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पुरुषों की यूरोलॉजिकल हेल्थ को बूस्ट करती है प्लांट बेस्ड डाइट

स्टडी में यह बात सामने आई है कि प्लांट बेस्ड डाइट पुरुषों में यूरोलॉजिकल समस्याओं को कम करती है. (Image:shutterstock.com)

स्टडी में यह बात सामने आई है कि प्लांट बेस्ड डाइट पुरुषों में यूरोलॉजिकल समस्याओं को कम करती है. (Image:shutterstock.com)

Plant based diet for urological problems: स्टडी में पाया गया कि पौधों से प्राप्त फूड का ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या का जोखिम कम है.

  • News18Hindi
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    Plant based diet for urological problems: पुरुषों में यूरोलॉजिकल समस्याएं यानी पेशाब से संबंधित समस्याएं ज्यादा होती हैं. आमतौर पर 50 या 60 की उम्र के बाद पुरुषों में यूरोलॉजिकल समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती है. हालांकि अधिकांश बुजुर्ग इन समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, नतीजा उन्हें कई यूरोलॉजिकल बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए बेहतर यही है कि शुरू से ही अपनी डाइट पर ध्यान दिया जाए. मेडिकल डायलॉग वेबसाइट के मुताबिक हाल ही में जर्नल ऑफ यूरोलॉजी (Journal of Urology) में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लांट बेस्ड डाइट यानी पौंधों से प्राप्त फूड पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (प्रजनन अंग का शिथिल हो जाना) की समस्या को कम कर सकता है. पौंधों से प्राप्त फूड पुरुषों की यूरोलॉजिकल हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद है.

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    20 से 70 साल के पुरुषों पर किया गया अध्ययन
    अमेरिका में शोधकर्ताओं ने इस बात की पड़ताल के लिए पुरुषों पर एक अध्यन किया जिसमें पाया गया कि पौंधों से प्राप्त फूड का सेवन करने वालों को इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या बहुत कम हुई. इस अध्ययन में 20 से 70 साल के पुरुषों को शामिल किया गया था. इन लोगों को कई सवाल के जवाब देने के लिए कहा गया. मसलन पेशाब करने में किस तरह की दिक्कत हुई, उसके परिवार में किसी को यूरॉलॉजिक प्रोब्लम है या नहीं, इरेक्टाइल डिसफंक्शन की कितनी शिकायतें हैं, प्रोस्टेट से संबंधित किस तरह की शिकायतें हैं, क्या प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करा रहे हैं, आदि. अध्ययन में 2549 पुरुषों को शामिल किया गया था.

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    28 प्रतिशत लोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या से परेशान
    अध्ययन में पाया गया कि 1085 लोगों को इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी कोई समस्या नहीं हुई जबकि 1464 व्यक्तियों को कभी-कभी इरेक्टाइल डिसफंक्शन संबंधी परेशानियां आईं. वहीं मध्य आय़ु वर्ग के 28.8 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिनमें इरेक्टाइल डिसफंक्शन की भारी समस्या थी. अध्यन में पाया गया कि जिन लोगों ने प्लांट बेस्ड डाइट का जितना ज्यादा इस्तेमाल किया, वे इरेक्टाइल डिसफंक्शन की परेशानी से उतने ही दूर रहे जबकि मांसाहारी फूड का सेवन करने वाले अधिकांश लोग इस बीमारी की चपेट में थे.

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