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शादी से क्यों कन्नी काट रही हैं सऊदी लड़कियां!

शादी से क्यों कन्नी काट रही हैं सऊदी लड़कियां!

 एक वक्त था जब लड़कियों की दुनिया शादी और शौहर के साथ जिंदगी बिताने के ख्वाबों में जाकर खत्म हो जाया करती थी। लेकिन यह वक्त दूसरा है और लड़कियों के ख्वाब दूसरे।

एक वक्त था जब लड़कियों की दुनिया शादी और शौहर के साथ जिंदगी बिताने के ख्वाबों में जाकर खत्म हो जाया करती थी। लेकिन यह वक्त दूसरा है और लड़कियों के ख्वाब दूसरे।

एक वक्त था जब लड़कियों की दुनिया शादी और शौहर के साथ जिंदगी बिताने के ख्वाबों में जाकर खत्म हो जाया करती थी। लेकिन यह वक्त दूसरा है और लड़कियों के ख्वाब दूसरे।

    जेद्दाह। > एक वक्त था जब लड़कियों की दुनिया शादी और शौहर के साथ जिंदगी बिताने के ख्वाबों में जाकर खत्म हो जाया करती थी। लेकिन यह वक्त दूसरा है और लड़कियों के ख्वाब दूसरे। इन दिनों दुनिया में अविवाहित महिलाओं की तादाद तेजी से बढ़ी है और चौंकाने वाली बात यह है कि अविवा‍हित महिलाओं की संख्या के मामले में सऊदी अरब दूसरे पायदान पर है। एक तरह से सऊदी अरब दुनिया में अविवाहित महिलाओं और पुरुषों का गढ़ बनता जा रहा है। सऊदी समाज में हो रहे इस बदलाव को समाजशास्त्री और मनोवैज्ञानिक दोनों ही अलग-अलग निगाह से देखते हैं।

    संख्या पर सरकारी आंकड़ेः सऊदी सरकार के विवाहित महिलाओं और पुरुषों की संख्या को लेकर जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 1995 के बाद से देश में अविवाहित महिलाओं की संख्या में तकरीबन 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। ये पिछले दो दशकों में सर्वाधिक है। विशेषज्ञों की मानें तो अविवाहित महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी के मामले में अन्य् देशों की तुलना में सऊदी अरब दूसरे नंबर पर है। उनके मुताबिक अकेले रहने वाली स्त्रियों की संख्या में अब तक की यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।

    क्यों हो रहा है यह?: सऊदी समाज में लगातार बढ़ती अविवाहित महिलाओं की संख्या के पीछे समाजशास्त्रियों की अपनी-अपनी राय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लड़कियां शादी का फैसला मानसिक और शारीरिक परिपक्वता के आधार पर करने लगी हैं, जब तक वे खुद को शादी के लिए इस स्तर पर तैयार नहीं पातीं तब तक वह शादी जैसे बंधन में बंधने से हिचकने लगी हैं। सोसायटी फॉर फैमिली प्रोटेक्शन की सामाजिक कार्यकर्ता आइशा हैटन मानती हैं कि युवाओं को उनमें भी खासकर स्त्रियों को लगता है‍ कि शादी का बंधन उनकी सामाजिक आजादी को छीन सकता है, इसलिए वे आज के बदलते दौर में अपनी सामाजिक स्वातंत्रता को खोना नहीं चाहतीं।

    महंगाई भी बनी वजह: अविवाहित महिलाओं की बढ़ती संख्या के पीछे लगातार बढ़ती महंगाई, नौकरी की अस्थि‍रता और आज की चमक-धमक वाली लाइफ स्टाइल भी है, जिसे शादी करके और परिवार बढ़ाकर मेंटेन करना बहुत मुश्किल है। यह आर्थिक जिम्मेदारी को बढ़ाने वाला काम है। अर्थशास्त्री सलेम बजाज्ह कहते हैं कि कई युवक और युवतियां मकानों की बढ़ती कीमतों, घरों के बढ़ते किराये और महंगाई के चलते शादी की जिम्मेदारी उठाने से बचते हैं। वे अकेले रहकर ज्यादा पैसा जोड़ना चाहते हैं और इस तरह शादी की उम्र बीतती रहती है।

    सामाजिक कारण भी हैं इसके पीछे: सामाजिक कार्यकर्ता आइशा हैटन मानती हैं कि महिलाओं के शादी देर से करने के पीछे मुख्य वजहों में से एक सामाजिक स्थितियां भी हैं। उनके मुताबिक शादी की महंगी आलीशान पार्टियां, शादी के बाद बढ़ने वाला खर्चा और करियर को बिना किसी रोक-टोक को आगे ले जाने की इच्छा ने लड़कियों में शादी के प्रति गंभीरता को खत्मस कर दिया है।

    क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक: किंग सऊदी वि‍श्वविद्यालय में साइकोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खालिद बिन उमर अल रादिन सऊदी समाज में महिलाओं के भीतर शादी के प्रति इस नीरसता के पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारणों को गिनाते हैं। वे कहते हैं कि आज के हाईटेक होते समाज में इस तरह की मानसिकता स्त्रीक और पुरुषों दोनों में ही सामान्य है। वे भी इसे एक तरह की सामाजिक सुरक्षा से जोड़ते हैं। वे कहते हैं नौकरी की अस्थिरता, आर्थिक असुरक्षा, धार्मिक विश्वासों की कमजोरी के साथ युवाओं की मानसिक अवस्था में अस्थिरता के कारण ही समाज में अवि‍वाहित महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।


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