पैरेंट्स को क्यों खरीदनी चाहिए सेकेंड हैंड चीजें, जानें ये 7 वजह

बच्चों के लिए नई चीजें खरीदने की जगह सेकेंड हैंड  चीजों को चुनें.

बच्चों के लिए नई चीजें खरीदने की जगह सेकेंड हैंड चीजों को चुनें.

Second Hand Shopping: एक पैरेंट होने के नाते आए दिन आपको बच्चों की नई-नई डिमांड सुनने को मिलती होंगी. ऐसे में अगर आप सेकेंड हैंड शॉपिंग (Second hand Shopping) करेंगे, तो ये फायदे का सौदा होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 1:09 PM IST
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एक जमाना था जब पड़ोसी के बड़े बच्चों (Children) के कपड़े या खिलौने अपने बच्चों के लिए इस्तेमाल करते हुए पैरेंट्स (Parents) को झिझक नहीं होती थी, लेकिन जमाने ने करवट ली, लाइफस्टाइल बदला और अब अपने बच्चों के लिए किसी से भी कोई सेकेंड हैंड चीज लेते या खरीदते वक्त पैरेंट्स सौ बार सोचते हैं, लेकिन यहां हम आपको ऐसी सात वजहें बताने जा रहे हैं कि आपको बच्चों के लिए सेकेंड हैंड शॉपिंग (Second hand Shopping) को क्यों तवज्जो देनी चाहिए.

किफायती और सस्ता विकल्पः  

अगर आपने लापरवाही का रवैया अपनाया तो चाहे आप एक बच्चे के पेरैंट्स हो या दो, उन्हें उनकी मनपंसद चीजें दिलाना आपको महंगा पड़ सकता है. इस पर पेरैंट्स होने के नाते आपको सावधानी से खर्च करने की जरूरत है. इस तरह से सेकेंडहैंड शॉपिंग आपके लिए किफायती और सस्ता विकल्प है. अगर आपका बजट टाइट है तो यह तरीका बेहतरीन है, क्योंकि इससे आप अपने बच्चों के लिए वो चीजें खरीद पाएंगे,जो आपके बजट के हिसाब से महंगी है. फिर चाहे वह नैपीज (Nappies) हो या महंगे खिलौनें.

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बड़े और पॉपुलर ब्रांड्स ले पाएंगे:  

बच्चों के लिए महंगे और नामी ब्रांड्स खरीदना चाहते है, लेकिन पैसों की तंगी से मन मसोस कर रह जाते हैं, तो सेकेंडहैंड शॉपिंग से आपके लिए ये मुमकिन हो पाएगा. बड़े और अच्छे ब्रांड्स की क्वालिटी की वजह से यह आपको बच्चों की सेफ्टी की चिंता से भी फ्री करेगा. बस इसके लिए अपनी सर्च को सहेज कर रखें, ताकि जैसे ही ये पॉपुलर और बड़े ब्रांड्स सेकेंडहैड सेल के लिए आएं, तो आप इन्हें तुरंत खरीद पाएं.

सेकेंड हैंड चीजें दोस्तों से भी मिल सकती हैंः  



बच्चों (Children) के लिए सेकेंड हैंड खिलौने और सामान दोस्तों और फैमिली से भी मिल सकते हैं. इससे आपको एक फायदा होता है, ये आपको फ्री में या फिर मार्केट के सेकेंडहैंड सामानों से कम कीमत पर भी मिल सकते हैं. वहीं आप जब इन चीजों को फेसबुक (Facebook ) मार्केटप्लेस (Marketplace) या इबे (eBay) पर अनजान लोगों से खरीदते हैं और उनसे मोल-भाव करने की संभावना भी कम होती है,जबकि फैमिली और दोस्तों के साथ आप यह आसानी से कर सकते हैं.

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बच्चे बहुत तेजी से चीजों से बढ़ते हैं:

बच्चे बहुत तेजी से बढ़ते हैं और इस वजह से उनके लिए अधिक महंगे सामान खरीदने में आपके पैसे की बर्बादी हो सकती है. मसलन आपने बच्चे के लिए कोई बेहद जरूरी महंगा कपड़ा खरीदा और दूसरे ही साल वो छोटा हो गया और आपको उसी कपड़े को दोबारा खरीदना पड़ा, तो फिर हुई न ये पैसे की बर्बादी. बच्चों के लिए जल्दी-जल्दी महंगे कपड़े, जूते और खिलौनों पर इंवेस्टमेंट करने से बचें. इसके साथ ही बच्चे की किसी भी चीज़ को लेकर उत्सुकता उसे पा लेने तक ही होती है, इसलिए महंगा खिलौना हो या सस्ता उन्हें इससे अधिक मतलब नहीं रहता है.

खर्च के मलाल से बचेंगेः 

आपको ऐसे किसी भी आइटम को खरीदने का मलाल नहीं रहेगा जो आपकी सेविंग से अच्छा खासा अमाउंट निकाल लें और कुछ ही समय बाद आपके बच्चे के काम भी न पाएं. इसलिए बच्चों के लिए सामान खरीदने के लिए सेकेंडहैंड शॉपिंग पर विचार जरूर करें.

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सेकेंड हैंड सामान नया भी मिल सकता हैः 

आपको बच्चों के लिए सेकेंडहैंड सामान नया जैसा भी मिल सकता है. इसके लिए आपको बस सेकेंडहैंड शॉपिंग पर जाने से पहले थोड़ी रिसर्च करनी होगी. इससे आप अक्सर बगैर टैग की नई चीजें, ऐसी चीजें जिन्हें पैकेट या बॉक्स से बाहर तक नहीं निकाला गया है या जिनका इस्तेमाल केवल कुछ समय के लिए किया गया है, आसानी से पा सकती हैं.

मिल सकती हैं ऐसी चीजें जो मार्केट में नहीं हैंः  

इस तरह की शॉपिंग के जरिए कभी-कभार आपको ऐसी चीजें भी बच्चों के लिए मिल सकती हैं जो कंपनी ने बनानी बंद कर दी है और वो मार्केट में भी नहीं हैं. कई खिलौने जो बच्चों की पसंद के होते हैं और कंपनी उनको बनाना बंद कर चुकी हो तो ऐसे खिलौने और चीजें आपको सेकेंडहैंड मार्किट में मिल सकते हैं. इसके साथ ही एक बात और जो इस तरह की शॉपिंग के फेवर में जाती है कि बच्चे नई और सेकेंडहैंड चीजों के बीच के अंतर से बेपरवाह होते हैं. उन्हें बस उनकी पसंद की चीज मिल जानी चाहिए.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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