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साउथ से आए अन्ना ने शुरू की 'शिव टिक्की वाला' दुकान, पहुंचें कड़कड़डुमा और चखें स्वाद

मलाई चाप, पनीर टिक्का, अचारी चाप, तवा चाप, तवा मशरूम की उड़ती महक ने लोगों को और आकर्षित किया.

मलाई चाप, पनीर टिक्का, अचारी चाप, तवा चाप, तवा मशरूम की उड़ती महक ने लोगों को और आकर्षित किया.

Famous Food Joints In Delhi-NCR: बड़े तवे पर दाल की पिट्ठी से भरी टिक्की तलते ही महक उड़ाने लगती है.

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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)
    सालों पहले एक दक्षिण भारतीय युवा साउथ इंडिया से रोजगार की तलाश में दिल्ली आया. कुछ दिन वह नॉर्थ दिल्ली स्थित शकूरपुर कॉलोनी के मद्रासी ब्लॉक में अपने रिश्तेदार के पास रहा. बाहर सड़क पर बिछी चारपाई पर लेटे हुए वह सामने सम्राट सिनेमा के नाम को देखते हुए सोचता रहता कि क्या काम किया जाए. रिश्तेदारों ने कहा कि अन्ना डोसा-वडा सांबर की दुकान खोल ले. उस बेचारे के पास इस काम के लिए संसाधन ही नहीं थे. दूसरे वह जहां रह रहा था, वहां पहले से इस प्रकार की कई दुकानें मौजूद थीं. वह इस कॉलोनी को छोड़कर यमुनापार आ गया. वहां उसने आलू की टिक्की का खोमचा सजा लिया. काम चल निकला तो खोमचे के काम को बढ़ाकर भल्ले-पापड़ी, गोलगप्पे को भी जोड़ दिया. किस्मत बुलंद थी. काम बढ़ता गया और आइटम जुड़ते गए.

    अब यह खोमचा एक दुकान में तब्दील हो चुका है और खूब चल रहा है. अन्ना का स्वाद लोगों को सालों से पंसद आ रहा है. खास बात यह कि खाने के आइटम तो जुड़े लेकिन दक्षिण भारत के व्यंजन इसमें नहीं जुड़ पाए. अन्ना का मासूमियत भरा जवाब है- मैं इन्हीं आइटमों में बिजी हो गया. आपको यह भी बताते चलें कि अब इस दुकान पर खाने के आइटम खूब हो गए हों लेकिन दुकान के नाम में ‘टिक्की’ ही जुड़ा हुआ है.

    टिक्की का मीठा-खट्टा-चरपरा स्वाद जुबान और दिमाग पर असर दिखाता है
    यमुनापार स्थित आप कड़कड़डूमा के पास कम्युनिटी सेंटर पहुंचेगे तो वहां किसी से भी पूछिए कि ‘शिव टिक्की वाला’ की दुकान कहां पर है. वह आपको कहेगा, यह तो रही. कुछ साल पहले इस दुकान का नाम शिव टिक्की भंडार था. पहले इस दुकान की टिक्की की ही बात कर लें. बड़े तवे पर दाल की पिट्ठी से भरी टिक्की तलते ही महक उड़ाने लगती है. कुरकुरी होने के बाद इस पर मीठी चटनी, हरी चटनी, अदरक के लच्छे, पतली दही और अनार के दाने डालकर पेश किया जाता है तो जी खाने के लिए मचलने लगता है. खाते ही महसूस होने लगेगा कि बनाने वाला पुराना खिलाड़ी है.

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    मीठा-खट्टा-चरपरा स्वाद जुबान में घुलकर दिमाग और दिल पर असर दिखाने लगता है. मुंह से बेसाख्ता निकलता है कि ऐसा ही स्वाद चाहिए था. इस शानदार टिक्की की प्लेट की कीमत 80 रुपये है. असल में जिसे खोमचे का खाना कहा जाता है, वह इस रेस्तरां पर मौजूद है. इनमें 20 रुपये के चार गोलगप्पे के अलावा आलू चाट, दही भल्ला भल्ला पापड़ी शामिल है. सबकी कीमत 80 रुपये प्लेट है.

    मलाई चाप, पनीर टिक्का, अचारी चाप, कुछ भी खा लें, आनंद ही आनंद
    चटपटा खोमचा जब ‘फुल’ हो गया तो अन्ना ने उसका ‘विस्तार’ किया. मुंबइया डिश पाव-भाजी शुरू की गई. वो चल निकली. लोग हैरान कि दक्षिण भारत का एक बंदा अपने ‘देस’ के खानों के बजाय दूसरे प्रांतों के खाने में महारत हासिल कर रहा है. इसके साथ ही शुरू हुआ तंदूरी स्नैक्स में चाप का जलवा. जिसने इस रेस्तरां को मशहूर कर दिया. मलाई चाप, पनीर टिक्का, अचारी चाप, तवा चाप, तवा मशरूम की उड़ती महक ने लोगों को और आकर्षित किया. इनके साथ मलाई टिक्का रोल जैसे आइटम भी चलने लगे और लोगों का स्वाद में मजा आने लगा. मतलब साफ था कि खोमचे के आइटम चाहिए तो वह भी मिल रहे हैं. अगर दरकार पंजाबी स्टाइल टिक्के-शिक्के की है तो वह भी हाजिर. टिक्का-चाप-रोल की कीमत 160 से 220 रुपये प्लेट के बीच है. लोग कहते हैं कि इस दुकान की डिश में इस्तेमाल होने वाले मसालों का असर जादुई सा है. एक बार दुकान पर खा लो तो मन करता है कि फिर से आजमाया जाए.

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    अन्ना और तंबी ने मेहनत से जमाया अपना ठौर
    हम आपको बता चुके हैं कि इस दुकान का ओनर दक्षिण भारतीय है, जिसका नाम शिव कुमार है. उन्होंने वर्ष 1992 में इस काम को शुरू किया था. जिसका धीरे-धीरे विस्तार होता गया. जब काम चल निकला तो उन्होंने दक्षिण भारत से अपने छोटे भाई तंबी को भी बुला लिया. आज दोनों भाई मन से लोगों को स्वादिष्ट खाना खिलाने में जुटे हैं. उनका कहना है कि हमने शुरू से ही इस बात का ध्यान रखा कि अपने खाने में दक्षिण भारतीय भोजन के स्वाद को अलग रखा जाए. बहुत पहले कुछ ‘कारीगरी’ की गई, लेकिन हमें भी मजा नहीं आया. इसलिए निर्णय लिया गया कि स्वाद में उत्तर भारत को ही फोकस रखना है. रेस्तरां का तंदूर शाम चार बजे तंदूर सुलग जाता है और रात 11 बजे तक यहां पर खानपान चलता रहता है. कोई अवकाश नहीं है.

    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: कड़कड़डुमा

    Tags: Food, Lifestyle, Street Food

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