सैनेटरी पैड ने बदल लिया अपना लुक, पीरियड्स में अब इन चीजों का करें इस्तेमाल

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Updated: September 11, 2019, 3:32 PM IST
सैनेटरी पैड ने बदल लिया अपना लुक, पीरियड्स में अब इन चीजों का करें इस्तेमाल
मार्केट में मिलने वाले सिंथेटिक फाइबर जैसे प्लास्टिक से बनने वाले पैड्स से जमा होने वाला कचरा पर्यावरण को बहुत दूषित करता है. बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स केले के पेड़ के रेशे से बनाए जाते हैं.

मार्केट में मिलने वाले सिंथेटिक फाइबर जैसे प्लास्टिक से बनने वाले पैड्स से जमा होने वाला कचरा पर्यावरण को बहुत दूषित करता है. बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स केले के पेड़ के रेशे से बनाए जाते हैं.

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  • Last Updated: September 11, 2019, 3:32 PM IST
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एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि फेसबुक ट्रैकर एप्लिकेशन फेसबुक से आपका सारा सेंसिटिव डेटा शेयर कर रहा है. प्राइवेसी इंटरनैशनल के हाल में की गई एक रिसर्च में पाया गया है कि महिलाओं के पीरियड को ट्रैक करने वाले दो सबसे पॉप्युलर एप Maya और MIA ने फेसबुक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट के ज़रिए थर्ड पार्टी एप्स और वेबसाइट्स के साथ अपने यूज़र्स की निजी जानकारियों को शेयर किया है.

ये पीरियड ट्रैकर एप्स महिलाओं को उनके Period साइकल ट्रैक करने में मदद करती है. इन एप्स को महिलाएं गर्भधारण करने का सही समय जानने के लिए भी इस्तेमाल करती हैं. अब आपकी निजी जिंदगी का पीरियड भी प्राइवेट नहीं रहा. इस टेक्नोलॉजी के युग में बहुत कुछ बदल गया है. पीरियड्स के
समय में इस्तेमाल होने वाली नैपकिन्स ने भी अपनी वेशभूषा बदल ली है. आइए आपको बताते हैं कि सैनेटरी नैपकिन्स के अलावा पीरियड्स के दिनों में आप और किन आधुनिक चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं.

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बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स (Biodegradable Napkins)

बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स इस्तेमाल करने के बाद बैक्टिरिया या जीव जंतु से नष्ट किए जा सकते हैं. दरअसल मार्केट में मिलने वाले सिंथेटिक फाइबर जैसे प्लास्टिक से बनने वाले पैड्स से जमा होने वाला कचरा पर्यावरण को बहुत दूषित करता है. बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स केले के पेड़ के रेशे (Banana Fiber) से बनाए जाते हैं. ये आसानी से इस्तेमाल के बाद नष्ट हो जाते हैं. सबसे खास बात नष्ट होते ही ये खाद और बायोगैस की तरह उपयोग में आ जाते हैं. इससे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा नहीं बढ़ती. वहीं, इससे उलट बाज़ार से महंगे दामों में मिलने वाले पैड्स प्लास्टिक फाइबर से बने होते हैं जो खुद नष्ट नहीं होते और अगर इन्हें जलाया जाए तो इनमें मौजूद कच्चा तेल हवा में कार्बन डाइऑक्साइड फैलता है, जिससे वायु दूषित होती है. वहीं बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स इस्तेमाल करने में भी बहुत मुलायम होते हैं और इनके इस्तेमाल से कैंसर और इंफेक्शन होने का खतरा भी नहीं होता.

टैम्पोन (Tampon)
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पीरियड्स से निपटने का एक दूसरा तरीका टैम्पोन (Tampon) है. यह पीरियड से सुरक्षा देने का एक तरीका है जो कपास या रेयान से बना होता है और जिसे मासिक स्राव को सोखने के लिए योनि के अंदर डाला जाता है. यह टैम्पोन योनि के अंदर सुरक्षित तरीके से फिट होता है जहां बहुत कम संवेदी तंत्रिकाएं होती हैं. टैम्पोन योनि की दीवारों में मासिक स्राव को सोखते हुए फूल जाता है. इस बात की चिंता बिल्कुल न करें कि टैम्पोन आपके शरीर में अंदर कहीं खो जाएगा. दरअसल गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्सस) का मुंह इतना छोटा होता है कि टैम्पोन इसके अंदर घुस नहीं सकता. टैम्पोन के एक सिरे पर एक छोटा धागा होता है ताकि उसे आसानी से बाहर निकाला जा सके. टैम्पोन योनि के अंदर ही खून को अवशोषित कर लेता है इसलिए कपड़े में पीरियड का खून लगने का डर नहीं रहता है.

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मेंस्ट्रुअल कप (Menstrual Cup)

मेंस्ट्रुअल कप (Menstrual Cup) का अर्थ है पीरियड्स के समय उपयोग में लाया जाने वाला कप. यह पैड की अपेक्षा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के लिए अधिक फायदेमंद होता है. मेडिकल उपकरणों से निर्मित होने के कारण इनके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते. यह कप थर्माप्लास्टिक एलेस्टोमेर, सिलिकॉन या लेटेक्स से निर्मित होता है. यह उसी मेडिकल सामग्री से बना होता है जिससे शिशु द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाली दूध की बोतल बनाई जाती है. इसे मासिक धर्म के समय योनि में पहनकर रक्त को इकट्ठा करने में काम लिया जाता है. यह कप एक दम सही साइज का होना चाहिए अन्यथा इसमें रिसाव की समस्या बन सकती है. इसके अतिरिक्त इसे सही प्रकार से योनि में फिट किया जाना चाहिए. इसे 4 घंटे पहनने के बाद पुनः धोकर उपयोग में लाया जाना चाहिए अर्थात एक दिन में कम से कम तीन से चार बार इसे अवश्य धोएं. ध्यान रहे हर महीने पीरियड्स के समय इसे उपयोग में लेने से पहले इसे अच्छे से उबाल कर साफ कर लें. इससे इसके अंदर गंदगी एवं जीवाणु नहीं रहेंगे. इसे पहनने से पहले किसी भी गंदे स्थान के संपर्क में न आने दें अन्यथा इसके प्रयोग से योनि में जलन हो सकती है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: September 11, 2019, 3:32 PM IST
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