Home /News /lifestyle /

Republic Day 2022 Poem: पढ़ें, गणतंत्र दिवस पर लिखी गई महावीर प्रसाद 'मधुप' की ये कविता

Republic Day 2022 Poem: पढ़ें, गणतंत्र दिवस पर लिखी गई महावीर प्रसाद 'मधुप' की ये कविता

भारत 26 जनवरी 2022 को अपना 73वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. (Image- Shutterstock)

भारत 26 जनवरी 2022 को अपना 73वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. (Image- Shutterstock)

Republic Day 2022 Poem: हर भारतीय 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस पर गर्व महसूस करता है. लोग इस खास दिन पर खुशी से सभी को बधाई देते हैं. इस दिन राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड (Republic Day Parade) आयोजित की जाती है.

    गणतंत्र दिवस 2022 कविता (Republic Day 2022 Poem): भारत 26 जनवरी 2022 को अपना 73वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. देश में हर साल इस दिन राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड (Republic Day Parade) आयोजित की जाती है. गणतंत्र दिवस समारोह (Republic Day Parade) के दौरान विभिन्न राज्यों की झांकियों को शामिल किया जाता है.

    इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए कोरोना प्रोटोकॉल (COVID19 Protocol) का पालन करना, मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा. इस खास मौके पर पढ़ें गणतंत्र दिवस पर लिखी गई महावीर प्रसाद ‘मधुप’ की कविता

    गणतंत्र दिवस स्पेशल कविता (Republic Day Special Poem)

    प्राची से झाँक रही ऊषा,
    कुंकुम-केशर का थाल लिये।
    हैं सजी खड़ी विटपावलियाँ,
    सुरभित सुमनों की माल लिये॥

    गंगा-यमुना की लहरों में,
    है स्वागत का संगीत नया।
    गूँजा विहगों के कण्ठों में,
    है स्वतन्त्रता का गीत नया॥

    प्रहरी नगराज विहँसता है,
    गौरव से उन्नत भाल किये।
    फहराता दिव्य तिरंगा है,
    आदर्श विजय-सन्देश लिये॥

    गणतन्त्र-आगमन में सबने,
    मिल कर स्वागत की ठानी है।
    जड़-चेतन की क्या कहें स्वयं,
    कर रही प्रकृति अगवानी है॥

    यह भी पढ़ें- Republic Day 2022: दिल्ली के राजपथ पर दिखेगा बिहार के ‘चार्ली चैपलिन’ का जलवा, जानें खासियत

    कितने कष्टों के बाद हमें,
    यह आज़ादी का हर्ष मिला।
    सदियों से पिछड़े भारत को,
    अपना खोया उत्कर्ष मिला॥

    धरती अपनी नभ है अपना,
    अब औरों का अधिकार नहीं।
    परतन्त्र बता कर अपमानित,
    कर सकता अब संसार नहीं॥

    क्या दिये असंख्यों ही हमने,
    इसके हित हैं बलिदान नहीं।
    फिर अपनी प्यारी सत्ता पर,
    क्यों हो हमको अभिमान नहीं॥

    पर आज़ादी पाने से ही,
    बन गया हमारा काम नहीं।
    निज कर्त्तव्यों को भूल अभी,
    हम ले सकते विश्राम नहीं॥

    यह भी पढ़ें- Republic Day Parade: 75 सालों में पहली बार आधा घंटे देर से शुरू होगी गणतंत्र दिवस की परेड, जानें वजह

    प्राणों के बदले मिली जो कि,
    करना है उसका त्राण हमें।
    जर्जरित राष्ट्र का मिल कर फिर,
    करना है नव-निर्माण हमें॥

    इसलिये देश के नवयुवको!
    आओ कुछ कर दिखलायें हम।
    जो पंथ अभी अवशिष्ट उसी,
    पर आगे पैर बढ़ायें हम॥

    भुजबल के विपुल परिश्रम से,
    निज देश-दीनता दूर करें।
    उपजा अवनी से रत्न-राशि,
    फिर रिक्त-कोष भरपूर करें॥

    दें तोड़ विषमता के बन्धन,
    मुखरित समता का राग रहे।
    मानव-मानव में भेद नहीं,
    सबका सबसे अनुराग रहे,

    कोई न बड़ा-छोटा जग में,
    सबको अधिकार समान मिले।
    सबको मानवता के नाते,
    जगतीतल में सम्मान मिले॥

    विज्ञान-कला कौशल का हम,
    सब मिलकर पूर्ण विकास करें।
    हो दूर अविद्या-अन्धकार,
    विद्या का प्रबल प्रकाश करें॥

    हर घड़ी ध्यान बस रहे यही,
    अधरों पर भी यह गान रहे।
    जय रहे सदा भारत माँ की,
    दुनिया में ऊँची शान रहे॥ (साभार- कविता कोश)

    Tags: Lifestyle, Republic day, Republic Day Celebration

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर