Home /News /lifestyle /

savitribai phule death anniversary punyatithi marathi poems shudron ka dukh shreshtha dhan in hindi jyotiba phule wife anjsh

Savitribai Phule Death Anniversary: पढ़ें, सावित्रीबाई फुले की कविताएं- 'शूद्रों का दुख' और 'श्रेष्ठ धन'

साल 1897 में सावित्रीबाई फुले प्लेग-पीड़ितों की मसीहा बनीं.  (Image-Shutterstock)

साल 1897 में सावित्रीबाई फुले प्लेग-पीड़ितों की मसीहा बनीं. (Image-Shutterstock)

Savitribai Phule Death Anniversary: सावित्रीबाई फुले ने बाल-विवाह, सती प्रथा जैसी बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई थी और महज 3 साल के अंदर लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले थे. साल 1897 में 10 मार्च को सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. उनकी पुण्यतिथि (Death anniversary) पर पढ़ें उनकी लिखी कविताएं- 'शूद्रों का दुख' और 'श्रेष्ठ धन'

अधिक पढ़ें ...

Savitribai Phule Death Anniversary: आज महिलाएं हर सेक्टर में आगे हैं. सफलता के मार्ग में लगातार आगे बढ़ रही हैं लेकिन उनके यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं रही. इसी समाज में कई ऐसी कुप्रथाएं थीं जिन्होंने सदियों तक लड़कियों और महिलाओं को बेड़ियों में बांध कर रखा लेकिन फिर 18वीं सदी में एक क्रांति आई. सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) के नाम से आई इस क्रांति ने बाल-विवाह, सती प्रथा, जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई.


सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1931 को महाराष्ट्र (Maharashtra) के सतारा में स्थित नायगांव में हुआ था. आपको यह जानकार हैरानी और सावित्रीबाई पर गर्व होगा कि उन्होंने साल 1848 से लेकर 1852 के बीच लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले थे. महज 17 साल की उम्र में ही वह अध्यापिका और प्रधानाचार्या बन गईं थीं. कम उम्र में उनके इस ऐतिहासिक कदम में उनका साथ उनके पति व सामाजिक क्रांतिकारी नेता ज्योतिबा फुले ने दिया था.

आज है उनकी पुण्यतिथि

साल 1897 में सावित्रीबाई फुले प्लेग-पीड़ितों की मसीहा बनीं. जिसके बाद वह खुद भी प्लेग पीड़ित हो गईं. इसी साल 10 मार्च को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. आज भारत की पहली अध्यापिका और सामाजिक क्रांति की अगुआ सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनकी लिखी चुनिंदा कविताएं. आपको बता दें कि उनकी मूल कविताएं मराठी में हैं. यहां आप उनकी रचनाओं का अनुवाद पढ़ेंगे. इसके साथ ही आपको यह जानकारी भी दे दें कि कविताओं के अलावा उन्होंने पत्र, भाषण, लेख और पुस्तकें आदि भी लिखी हैं. उन्होंने 2 काव्य संग्रहों की रचना की थी.

पढ़ें, सावित्रीबाई फुले की रचनाएं

शूद्रों का दुख

दो हजार वर्ष पुराना
शूद्रों से जुड़ा एक दुख।
ब्राह्मणों की सेवा की आज्ञा देकर
झूठे-मक्कार स्वयं घोषित
धरती के देवताओं ने उसे पछाड़ा।

शुद्रों की बदहाली, लाचारी देखकर
हाय उद्गार होठों से फूट पड़े
मुक्ति का सुलभ उपाय, राह कौन सी
सोच-विचार के मति रिक्त-खाली हुई।

यह भी पढ़ें- जानिए, सावित्री बाई फुले को, जिन्होंने लड़कियों के लिए एक के बाद एक 18 स्कूल खोल डाले

शूद्रों के लिए कहने योग्य
है शिक्षा की राह प्रकाशित
शिक्षा प्राप्ति से मिले इंसानियत
पशुता कभी आती नहीं निकट।

श्रेष्ठ धन

सुबह-सवेरे उठे जो बच्चा,
शौच आदि मुखमार्जन करे
हो जाए नहा-धोकर तैयार
और करे माता-पिता को अभिवादन।

स्मरण करके गुरू का
मन लगाकर करे पढ़ाई
लाभकारी है दिन जीवन के व्यर्थ ना गवाएं।

पॉडकास्ट सुनें- Savitribai Phule Poems Podcast: मराठी कवयित्री, समाजसुधारक व देश की पहली अध्यापिका सावित्रीबाई फुले की कविताएं

करे नित पढ़ाई ज्ञान पाने के लिए
विद्या को समझकर सर्वोच्च
लीजिए लाभ विद्या का
मन के एकाग्र करते हुए।

विद्या ही धन है
सभी धन-दौलत से सर्वश्रेष्ठ अच्छा
जिसके पास है ज्ञान का भण्डार
है वह ज्ञानी जनता की नजरों में सच्चा।(मूल कविताओं का अनुवाद- शेखर पवार और फ़ारूक शाह)

Tags: Lifestyle, Literature

विज्ञापन
विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर