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Valentine सेलिब्रेशन से पहले पार्टनर को भेजिए गालिब की शेर-ओ-शायरी

News18Hindi
Updated: February 14, 2020, 9:03 AM IST
Valentine सेलिब्रेशन से पहले पार्टनर को भेजिए गालिब की शेर-ओ-शायरी
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

तुमसे मैं जो अपनी तबाही का शिकवा कर रहा हूं, वो ठीक नहीं है. मेरी तबाही में मेरी तक़दीर का भी तो हाथ हो सकता है.

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  • Last Updated: February 14, 2020, 9:03 AM IST
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आज हवाओं में प्यार का एहसास, मोहब्बत, जुनून, इश्क जैसे घुल सा गया है. घुलेगा भी क्यों नहीं आज वैलेंटाइन डे (Valentine day) जो है. दो प्यार करने वालों के लिए ये दिन है ही इतना खास है जिसे शायद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

वैसे तो वैलेंटाइन सेलिब्रेशन के लिए लोग कई दिनों पहले से तैयारियां कर लेते हैं, लेकिन प्यार के सेलिब्रेशन से पहले पार्टनर को इम्प्रेस करना चाहते हैं, तो किसी और क्यों मिर्जा गालिब (Mirza Ghalib) को चुनिए. गालिब के हर शब्द में प्यार का वो एहसास है, जो रूह को छू जाता है. वैलेंटाइन डे (Valentine day) पर पेश है खास दिल से इजहार करने वालों के लिए मिर्जा गालिब की चुनिंदा शेरों-शायरी...

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

तुम से बेजा है मुझे अपनी तबाही का गिला
उसमें कुछ शाएबा-ए-ख़ूबिए-तक़दीर भी था

तुमसे मैं जो अपनी तबाही का शिकवा कर रहा हूं, वो ठीक नहीं है.
तुमसे मैं जो अपनी तबाही का शिकवा कर रहा हूं, वो ठीक नहीं है.
तुमसे मैं जो अपनी तबाही का शिकवा कर रहा हूं, वो ठीक नहीं है. मेरी तबाही में मेरी तक़दीर का भी तो हाथ हो सकता है.

आईना देख अपना सा मुंह ले के रह गए
साहब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूं ख़ून-ए-जिगर होते तक

 

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नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशां हो गईं

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

मैं क़ैद में हूं और यहां भी मुझे सिर्फ़ तेरी ज़ुल्फ़ें ही याद हैं.
मैं क़ैद में हूं और यहां भी मुझे सिर्फ़ तेरी ज़ुल्फ़ें ही याद हैं.


क़ासिद के आते -आते खत एक और लिख रखूं
मैं जानता हूं जो वो लिखेंगे जवाब में

 

 

मैं क़ैद में हूं और यहां भी मुझे सिर्फ़ तेरी ज़ुल्फ़ें ही याद हैं. ज़ंजीर हल्की है या भारी इस पर कोई ध्यान नहीं है. जब मैं क़ैद में नया नया आया था तब ज़रूर ये रंज था के ज़ंजीर की तकलीफ़ बहुत सख़्त होगी लेकिन अब मुझे सिर्फ़ तेरी ज़ुल्फ़ें ही याद रहती हैं.

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First published: February 14, 2020, 8:59 AM IST
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