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सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना, पढ़ें मशहूर कवि पाश की कविताएं

News18Hindi
Updated: April 6, 2020, 9:06 AM IST
सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना, पढ़ें मशहूर कवि पाश की कविताएं
कवि पाश की कविताएं

कवि पाश की कविता- सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए, और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए

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सबसे खतरनाक


मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती



बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता


कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना
मुट्ठियां भींचकर बस वक्‍़त निकाल लेना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नज़र में रुकी होती है

सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्‍बत से चूमना भूल जाती है
और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो गीत होता है
जो मरसिए की तरह पढ़ा जाता है
आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर
गुंडों की तरह अकड़ता है
सबसे ख़तरनाक वो चांद होता है
जो हर हत्‍याकांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आंखों में
मिर्चों की तरह नहीं पड़ता

सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए
और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती .

तुम्हारे बग़ैर मैं होता ही नहीं


तुम्हारे बग़ैर मैं बहुत खचाखच रहता हूं
यह दुनिया सारी धक्कम-पेल सहित
बेघर पाश की दहलीजें लांघ कर आती-जाती है
तुम्हारे बग़ैर मैं पूरे का पूरा तूफ़ान होता हूं
ज्वार-भाटा और भूकम्प होता हूं
तुम्हारे बग़ैर
मुझे रोज़ मिलने आते हैं आईंस्टाइन और लेनिन
मेरे साथ बहुत बातें करते हैं
जिनमें तुम्हारा बिलकुल ही ज़िक्र नहीं होता
मसलन: समय एक ऐसा परिंदा है
जो गांव और तहसील के बीच उड़ता रहता है
और कभी नहीं थकता
सितारे ज़ुल्फ़ों में गुंथे जाते
या जुल्फ़ें सितारों में-एक ही बात है
मसलन: आदमी का एक और नाम मेनशेविक है
और आदमी की असलियत हर सांस के बीच को खोजना है
लेकिन हाय-हाय!
बीच का रास्ता कहीं नहीं होता
वैसे इन सारी बातों से तुम्हारा ज़िक्र ग़ायब रहता है .

तुम्हारे बग़ैर
मेरे पर्स में हमेशा ही हिटलर का चित्र परेड करता है
उस चित्र की पृष्ठभूमि में
अपने गांव की पूरे वीराने और बंजर की पटवार होती है
जिसमें मेरे द्वारा निक्की के ब्याह में गिरवी रखी ज़मीन के सिवा
बची ज़मीन भी सिर्फ़ जर्मनों के लिए ही होती है .

तुम्हारे बग़ैर, मैं सिद्धार्थ नहीं, बुद्ध होता हूं
और अपना राहुल
जिसे कभी जन्म नहीं देना
कपिलवस्तु का उत्तराधिकारी नहीं
एक भिक्षु होता है .

तुम्हारे बग़ैर मेरे घर का फ़र्श सेज नहीं
ईंटों का एक समाज होता है
तुम्हारे बग़ैर सरपंच और उसके गुर्गे
हमारी गुप्त डाक के भेदिए नहीं
श्रीमान बी०डी०ओ० के कर्मचारी होते हैं
तुम्हारे बग़ैर अवतार सिंह संधू महज पाश
और पाश के सिवाय कुछ नहीं होता

तुम्हारे बग़ैर धरती का गुरुत्व
भुगत रही दुनिया की तक़दीर होती है
या मेरे ज़िस्म को खरोंचकर गुज़रते अ-हादसे
मेरे भविष्य होते हैं
लेकिन किंदर ! जलता जीवन माथे लगता है
तुम्हारे बग़ैर मैं होता ही नहीं .

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First published: April 6, 2020, 8:24 AM IST
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