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तनाव के चलते बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण का खतरा- स्टडी

तनाव के चलते बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण का खतरा- स्टडी

स्टडी में पता चला कि पहले से परेशान लोगों को कोरना संक्रमण अधिक हुआ है.
 (Image: Shutterstock)

स्टडी में पता चला कि पहले से परेशान लोगों को कोरना संक्रमण अधिक हुआ है. (Image: Shutterstock)

Risk of corona infection may increase due to stress : एक नई स्टडी के मुताबिक जिन लोगों को वैश्विक महामारी के प्रारंभिक दौर में तनाव, चिंता और अवसाद का अनुभव हुआ, उनके लिए कोरोना संक्रमण बड़ा खतरा बन सकता है. इस स्टडी में बताया गया है कि कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में मानसिक परेशानी (mental trouble) का समाना करने का गहरा संबंध पाया गया है. रिसर्च में कहा गया है कि वैश्विक महामारी का संबंध मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी जुड़ा हुआ है. स्टडी में दावा किया गया है कि इस बीमारी की गंभीरता मानसिक स्थिति को भी दर्शाती है.

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Risk of corona infection may increase due to stress : एक नई स्टडी के मुताबिक जिन लोगों को वैश्विक महामारी के प्रारंभिक दौर में तनाव, चिंता और अवसाद का अनुभव हुआ, उनके लिए कोरोना संक्रमण बड़ा खतरा बन सकता है. यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम (University of Nottingham) के स्कूल ऑफ मेडिसिन (School of Medicine) की प्रोफेसर कविता वेधरा (Professor Kavita Vedhara) के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में किंग्स कॉलेज लंदन (King’s College London) और न्यूजीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी (University of Auckland) के रिसर्चर्स ने भी सहयोग किया.

इस स्टडी में बताया गया है कि कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में मानसिक परेशानी (mental problem) का समाना करने का गहरा संबंध पाया गया है. रिसर्च में कहा गया है कि वैश्विक महामारी का संबंध मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी जुड़ा हुआ है. स्टडी में दावा किया गया है कि इस बीमारी की गंभीरता मानसिक स्थिति को भी दर्शाती है. इस स्टडी का निष्कर्ष ऐनल्ज ऑफ बिहेव्यरल मेडिसिन (Annals of Behavioral Medicine) जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

क्या कहते हैं जानकार
प्रोफेसर कविता वेधरा (Professor Kavita Vedhara) के अनुसार, जनस्वास्थ्य नीतियां बनाते हुए ये ध्यान रखने की जरूरत है कि हमारे समाज के ज्यादा परेशान लोगों के लिए कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा रहता है. पिछली कुछ स्टडीज में भी ये बात सामने आई है कि तनाव जैसे मनोवैज्ञानिक कारकों का श्वसन संबंधी संक्रामक समर्थन न पाने वाले लोगों में तनाव अधिक होने से इस बीमारी के लक्षण गंभीर हो जाते हैं. उनका कहना है कि हमारा डाटा बताता है कि बढ़ा हुआ तनाव, चिंता और अवसाद न केवल महामारी के साथ जीने के परिणाम हैं, बल्कि ऐसे कारक भी हो सकते हैं जो हमारे सार्स-कोव-2 (SARS-CoV-2) होने के जोखिम को भी बढ़ाते हैं.

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किंग्स कॉलेज लंदन में संज्ञानात्मक व्यवहार मनोचिकित्सा (Cognitive Behavioural Psychotherapy) की प्रोफेसर ट्रुडी चेल्डर (Professor Trudie Chalder) का कहना है, “पिछली स्टडी ने संकट और वायरल संक्रमण के विकास के बीच एक स्पष्ट संबंध दिखाया है जो एक भेद्यता (vulnerability) का संकेत देता है. हमने हमारी स्टडी के दौरान ये पाया कि परेशानी सेल्फ रिपोर्टेड कोविड-19 इंफेक्शन से जुड़ी थी और अगला कदम ये जांचना है कि क्या ये जुड़ाव कन्फर्म्ड इंफेक्शन वाले लोगों में पाया जाता है ”

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स्टडी में क्या निकला
न्यूजीलैंड की आकलैंड यूनिवर्सिटी (University of Auckland)  में 1100 लोगों पर की गई स्टडी में पता चला कि पहले से परेशान लोगों को कोरना संक्रमण अधिक हुआ है. इसके अधार पर कहा जा सकता है कि महामारी की रोकथाम में बनने वाली रणनीतियों में इन बिंदुओं को शामिल कर उसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है.

Tags: Coronavirus, Health, Health News

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