विदाई के वक्त अपनी बेटी को ये 5 बातें गांठ बांधकर समझा दें

अब मां-बाप भी अपनी बेटियों की शादी ऐसे ही घर में कराना चाहते हैं, जहां वो खुलकर जी सके, नौकरी कर सके, मन के कपड़े पहन सके. ऐसे मां-बाप के लिए हमने कुछ ऐसी ही नसीहतें तैयार की हैं, जिन्हें विदाई के वक्त वह अपनी बेटियों को दे सकते हैं-

News18Hindi
Updated: July 14, 2019, 4:23 PM IST
विदाई के वक्त अपनी बेटी को ये 5 बातें गांठ बांधकर समझा दें
अब मां-बाप भी अपनी बेटियों की शादी ऐसे ही घर में कराना चाहते हैं, जहां वो खुलकर जी सके, नौकरी कर सके, मन के कपड़े पहन सके. ऐसे मां-बाप के लिए हमने कुछ ऐसी ही नसीहतें तैयार की हैं, जिन्हें विदाई के वक्त वह अपनी बेटियों को दे सकते हैं-
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Updated: July 14, 2019, 4:23 PM IST
'ससुराल से कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए. सास-ससुर का ख्याल रखना. लाज-शर्म ही औरत का गहना है. ससुराल ही तुम्हारा अपना घर है. अब तुम परायी हो गई. अपने मां-बाप से भी ज्यादा अपने सास-ससुर की सेवा करना. कम बोलना, सुबह जल्दी उठ जाना. समय पर सारे काम खत्म कर लेना'.

एक जमाना था जब मां-बाप अपनी बेटी की विदाई के वक्त ये सारी बातें उसके साड़ी के पल्लू के किनारे वाले हिस्से में गांठ बांध देते थे.



लेकिन धीरे-दीरे ही सही पर वो पुराना वाला जमाना ढ़ल रहा है. लड़कियां आत्मनिर्भर बन रही हैं. अब जीवनयापन करने के लिए उन्हें घुट-घुटकर जीने को मजबूर नहीं होना पड़ता. माता-पिता भी अपनी बेटियों की शादी ऐसे ही घर में कराना चाहते हैं, जहां वो खुलकर जी सके, नौकरी कर सके, मन के कपड़े पहन सके. ऐसे मां-बाप के लिए हमने कुछ ऐसी ही नसीहतें तैयार की हैं, जिन्हें विदाई के वक्त वह अपनी बेटियों को दे सकते हैं-

1. पहले के मां-बाप- कम बोलना, सास से जुबान मत लड़ाना, शर्म लिहाज ही औरत का गहना है

अब- सनद रहे! तुम्हारा स्वाभिमान ही तुम्हारा गहना है.

2. पहले के मां-बाप- शादी के बाद समझौता करना ही पड़ता है, झुकने से कोई छोटा नहीं हो जाता.

अब- हर बार बलिदान देने की जरूरत नहीं है. परिस्थितियों से लड़ना सीखो, उनसे हार मानकर पीछे हटना नहीं.
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3. पहले के मां-बाप- पति-पत्नी के बीच तो खट-पट होते रहती है. गुस्से में हाथ उठा दिया होगा, प्यार भी तो तुम्हीं से करता है,आखिरकार वही तुम्हारा पति है.

अब- शादी में एक दूसरे पर हाथ उठाने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए. अगर तुम्हारे आत्म सम्मान को लगातार चोट पहुंचाया जाए, सीधे हमें बताओ. इसी दिन के लिए थोड़े ही पढ़ाया था!

4. पहले के मां-बाप- अब तो तुम परायी हो गई, वही तुम्हारा घर है.
अब- ये घर उतना ही तुम्हारा है, जितना तुम्हारे भाई का. कोई भी दिक्कत हो, अपने घर चली आना.

5. पहले के मां-बाप- पढ़ा तो दिया लेकिन अब ससुरालवाले कहेंगे नौकरी नहीं करने तो कैसे करोगी, घर पर ही रहना पड़ेगा.

अब- घर पर बैठकर चौका-बर्तन करने के लिए इतना पढ़ाया था क्या? किसी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है.
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