रिसर्च में खुलासा- प्रेगनेंसी के दौरान मां मोटी है तो बच्चे का दिमागी विकास हो सकता है बाधित

रिसर्च में खुलासा- प्रेगनेंसी के दौरान मां मोटी है तो बच्चे का दिमागी विकास हो सकता है बाधित
मोटापा कई तरह की बीमारियों का घर है.

महिला (Women) जितनी भारी होती हैं उनको गर्व धारण करने में उतनी अधिक समस्याएं होती हैं. मोटी महिलाओं में प्रेग्नेंसी (Pregnancy) के दौरान हाई बीएमआई से प्रेगनेंसी कॉम्प्लिकेशन्स जैसे- गर्भपात (Abortion), जेस्टेशनल डायबिटीज या जन्म के समय बच्चे की मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2020, 7:20 PM IST
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मोटापा (Obesity) शरीर के लिए हमेशा नुकसानदायक होता है. इससे इंसान को कई तरह की बीमारियां (Diseases) होने का खतरा रहता है. मोटापे के कारण डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) और स्ट्रोक जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. अधिक वजन वाली महिलाओं को दूसरी महिलाओं की तुलना में गर्भधारण करने में बहुत अधिक समस्या आती है. इसी तरह प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीएमआई से प्रेगनेंसी कॉम्प्लिकेशन्स जैसे- गर्भपात, जेस्टेशनल डायबिटीज या जन्म के समय बच्चे की मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है.

द हेल्थ साइट की खबर के अनुसार एक शोध (Research) में पता चला है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला मोटी होती है तो उसको और उसके बच्चे को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं. जर्नल ऑफ चाइल्ड साइकोलॉजी (Journal of Child Psychology) और साइकाइट्री में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि गर्भावस्था के दौरान मोटापे से बच्चे के दिमाग के विकास पर असर पड़ता है.

मोटी महिलाओं के बच्चों का दिमाग कमज़ोर होता है ?
न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी में शोध करने वाली टीम ने एक रिसर्च में बताया कि हाई बॉडी मास इंडेक्स (मोटापे) का दिमाग के दोनों हिस्सों प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (prefrontal cortex) और एंटीरियर इंसुला (anterior insula) पर क्या असर पड़ता है. इस शोध में कुछ पुरानी स्टडी में मोटापे और ब्रेन डेवलपमेंट के बीच लिंक होने की बात कही गई, लेकिन, उसमें फोकस जन्म के बाद कॉग्निटिव फंक्शन पर रहा. नई स्टडी में बताया गया है कि भ्रूण के दिमाग में शुरुआती प्रभाव गर्भ में ही दिखाई देने लगता है, जो प्रेगनेंसी के 6 महीने के बाद दिख जाता है.
इस शोध में क्या काम किया गया


इस नए शोध में भ्रूण के दिमाग की 197 मेटाबॉलिकली एक्टिव नर्व सेल्स की जांच की गई, जिसके लिए 109 गर्भवती महिलाओं (6-9 महीने की गर्भवती) की मदद ली गई. शोध में शामिल इन महिलाओं का बीएमआई 25 से 47 तक था. इस शोध के दौरान एमआरआई इमेजिंग तकनीक की मदद से बच्चों के दिमाग की जांच की गई. इस स्टडी में बच्चे के दिमाग के दोनों हिस्सों और मां के बीएमआई के बीच स्ट्रॉन्ग कनेक्शन्स पाए गए हैं. इस आधार पर बताया गया कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के मोटापे का असर बच्चे के दिमाग में पड़ता है.
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