आज है संतान सांतें यानी 'संतान सप्तमी', जानिए पूजन विधि और व्रत कथा

यह व्रत पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को किया जाता है.

News18Hindi
Updated: September 16, 2018, 8:27 AM IST
आज है संतान सांतें यानी 'संतान सप्तमी', जानिए पूजन विधि और व्रत कथा
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: September 16, 2018, 8:27 AM IST
संतान सप्तमी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि के दिन किया जाता है. संतान सप्तमी व्रत इस वर्ष 16 सितंबर 2018, रविवार को किया जाएगा. यह व्रत विशेष रुप से संतान प्राप्ति, संतान रक्षा और संतान की उन्नति के लिये किया जाता है. इस व्रत में भगवान शिव एवं माता गौरी की पूजा का विधान है. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी का व्रत विशेष महत्व रखता है.

व्रत विधि
सप्तमी का व्रत मां अपनी संतान के लिये करती हैं, इस व्रत को करने वाली मां को प्रात:काल में स्नान करें. नित्यक्रम क्रियाओं से निवृ्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद प्रात काल में श्री विष्णु और भगवान शिव की पूजा अर्चना कर सप्तमी व्रत का संकल्प लें.

निराहार व्रत कर, दोपहर को चौक पूरकर चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेध, सुपारी तथा नारियल आदि से फिर से शिव- पार्वती की पूजा करनी चाहिए.सप्तमी तिथि के व्रत में नैवेद्ध के रुप में खीर-पूरी तथा गुड के पुए बनाये जाते है. संतान की रक्षा की कामना करते हुए भगवान भोलेनाथ को कलावा अर्पित किया जाता है तथा बाद में इसे स्वयं धारण कर इस व्रत की कथा सुननी चाहिए.

व्रत पूजन
यह व्रत पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को किया जाता है. इस व्रत का विधान दोपहर तक रहता है. इस दिन जाम्बवती के साथ श्यामसुंदर तथा उनके बच्चे साम्ब की पूजा भी की जाती है. माताएँ पार्वती का पूजन करके पुत्र प्राप्ति तथा उसके अभ्युदय का वरदान माँगती हैं. इस व्रत को 'मुक्ताभरण' भी कहते हैं.

कैसे करें व्रत
प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें.
दोपहर को चौक पूर कर चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, सुपारी तथा नारियल आदि से शिव-पार्वती की पूजा करें.
इस दिन नैवेद्य भोग के लिए खीर-पूरी तथा गुड़ के पुए रखें.
रक्षा के लिए शिवजी को डोरा भी अर्पित करें.
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