा. निर्मला का बैग खोला तो उसमें उसके कुछ कपड़े थे. 'इन्हीं से जला देता हूं, तो ये बैग और कपड़े भी भस्म हो जाएंगे.' अबरार ने जेब से माचिस निकाली और लाश के आसपास कपड़े रखकर उनमें आग लगा दी. कुछ ही देर में आग सुलग पड़ी और कुछ लपटों में कपड़ों व बैग के साथ ही लाश भी जलने लगी.



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पसीने में लथपथ अबरार को कुछ देर में तसल्ली हुई कि उसने पूरा काम कर दिया था. लगातार आसपास देख रहे अबरार को यह भी यकीन हुआ कि उसको निर्मला से मिलते हुए, कत्ल करते और लाश को जलाते अब तक किसी ने नहीं देखा था. अब उसने अपनी तेज़ सांसों पर काबू पाते और पसीना पोंछते हुए जेब से सिगरेट निकाली और उन्हीं लपटों से सिगरेट जलाई. सिगरेट के कश लेते हुए पूरी तसल्ली के साथ अबरार वहां से निकल गया.

कपड़े इतने नहीं थे कि लाश राख हो जाती. आग थोड़ी देर में बुझ गई लेकिन लाश इस कदर तो जल ही चुकी थी कि अब उसे पहचानना मुमकिन नहीं था. सुबह होते ही इस जली हुई लाश को कुछ लोगों ने देखा तो पुलिस को खबर दी. ठाणे रूरल क्राइम ब्रांच की एक टीम मौके पर पहुंची. हत्या क्यों हुई? किसने की? ये बातें तो दूर थीं, पहला सवाल था कि हत्या हुई किसकी? लाश की शिनाख्त कैसे हो?

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आसपास के लोगों में से किसी को इस बारे में कुछ पता नहीं था. जांच टीम अपनी कार्रवाई और पूछताछ में मशगूल थी तभी, एक अफसर को लाश से कुछ ही दूर झाड़ियों के पास कागज़ की एक पर्ची अधजली हालत में पड़ी मिली. इस पर्ची पर एक मोबाइल नंबर लिखा था. सबने एक दूसरे की तरफ देखा. लेकिन लाश के पास कोई मोबाइल फोन नहीं मिला था.

'अगर इस औरत के पास मोबाइल होगा भी तो नंबर पर्ची पर क्यों लिखेगी?'
'फिर भी, अगर पर्ची पर लिखा है तो किसी का नंबर तो होगा. मुझे तो लगता है कि इस नंबर से ज़रूर कुछ पता चल सकता है.' इस नंबर को डायल किया गया तो नालासोपारा में रहने वाली एक औरत से बात हुई. जांच टीम के एक अफसर ने उस औरत को पूरा माजरा समझाते हुए कहा -

'जिस औरत की लाश मिली है, उसके हाथों में पीले और हरे रंग की चूड़ियां हैं. पांव में चांदी की मोटी पायल हैं जिन पर रंग बिरंगा कुछ काम भी है. जिसकी लाश है, उसकी उम्र 45 साल के आसपास लग रही है, रंग गेहुंआ सा है...' ऐसी कुछ बातें जब उस अफसर ने बताईं, तो उस औरत ने कहा कि 'ये जो डिटेल्स आप बता रहे हैं, मुझे लगता है कि मेरे पड़ोस में ही रहने वाली निर्मला हो सकती है.'

अब जांच टीम के पास आगे बढ़ने के लिए एक दिशा तो थी. जांच टीम निर्मला के मकान पर पहुंची तो वहां तीन बच्चियां और उनका बाप सचिन था. 35 वर्षीय सचिन ने बताया कि तीनों बेटियां 47 वर्षीय निर्मला की पिछली शादी से थीं. सचिन और निर्मला ने कानूनी तौर से शादी नहीं की थी लेकिन दोनों काफी वक्त से साथ रह रहे थे और निर्मला अपने नाम में सचिन का ही सरनेम लगाती थी.

पुलिस : अस्ल में, हमें एक पर्ची पर आपकी पड़ोसन का नंबर लिखा मिला. क्या निर्मला के पास कोई मोबाइल फोन था?
सचिन : जी सर, लेकिन उसे मोबाइल में नंबर सेव करना और डायल करना नहीं आता था. बस, वो इनकमिंग कॉल आने पर बात कर लेती थी. शायद इसलिए उसने पड़ोस का नंबर पर्ची पर लिखा होगा कि वह किसी से फोन लगवा सके.
पुलिस : क्या उसके पास आपका नंबर नहीं था? मतलब पड़ोसन का नंबर उसने क्यों लिखा?
सचिन : पता नहीं सर. वो पुणे जा रही थी इसलिए हो सकता है कि नंबर लिख लिया हो. मेरा नंबर तो था ही उसके पास.

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सचिन ने लाश देखकर शिनाख्त कर ली थी कि कत्ल निर्मला का ही हुआ था. पड़ोस में और पूछताछ में यह भी साफ था कि निर्मला ने पड़ोसन का नंबर इसलिए लिया था कि वह पुणे जाकर सचिन के बारे में जानकारी लेती रही. अब जांच में आगे बढ़ने के लिए पुलिस के पास दो दिशाएं थीं.

पुलिस 1 : मेरा खयाल है कि सचिन का ज़रूर कोई चक्कर है इसलिए निर्मला पड़ोसन के ज़रिये उस पर नज़र रखने वाली थी.
पुलिस 2 : हां सर, सचिन को लेकर आते हैं. दो फटके लगाएंगे, सब बक देगा वो.
पुलिस 3 : अगर सचिन इस हत्या में शामिल होता तो हमें इतना कॉपरेट नहीं करता. उसके हावभाव, बेचैनी से हमें पता लगता कि वह कुछ छुपा रहा है या झूठ बोल रहा है. फिर निर्मला उसका सरनेम लगाती थी और उसके पास अपनी बेटियों को छोड़कर पुणे जा रही थी. सचिन पर उसे शक होता तो वो अपनी बेटियों को उसके साथ क्यों छोड़ती? और पुणे जा रही थी तो ठाणे के काशीमीरा के जंगल में कैसे पहुंची? सचिन तो उस रात वहां गया नहीं, वो तो घर पर ही था! चक्कर कुछ और है.
पुलिस 4 : मैं क्या बोलता हूं सर, इन दोनों के मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल्स निकलवाते हैं. कुछ न कुछ तो मिलेगा.

ये डिटेल्स निकलवाए गए तो कहानी में एक नया किरदार जुड़ा और यहां से गुत्थी सुलझती नज़र आई.

'सर, निर्मला पुणे के लिए घर से निकली थी. लेकिन, उसकी मोबाइल लोकेशन उस वक्त ठाणे की तरफ की ही रही. और इसी बीच, उसकी बात एक ही नंबर पर होती रही. कुछ कॉल्स एक ही नंबर से आए. इस नंबर के डिटेल्स भी निकलवाए तो पता चला कि इस नंबर पर निर्मला की लगातार बात होती थी और उस रात दोनों नंबरों की लोकेशन वही थी यानी मौका-ए-वारदात.'

बस, जैसे कातिल मिल गया था. इस नंबर का पता किया गया तो यह नंबर अबरार का था जो नालासोपारा का ही रहने वाला था. अबरार के घर पुलिस पहुंची तो अबरार वहां नहीं था. कर्णाटक के गुलबर्गा ज़िले का रहने वाला अबरार शायद अपने गांव ही भागा था. पुलिस ने फैमिली को डराते हुए सख़्ती के साथ अबरार के बारे में जल्दी खबर देने को कहा. इस दबाव ने काम किया और जल्द ही पुलिस को खबर मिली कि अबरार नालासोपारा में अपने घर आया था.

हत्या के छह दिन बाद यानी 21 जनवरी को अबरार को उसके घर के सामने से ही गिरफ्तार किया गया. उसके साथ जैसे ही सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने कुछ ही मिनटों में अपना गुनाह कबूल कर लिया और पूरी कहानी पुलिस के सामने बयान कर दी.

ऐसे हुई थी मोहब्बत और मोहब्बत में हत्या
अस्ल में, निर्मला अपनी बेटियों और सचिन के साथ रहते हुए घर के पास ही एक छोटी सी दुकान चलाती थी. इस छोटी सी दुकान पर सिगरेट पीने के लिए 25 वर्षीय अबरार आया जाया करता था. इसी लेन देन के चलते अबरार और निर्मला के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे धीरे दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया था. सचिन के साथ निर्मला खुश तो थी लेकिन एक तो उसकी फितरत और दूसरी एक बेहतर भविष्य की चाह की वजह से वह अबरार के साथ अफेयर कर बैठी.

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इस अफेयर को कई महीने हो गए तो निर्मला ने अबरार पर शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया. शादी की बात अबरार के गले नहीं उतरी क्योंकि निर्मला उसकी मां की उम्र की थी और ये रिश्ता उसके घर पर कबूल हो ही नहीं सकता था. वह तो सिर्फ मज़े और शारीरिक ज़रूरतों के लिए निर्मला के साथ अफेयर में था. लेकिन, निर्मला का दबाव बढ़ते हुए इस धमकी तक पहुंच गया कि अगर अबरार ने शादी नहीं की तो वह उसके घर पर अबरार का पर्दाफाश कर देगी और उसके पूरे परिवार को बदनाम कर देगी.

कई कोशिशों के बाद अबरार के पास बदनामी और निर्मला के साथ रिश्ते से आज़ाद होने का एक ही रास्ता बचा था. बीती 15 जनवरी को निर्मला पुणे के लिए घर से निकली तो अबरार ने उसे काशीमीरा के पास बहाने से बुलाया. निर्मला पहुंची तो वह उसे फुसलाकर जंगल की तरफ ले गया और फिर गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतारने लगा. हाथापाई में निर्मला के पर्स से कब, कहां, कैसे वह पर्ची गिर पड़ी, जिस पर मोबाइल नंबर लिखा था, अबरार को पता नहीं चला. यही एक चूक यानी पर्ची अबरार के लिए हथकड़ी साबित हुई.

(यह कहानी मीडिया में आई खबरों पर आधारित है)

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