• Home
  • »
  • News
  • »
  • lifestyle
  • »
  • #काम की बात: मैं अपने लिंग की लंबाई कैसे बढ़ा सकता हूं?

#काम की बात: मैं अपने लिंग की लंबाई कैसे बढ़ा सकता हूं?

जानिए क्या कहता है विज्ञान

जानिए क्या कहता है विज्ञान

मानव प्रजाति जितनी पुरानी है, उतना ही पुराना यह सवाल है कि क्‍या लिंग के आकार से सेक्‍स के आनंद पर फर्क पड़ता है. पुरुषों में इस सवाल को लेकर हमेशा से तमाम तरह की शंकाएं और गलत अवधारणाएं रही हैं.

  • Share this:
    प्रश्‍न : मैं अपने लिंग के आकार को लेकर बहुत परेशान रहता हूं. क्‍या इसके आकार को बढ़ाया जा सकता है?

    डॉ. पारस शाह

    कई बार पुरुषों में अपने लिंग की लंबाई को लेकर काफी असंतोष होता है. आज इंटरनेट और स्‍मार्ट फोन के जमाने में गुमराह करने वाले विज्ञापनों की भी कोई कमी नहीं है, जिस कारण अकसर पुरुष अपने लिंग का आकार बढ़ाने के चक्‍कर में फंस जाते हैं और गुमराह होते रहते हैं.

    दुनिया में लिंग की लंबाई बढ़ाने के लिए कोई भी क्रीम, दवा, तेल या पंप नहीं आता है. इस तरह का कोई भी विज्ञापन भ्रामक है और उस पर यकीन नहीं करना चाहिए. सिर्फ ऑपरेशन के जरिए लिंग की लंबाई बढ़ाई जा सकती है. यह ऑपरेशन 2-3 घंटे चलता है और इसके जरिए लिंग की लंबाई को एक से चार इंच तक बढ़ाया जा सकता है.

    लेकिन यहां मैं एक खास बताना बताना चाहूंगा कि आपको इस ऑपरेशन की कोई आवश्‍यकता नहीं है. अगर आप ये ऑपरेशन करवा भी लें तो यकीन मानिए कि इससे आपके साथी को मिलने वाले आनंद में कोई फर्क नहीं आएगा. यहां तक कि आपके शारीरिक आनंद पर भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. यह एक प्रकार की मानसिक संतुष्टि जरूर दे सकता है, लेकिन आपको इसकी जरूरत ही इसलिए महसूस हो रही है क्‍योंकि आपने यह गलतफहमी पाल रखी है कि लिंग के आकार का यौन आनंद से कोई संबंध है.



    सच्‍चाई तो ये है कि शारीरिक संबंध में आनंद का लिंग के आकार से कोई लेना-देना नहीं है. यह एक इतना बड़ा भ्रम है जो आदिकाल से पुरुषों की मानसिक शांति को भंग करता रहा है. इसी चिंता और गलतफहमी का फायदा भ्रामक किस्‍म के विज्ञापन उठाते हैं. 

    मानव प्रजाति जितनी पुरानी है, उतना ही पुराना यह सवाल है कि क्‍या लिंग के आकार से सेक्‍स के आनंद पर फर्क पड़ता है. पुरुषों में इस सवाल को लेकर हमेशा से तमाम तरह की शंकाएं और गलत अवधारणाएं रही हैं. हर पुरुष के मन में यह ख्‍याल रहता है कि उसके लिंग का आकार दूसरे पुरुषों के मुकाबले छोटा है. वह इस सवाल को लेकर हमेशा चिंतित होते हैं और बहुत सारे मामलों में तो हीन भावना से भी ग्रस्‍त रहते हैं. ब्लू फिल्मों का भी इसमें बड़ा रोल है. ब्‍लू फिल्‍मों के हीरो को एक्‍शन में देखकर भी पुरुषों में हीनता बोध आता है.

    हालांकि जैसे फिल्‍मों में दिखाया जाता है कि नायक एक साथ दस गुंडों को अकेले मार गिराता है, वह लार्जर देन लाइफ है, लेकिन वह सच नहीं है, उसी तरह से ब्‍लू फिल्‍मों में दिखाई जा रही चीजें भी सामान्‍य गतिविधियां नहीं हैं. हम दस गुंडों को एक साथ मार गिराने वाले हीरो के साथ तो अपनी तुलना करके हीनता बोध से ग्रस्‍त नहीं होते, क्‍योंकि हम जानते हैं कि यह सच नहीं है. उसी तरह ब्‍लू फिल्‍मों में दिखाई जा रही चीजों और पोर्न स्‍टार की गतिविधियों से भी अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए और न ही इसे लेकर मन में किसी प्रकार की ग्रंथि पालनी चाहिए.

    (डॉ. पारस शाह सानिध्‍य मल्‍टी स्‍पेशिएलिटी हॉस्पिटल में चीफ कंसल्‍टेंट सेक्‍सोलॉजिस्‍ट हैं.)

    ये भी पढ़ें-  #काम की बात: क्या सेक्स के समय लड़कों को भी पीड़ा हो सकती है?

    #काम की बात : क्‍या पहली बार सेक्‍स का अनुभव तकलीफदेह होता है?

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज