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Shivaji Maharaj Death Anniversary 2020: खेल-खेल में छत्रपति शिवाजी ने सीख ली थी किले को जीतने की कला

News18Hindi
Updated: April 3, 2020, 9:57 AM IST
Shivaji Maharaj Death Anniversary 2020: खेल-खेल में छत्रपति शिवाजी ने सीख ली थी किले को जीतने की कला
आज ही के दिन लगभग 339 साल पहले यानि की 03 अप्रैल 1680 में छत्रपति शिवाजी की मौत हो गई थी.

भारत के वीर सपूतों में से एक छत्रपति शिवाजी की आज पुण्यतिथि है. मराठा वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी का जन्म 1630 में हुआ था.

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भारत के वीर सपूतों में से एक छत्रपति शिवाजी की आज पुण्यतिथि है. मराठा वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी का जन्म 1630 में हुआ था. आज ही के दिन लगभग 339 साल पहले यानि की 03 अप्रैल 1680 में छत्रपति शिवाजी की मौत हो गई थी. इतिहास के पन्नों को पलटकर देखा जाए तो छत्रपति शिवाजी ने मराठा नेवी के कई विदेशी रियासतों को युद्ध में जीता था. छत्रपति शिवाजी के पुण्यतिथि पर हम आपको बताने जा रहे हैं उनके बारे में कुछ ऐसे खास तथ्य, जिन्हें आपने शायद ही पहले सुना या पढ़ा होगा.

- छत्रपति शिवाजी को बचपन से ही युद्ध में हिस्सा लेने का बहुत शौक था. शिवाजी बचपन में बच्चों को इकट्ठा करके उनके नेता बनकर युद्ध करने का खेल खेला करते थे. खेल-खेल में शिवाजी ने किला जीतने का सपना भी संयोजा था. बचपन के बाद युवावस्था में आते ही शिवाजी ने अपने खेल का जमीनी धरा पर उतारा और शत्रुओं पर आक्रमण करके उनके किले पर परचम लहराया.

-  जैसे ही शिवाजी ने पुरंदर और तोरण जैसे किलों पर अपना अधिकार जमाया, वैसे ही उनके नाम और कर्म की सारे दक्षिण में धूम मच गई. दक्षिण के बाद किलों को जीतने की खबर दिल्ली और आगरा तक पहुंची.



- कई किलों पर कब्जा करने से शिवाजी की शक्तियों ने मुगल बादशाह औरंगजेब को चिंता में डाल दिया था. औरंगजेब ने दक्षिण में अपने सूबेदार को शिवाजी पर चढ़ाई करने का आदेश जारी किया था. हालांकि इस लड़ाई में औरंगजेब के सूबेदार को मुंह की खानी पड़ी थी. शिवाजी के साथ लड़ाई में सूबेदार की उंगलियां कट गई और उसका बेटा भी मारा गया.



- शिवाजी को धवस्त करने के लिए राजा जयसिंह ने बीजापुर के सुल्तान से संधि कर पुरंदर के किले को अधिकार में करने की अपने योजना के प्रथम चरण में 24 अप्रैल 1665 ई. को 'व्रजगढ़' के किले पर कब्जा कर लिया. इस दौरान शिवाजी के वीर सेनानायकों में से एक मुरारजी बाजी शहीद हो गए. इसके बाद पुरंदर को किले को बचाने के लिए शिवाजी ने जयसिंह के साथ संधि की पेशकश की. जयसिंह और शिवाजी के बीच यह संधि 22 जून 1655 में पूरी हुई थी.

 

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First published: April 3, 2020, 9:40 AM IST
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