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शिव चतुर्दशी: पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाएं ये सामान, भोलेनाथ होंगे प्रसन्न!

shiv chaturdashi 3 may 2019 when is shiv chaturdashi vrat puja vidhi
shiv chaturdashi 3 may 2019 when is shiv chaturdashi vrat puja vidhi

शिव चतुर्दशी के दिन विशेष विधि से पूजा करने से भक्तों पर भगवान शिव का आशीर्वाद बना रहता है. इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है.

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हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की तिथि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है. वैशाख माह में शिव चतुर्दशी व्रत 3 मई शुक्रवार को मनाया जा रहा है. आज के दिन भक्तजन भगवान शिव की पूजा अर्चना करेंगे और व्रत रखेंगे. इस दिन विशेष विधि से पूजा करने से भक्तों पर भगवान शिव का आशीर्वाद बना रहता है. इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है. इस दिन भक्त भगवान शिव के साथ मां पार्वती, उनके पुत्र गणेश जी, कार्तिकेय महाराज की भी साथ में पूजा की जाती है.

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इस विधि से करें व्रत:
दूध से शिवलिंग से अभिषेक करने के बाद बेलपत्र, समीपत्र, कुश तथा दूब अर्पित करें. इससे भगवान शिवजी प्रसन्न होते हैं. अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रुप में चढ़ाया जाता है. शिव चतुर्दशी के दिन पूरा दिन निराहार रहकर इनके व्रत का पालन करना चाहिए.
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शिव चतुर्दशी व्रत के नियम:
शिव चतुर्दशी का व्रत करने वाले लोगों को केवल एक समय भोजन करना चाहिए. सुबह नित्यकर्म के बाद व्रत का संकल्प लेकर धूप, दीप पुष्प आदि से शिवजी की पूजा करें. पूजा में भांग, धतूरा और बेलपत्र का विशेष महत्व है.

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शिव मंत्रों का जाप शिव मंदिर या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है. चतुर्दशी व्रत पूरा होने के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए. इसके बाद स्वयं भोजन करना चाहिए. चतुर्दशी के दिन रात्रि के समय शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए.

रात में करें इन शिव मंत्रों का जाप:
शंकराय नमसेतुभ्यं नमस्ते करवीरक
त्र्यम्बकाय नमस्तुभ्यं महेश्र्वरमत: परमनमस्तेअस्तु महादेवस्थाणवे च ततछ परमू
नमः पशुपते नाथ नमस्ते शम्भवे नमः
नमस्ते परमानन्द नणः सोमार्धधारिणे
नमो भीमाय चोग्राय त्वामहं शरणं गतः

पाप होते हैं नष्ट:
जो भी भक्तजन पूरे श्रद्धाभाव से शिव चतुर्दशी का व्रत करते हैं उनके माता- पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. वह जीवन के सम्पूर्ण सुखों का भोग करता है. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य, संतान एवं विद्या आदि प्राप्त कर अंत में शिवलोक जाता है.

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